उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मसूरी में इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है, जिससे वहां व्यवसाय करने वाले टैक्सी चालकों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट पैदा हो गया है। पर्यटकों की आमद में करीब 80 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है, जिसके चलते ड्राइवरों की रोजाना होने वाली कमाई पूरी तरह बंद हो चुकी है। अब स्थिति यह हो गई है कि उनके लिए अपने परिवार का भरण-पोषण करना, बच्चों की स्कूल फीस चुकाना और घर चलाना बेहद कठिन साबित हो रहा है। इसके अलावा वाहनों की बैंक किस्तें, बीमा और हर महीने होने वाले रखरखाव के खर्चों ने इस आर्थिक दबाव को और अधिक बढ़ा दिया है। कभी सैलानियों की चहल-पहल से आबाद रहने वाले यहां के टैक्सी स्टैंड इन दिनों बिल्कुल वीरान पड़े हैं, जहां ड्राइवर सारा दिन बस सवारियों के इंतजार में बैठे रहते हैं।
मानसून और चारधाम यात्रा की सुस्ती बनी मुख्य वजह
इस विकट स्थिति के पीछे मुख्य तौर पर मानसून का मौसम और चारधाम यात्रा का धीमा पड़ना माना जा रहा है। टैक्सी चालक जितेंद्र कुमार के मुताबिक, बरसात के कारण मसूरी की ओर आने वाले मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे वाहनों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही चारधाम यात्रा भी अब लगभग ठप पड़ चुकी है। अमूमन मानसून के आने से पहले ही पर्यटक सतर्क हो जाते हैं और अपनी यात्राओं को रद्द कर देते हैं। इस समय बाहर से आने वाले सैलानियों का आंकड़ा न के बराबर है और बमुश्किल थोड़ा-बहुत स्थानीय कामकाज ही मिल पा रहा है।
बैंक लोन चुकाना बना जी का जंजाल
पर्यटन सीजन के भरोसे पर ही कई स्थानीय युवाओं ने बैंक से कर्ज लेकर अपनी टैक्सियां खरीदी थीं, लेकिन अब इन गाड़ियों की किस्तें भरना उनके लिए जी का जंजाल बन गया है। जितेंद्र कुमार का कहना है कि उनके कई साथियों ने लोन पर गाड़ियां ली हैं और मौजूदा समय में मासिक किस्त निकाल पाना असंभव सा हो गया है। एक वाहन के जरिए कई लोगों के घरों का चूल्हा जलता है, लेकिन उत्तराखंड राज्य में रोजगार के अन्य पर्याप्त साधन न होने के कारण युवाओं को मजबूरी में टैक्सी चलाने का पेशा अपनाना पड़ता है। हालांकि, यह काम केवल सीजन के वक्त ही चल पाता है और ऑफ सीजन के दौरान तो दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी किसी चुनौती से कम नहीं होता है.
बीस दिनों तक नहीं हो रही बोहनी
कामकाज पूरी तरह से ठप होने के कारण विभिन्न टैक्सी यूनियनों से जुड़े सदस्य पूरा दिन स्टैंडों पर खाली बैठने को मजबूर हो रहे हैं। टैक्सी चालक दिलीप ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि स्टैंड पूरी तरह वीरान पड़े हैं और यूनियन के तमाम ड्राइवर खाली बैठे रहते हैं। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि कई बार लगातार 20-20 दिनों तक बोहनी तक नसीब नहीं हो पाती है। मौसम की दोहरी मार सीधे तौर पर इन चालकों पर पड़ रही है। मौजूदा महंगाई के दौर में बच्चों की पढ़ाई का खर्च, दवाइयों का बंदोबस्त और गाड़ी के रखरखाव के पैसे जुटाना उनके लिए पहाड़ जैसी समस्या बन चुका है।
प्रशासन से राहत पैकेज की आस
पर्यटन की गतिशीलता पटरी पर कब लौटेगी, इसे लेकर अभी तक पूरी तरह अनिश्चितता बनी हुई है। टैक्सी चालक मुकेश के अनुसार देहरादून और मसूरी आने वाले सैलानियों की संख्या में अभूतपूर्व गिरावट आई है। स्थिति यह है कि पूरे दिन में बमुश्किल तीन से चार यात्री मिलते हैं और कई बार तो एक भी सवारी नहीं मिल पाती है। चालकों को केवल बारिश थमने के बाद ही कारोबार के दोबारा पटरी पर लौटने की थोड़ी-बहुत उम्मीद है। ऐसे कड़े हालातों के बीच टैक्सी चालकों ने सरकार और स्थानीय प्रशासन के समक्ष गुहार लगाई है कि उन्हें आर्थिक तंगी से उबारने के लिए उचित राहत पैकेज और सहायता प्रदान की जाए।



















