सार्वजनिक क्षेत्र की घाटे में चल रही टेलीकॉम कंपनी महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड के वित्तीय संकट को दूर करने के लिए बड़े कदम की तैयारी चल रही है। केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2027-28 के दौरान कंपनी की लगभग 9000 करोड़ रुपये मूल्य की भूमि और अचल संपत्तियों का मौद्रिकरण करने की योजना बना रही है। इस बिक्री से हासिल होने वाली समूची रकम का इस्तेमाल कंपनी पर लदे विशाल कर्ज के बोझ को कम करने में किया जाएगा। पचास हजार करोड़ रुपये से अधिक की कुल देनदारियों के तले दबी इस टेलीकॉम कंपनी के पुनरुद्धार के लिए परिसंपत्तियों का मौद्रिकरण बेहद अहम माना जा रहा है।
विवादमुक्त 40 चुनिंदा संपत्तियों की होगी नीलामी
बिक्री की इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए संपत्तियों के मालिकाना हक से जुड़े तमाम कानूनी और प्रशासनिक पचड़ों को पूरी तरह सुलझा लिया गया है। अब बाजार में बिक्री के लिए 40 ऐसी संपत्तियां रखी जाएंगी जो पूरी तरह से साफ सुथरी और कानूनी विवादों से मुक्त हैं। इन संपत्तियों के मूल्यांकन और बाजार में उतारने की रूपरेखा तैयार की जा चुकी है, ताकि खुली और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत अधिकतम मूल्य हासिल किया जा सके।
पचास हजार करोड़ रुपये की भारी भरकम देनदारी
टेलीकॉम कंपनी की वित्तीय स्थिति बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है। कंपनी पर इस समय करीब 50,000 करोड़ रुपये की कुल देनदारियां हैं। इस भारी भरकम कर्ज में सरकारी गारंटी वाले बॉन्ड यानी सोवरेन गारंटी बॉन्ड का हिस्सा लगभग 30,000 करोड़ रुपये है। हालांकि, इन वित्तीय दायित्वों को पूरा करने और कर्ज को चुकाने के लिए कंपनी का कुल संपत्ति आधार पर्याप्त सुरक्षा कवच प्रदान करता है। नकदी के गंभीर संकट के चलते कंपनी इस समय अपने कर्मचारियों के नियमित वेतन का भुगतान भी मुख्य रूप से अपनी अचल संपत्तियों से आने वाले किराए की आय के जरिए कर पा रही है।
बीएसएनएल के हाथों में है परिचालन की कमान
महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड देश की प्रमुख सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड की एक अनुषंगी इकाई है। ऐतिहासिक रूप से यह कंपनी देश के दो सबसे बड़े वाणिज्यिक केंद्रों दिल्ली और मुंबई में लैंडलाइन, ब्रॉडबैंड इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं मुहैया कराती आई है। पिछले कुछ वर्षों में निजी टेलीकॉम कंपनियों की कड़ी प्रतिस्पर्धा, ग्राहकों की घटती संख्या और बढ़ते वित्तीय घाटे के चलते इसका स्वतंत्र परिचालन मुश्किल हो गया था। इसी स्थिति को देखते हुए अब बीएसएनएल ने एमटीएनएल के समूचे व्यावसायिक कामकाज और नेटवर्क संचालन की जिम्मेदारी अपने हाथों में ले रखी है।
रणनीतिक विनिवेश की दिशा में सरकार का जोर
सरकारी संपत्तियों और उपक्रमों में हिस्सेदारी बेचकर वित्तीय संसाधन जुटाने की कड़ी में यह एक बड़ा कदम है। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आईडीबीआई बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के सौदे को अपनी अंतिम मंजूरी दी थी। इस सौदे के तहत कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड ने 52,878.08 करोड़ रुपये में आईडीबीआई बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने का प्रस्ताव दिया है। एयर इंडिया के निजीकरण के बाद देश का यह सबसे बड़ा रणनीतिक विनिवेश माना जा रहा है, जिसमें केंद्र सरकार अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी और जीवन बीमा निगम अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रहे हैं। इसी वित्तीय प्रबंधन की नीति के तहत अब टेलीकॉम क्षेत्र की संकटग्रस्त परिसंपत्तियों को भुनाने की रूपरेखा पर काम तेज किया गया है।

















