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MSME की ताकत पर टिका भारत का ई-कॉमर्स निर्यात, 2-3 साल में 10 अरब डॉलर जुड़ने की उम्मीदव्यापार
29 जून 2026, 10:06 pm (45 दिन पहले)· 3

MSME की ताकत पर टिका भारत का ई-कॉमर्स निर्यात, 2-3 साल में 10 अरब डॉलर जुड़ने की उम्मीद

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के अतिरिक्त निदेशक राजेश कुमार मिश्रा ने कहा कि भारत अगले दो से तीन साल में ई-कॉमर्स निर्यात में 10 अरब डॉलर या उससे अधिक की बढ़ोतरी कर सकता है। उन्होंने MSME आधार, इंडिया पोस्ट की लॉजिस्टिक्स क्षमता और मुक्त व्यापार समझौतों को इस वृद्धि के मुख्य आधार बताया।

भारत के ई-कॉमर्स निर्यात में अभी बहुत गुंजाइश बाकी है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के वरिष्ठ अधिकारी राजेश कुमार मिश्रा का कहना है कि अगले दो से तीन साल में देश अपने ई-कॉमर्स निर्यात में 10 अरब डॉलर या उससे ज़्यादा जोड़ सकता है। DGFT में अतिरिक्त निदेशक के पद पर कार्यरत मिश्रा ने भारत की तुलना चीन से की, जो हर साल 300 अरब डॉलर का सामान ई-कॉमर्स के ज़रिए दुनियाभर में निर्यात करता है।

विशाल अंतर को पाटने का बड़ा मौका

मिश्रा का तर्क एकदम सीधा है। भारत के पास MSME की एक विशाल फौज है, जो गुणवत्तापूर्ण सामान बनाने में सक्षम है, लेकिन यह ताकत अभी तक वैश्विक डिजिटल व्यापार में पूरी तरह नहीं झोंकी गई है। उन्होंने कहा, “हमें ई-कॉमर्स के ज़रिए 10 अरब डॉलर या उससे ज़्यादा का निर्यात जोड़ना चाहिए। संभावना बहुत बड़ी है क्योंकि हम एक बड़ा देश हैं और यहां बड़ी संख्या में MSME हैं जो गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बनाने की क्षमता रखते हैं।”

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सही प्लेटफॉर्म, किफायती लॉजिस्टिक्स और बाज़ार की ठोस तैयारी हो, तो भारत के छोटे निर्माता आज की तुलना में कहीं बड़े पैमाने पर विदेशी खरीदारों तक पहुंच सकते हैं। बस ज़रूरत है दिशा और तैयारी की।

इंडिया पोस्ट: सस्ते निर्यात का सरकारी विकल्प

मिश्रा ने जिस व्यावहारिक समाधान पर सबसे ज़्यादा ज़ोर दिया, वह है इंडिया पोस्ट, यानी केंद्र सरकार का अपना डाक नेटवर्क। उनके मुताबिक, छोटे निर्यातक इस बुनियादी ढांचे का उपयोग करके विदेशों में छोटी खेपें प्रतिस्पर्धी दरों पर भेज सकते हैं। उन्होंने कहा, “ई-कॉमर्स वैश्विक उपभोक्ता आधार की ज़रूरतों को पूरा करता है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं और इंडिया पोस्ट जैसी सप्लाई चेन का लाभ उठाया जा सकता है। यह भारत सरकार का अपना डाक विभाग है जो विदेशों में सामान भेजने के लिए बेहद प्रतिस्पर्धी दरें देता है। इसे एक ऐसी स्थिति बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है जहां हमारी छोटी खेपें भी किफायती दर पर विदेश पहुंच सकें।”

यह एक अहम बिंदु है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स की ऊंची लागत छोटे निर्यातकों के लिए हमेशा से एक बड़ी रुकावट रही है। सरकारी तंत्र से किफायती विकल्प मिले तो ज़्यादा MSME वैश्विक बाज़ारों में सीधे उतर सकते हैं।

FTA का फायदा उठाने के लिए तैयारी ज़रूरी

भारत कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) कर रहा है, लेकिन मिश्रा ने साफ किया कि ये समझौते तभी काम आएंगे जब MSME और निर्माता पूरी तरह तैयार होंगे। हर FTA के अपने नियम, उत्पाद मानक और बाज़ार की ज़रूरतें होती हैं, जिन्हें निर्यातकों और उत्पादकों को ठीक से समझना होगा। बिना इस तैयारी के FTA के फायदे कागज़ों तक ही सीमित रह जाएंगे।

MSME और GDP में 25 फीसदी विनिर्माण का लक्ष्य

मिश्रा ने ई-कॉमर्स निर्यात की बात को भारत की दीर्घकालिक औद्योगिक महत्वाकांक्षाओं से भी जोड़ा। सरकारी नीति का लक्ष्य है कि विनिर्माण क्षेत्र देश की GDP का 25 फीसदी हिस्सा बने। इस लक्ष्य को पाने में MSME की भूमिका केंद्रीय होगी क्योंकि ये पूरे देश में भारी संख्या में फैले हैं। मिश्रा ने कहा कि इस क्षेत्र के उद्यमियों को गुणवत्ता के मानक ऊंचे करने होंगे और महत्वाकांक्षाएं बड़ी रखनी होंगी, क्योंकि कारोबार का आकार बढ़ने से सामूहिक आर्थिक असर भी उतना ही बड़ा होता है।

एक ट्रिलियन डॉलर के माल निर्यात का बड़ा लक्ष्य

भारत ने पांच साल में माल निर्यात में 1 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य तय किया है। मिश्रा ने स्पष्ट रूप से कहा कि केवल FTA से यह आंकड़ा हासिल नहीं होगा। कई कारकों को एकसाथ और एकजुट होकर काम करना होगा।

उन्होंने कहा, “यह सभी चीज़ों का एक गुलदस्ता है। ई-कॉमर्स अपना योगदान देगा, गुणवत्ता सुधार अपना, और निर्यात प्रोत्साहन मिशन के ज़रिए दिया जा रहा कर्ज़ अपना। यह किसी एक चीज़ से नहीं होगा, बल्कि उन तमाम कारकों के मेल से होगा जिनसे हम इस वक्त गुज़र रहे हैं।” मिश्रा ने ई-कॉमर्स विस्तार, गुणवत्ता सुधार और निर्यात प्रोत्साहन मिशन की क्रेडिट सहायता को भारतीय निर्यात वृद्धि के तीन ज़रूरी स्तंभों के रूप में रेखांकित किया।

सवाल-जवाब

भारत के ई-कॉमर्स निर्यात में कितनी बढ़ोतरी का अनुमान है?
DGFT के अतिरिक्त निदेशक राजेश कुमार मिश्रा के मुताबिक, अगले दो से तीन साल में 10 अरब डॉलर या उससे अधिक की बढ़ोतरी हो सकती है।
यह बयान किसने दिया और वे किस पद पर हैं?
यह बात राजेश कुमार मिश्रा ने कही, जो विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) में अतिरिक्त निदेशक हैं।
चीन के ई-कॉमर्स निर्यात से तुलना क्यों की गई?
चीन हर साल 300 अरब डॉलर का सामान ई-कॉमर्स के ज़रिए निर्यात करता है, जो भारत के लिए संभावित पैमाने का अंदाज़ा देता है।
इंडिया पोस्ट छोटे निर्यातकों की कैसे मदद कर सकता है?
इंडिया पोस्ट विदेशों में सामान भेजने के लिए प्रतिस्पर्धी दरें देता है, जिससे छोटे निर्यातक भी किफायती कीमत पर छोटी खेपें विदेशी बाज़ारों तक भेज सकते हैं।
FTA का पूरा फायदा उठाने के लिए MSME को क्या करना होगा?
मिश्रा के मुताबिक, MSME और निर्माताओं को हर मुक्त व्यापार समझौते के नियम, मानक और बाज़ार की ज़रूरतें ठीक से समझनी होंगी, तभी इन समझौतों का वास्तविक लाभ मिलेगा।
भारत का माल निर्यात लक्ष्य क्या है?
भारत ने पांच साल में माल निर्यात में 1 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य तय किया है।
क्या FTA अकेले 1 ट्रिलियन डॉलर का निर्यात लक्ष्य पूरा कर सकते हैं?
नहीं, मिश्रा ने स्पष्ट कहा कि FTA अकेले यह लक्ष्य हासिल नहीं कर सकते। ई-कॉमर्स, गुणवत्ता सुधार और निर्यात प्रोत्साहन मिशन की क्रेडिट सहायता जैसे कई कारकों को मिलकर काम करना होगा।
विनिर्माण क्षेत्र में MSME का क्या लक्ष्य है?
सरकार चाहती है कि विनिर्माण क्षेत्र GDP का 25 फीसदी बने और इसमें MSME की बड़ी और केंद्रीय भूमिका होगी।
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