बलिया में सिंघाड़े की खेती किसानों के लिए एक बेहद मुनाफे का सौदा साबित हो रही है। इस फसल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे तैयार करने में न तो ज्यादा समय लगता है और न ही बहुत अधिक मेहनत की आवश्यकता होती है। किसान महज तीन से चार महीने की अवधि के भीतर लाखों रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं। इसी सफलता की एक मिसाल बलिया के किसान सोनू हैं, जो अपनी मेहनत के बल पर इस खेती से काफी खुश हैं। वह पिछले लगभग पांच साल से इस कारोबार से जुड़े हुए हैं और इन दिनों अपनी फसल की तुड़ाई तथा धुलाई के कार्यों में पूरी तरह व्यस्त हैं।
खेती की प्रक्रिया और बुवाई का तरीका
सोनू के अनुसार, उनके पास कुल दस बीघा जमीन पर सिंघाड़े की फसल लहलहा रही है, जिसमें से अकेले एक बीघा से प्रतिदिन लगभग 10 क्विंटल सिंघाड़े का उत्पादन निकल रहा है। इस बड़े पैमाने पर खेती के प्रबंधन के लिए वह करीब बीस मजदूरों के साथ मिलकर कड़ी मेहनत कर रहे हैं। इस फसल को उगाने की शुरुआत पानी में बीज डालकर की जाती है। इसके बाद जब इसकी लताएं यानी लत्ती जम जाती हैं, तब उन्हें उखाड़कर ठीक उसी तरह तालाब में लगाया जाता है जिस प्रकार धान की रोपाई की जाती है।
देखरेख, लागत और कीट नियंत्रण
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान फसल की जरूरत के हिसाब से समय-समय पर कीटनाशक दवाएं डाली जाती हैं। इसमें थोड़ा सा ध्यान रखने की जरूरत होती है और बुवाई के महज 3 महीने बाद ही पौधों पर फल आने शुरू हो जाते हैं। सोनू अपनी इस खेती के परिणामों से बेहद संतुष्ट नजर आते हैं। हालांकि इस खेती में कीट और विभिन्न रोगों का खतरा भी बना रहता है, जो इसकी पत्तियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, इसलिए इस पर विशेष नजर रखनी पड़ती है। उनका मानना है कि यदि किसान थोड़ी सी भी मेहनत और लगन दिखाएं, तो इस कृषि कार्य से बहुत अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने अन्य किसानों को भी इस खेती से जुड़ने की सलाह दी है।
बाजार भाव और सीजनल कमाई
बाजार में इसके दाम गुणवत्ता और सीजन के हिसाब से बदलते रहते हैं। व्यापारी आम दिनों में इसे 30 रुपये, 40 रुपये या 50 रुपये तक के भाव में बेचते हैं। वहीं, महापर्व छठ के दौरान इसकी मांग अचानक बहुत बढ़ जाती है और उस समय यह कम से कम 4,000 रुपये क्विंटल तक के भाव में बिकता है। अकेले छठ के सीजन में प्रति बीघा लगभग एक लाख रुपये तक का सिंघाड़ा निकल जाता है और सोनू कुल दस बीघे में इसकी खेती कर रहे हैं। अक्टूबर और नवंबर के महीनों में कच्चे सिंघाड़े 25 से 30 रुपये से लेकर 80 रुपये प्रति किलो तक बिकते हैं। इसके अलावा, यदि इन्हें उबालकर या पकाकर बेचा जाए, तो बाजार में इसका भाव 150 से 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाता है। आमतौर पर दिसंबर के आते-आते सिंघाड़े की यह फसल पूरी तरह समाप्त हो जाती है।



















