नागौर के किसानों के लिए मुनाफे की नई राह बनी स्पेनिश बंच मूंगफली, कम पानी में भी जबरदस्त पैदावारव्यापार
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नागौर के किसानों के लिए मुनाफे की नई राह बनी स्पेनिश बंच मूंगफली, कम पानी में भी जबरदस्त पैदावार

नागौर के हल्की रेतीली ज़मीन और कम बारिश वाले इलाकों में स्पेनिश बंच किस्म की मूंगफली किसानों की पहली पसंद बनती जा रही है, जो 100 से 120 दिनों में तैयार होकर प्रति हेक्टेयर 20 से 30 क्विंटल तक उत्पादन देती है।

कम बारिश और बदलते मौसम की मार झेल रहे नागौर के किसानों को मूंगफली की एक खास किस्म ने नया सहारा दिया है। पारंपरिक फसलों के मुकाबले मूंगफली वैसे भी ज़्यादा आमदनी देती है, लेकिन स्पेनिश बंच किस्म ने यहाँ की जलवायु और मिट्टी के हिसाब से खुद को सबसे भरोसेमंद विकल्प साबित किया है। यही वजह है कि जिले में बड़ी संख्या में किसान अब इसी किस्म की बुवाई की ओर रुख कर रहे हैं।

कम बारिश वाले इलाकों के लिए मुफ़ीद

स्पेनिश बंच की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी अच्छा उत्पादन देने की क्षमता रखती है। अनिश्चित मानसून के इस दौर में यही गुण इसे किसानों की पहली पसंद बना रहा है। नागौर के उन्नत किसान हरि राम का कहना है कि बदलते मौसम और भरोसे लायक न रहे मानसून को देखते हुए यह किस्म किसानों के लिए एक सुरक्षित दांव है।

उन्होंने बताया कि नागौर जिले के अधिकांश हिस्सों की ज़मीन हल्की रेतीली है और उसमें पानी का निकास अच्छा होता है, जो मूंगफली की खेती के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है। इस किस्म की फसल करीब 100 से 120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। कम अवधि की फसल होने का सीधा फायदा यह है कि किसानों को मौसम से जुड़ा जोखिम कम उठाना पड़ता है।

देखभाल आसान, पानी की ज़रूरत कम

हरि राम के मुताबिक इसके पौधे सीधे, छोटे और झाड़ीनुमा होते हैं, जिससे पौधों की देखभाल और पूरी फसल का प्रबंधन आसान हो जाता है। इसके साथ ही यह किस्म कम पानी में काम चला लेती है और बदले में उत्पादन भी ज़्यादा देती है।

दानों में 45 से 50 प्रतिशत तेल

कृषि विशेषज्ञ बजरंग चौधरी बताते हैं कि स्पेनिश बंच मूंगफली के दानों में 45 से 50 प्रतिशत तक तेल पाया जाता है। इतनी ऊँची तेल मात्रा की वजह से तेल उद्योग और बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। एक और फायदा यह है कि इसकी फलियां एक जैसे आकार की होती हैं, जिससे कटाई, सफाई और ग्रेडिंग का काम सरल हो जाता है और बेचते समय किसानों को बेहतर भाव मिलने की गुंजाइश रहती है।

बुवाई का सही तरीका और दूरी

चौधरी सलाह देते हैं कि बुवाई से पहले खेत की अच्छी तैयारी करना और सिर्फ़ प्रमाणित बीजों का इस्तेमाल करना ज़रूरी है। एक हेक्टेयर के लिए करीब 80 से 100 किलोग्राम बीज पर्याप्त माना जाता है। बुवाई करते समय कतार से कतार के बीच 30 से 45 सेंटीमीटर और एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच 10 से 15 सेंटीमीटर की दूरी रखने पर नतीजे बेहतर आते हैं। इसके अलावा संतुलित उर्वरक प्रबंधन और सही समय पर खरपतवार पर नियंत्रण रखने से पैदावार और बढ़ जाती है।

प्रति हेक्टेयर 20 से 30 क्विंटल तक उपज

नागौर में बुवाई का उपयुक्त समय मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद जून के आखिरी सप्ताह से लेकर जुलाई के मध्य तक माना जाता है। अगर फसल को शुरुआती दौर में पर्याप्त नमी मिल जाए और रोग व कीट प्रबंधन समय रहते कर लिया जाए, तो प्रति हेक्टेयर 20 से 30 क्विंटल तक उत्पादन लिया जा सकता है। यही कारण है कि कम बारिश वाले नागौर जिले में स्पेनिश बंच मूंगफली एक लाभकारी और भरोसेमंद फसल के रूप में तेज़ी से उभर रही है।

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