बिहार के कटिहार जिले से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जहां एक सरकारी कार्यालय खुद अखाड़े में तब्दील हो गया। जनता की समस्याओं का समाधान करने और फाइलों के निपटारे के लिए बने इस दफ्तर में जिम्मेदारी संभालने वाले लोग ही आपस में भिड़ गए। एक तरफ जहां अधिकारी अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने के लिए होते हैं, वहीं कटिहार के सदर अंचल कार्यालय के अंदर हुई इस घटना ने महकमे की साख को गहरा धक्का पहुंचाया है।
कार्यालय के भीतर अंचल अधिकारी और प्रधान लिपिक के बीच उपजा विवाद कुछ ही पलों में हाथापाई तक जा पहुंचा। इस पूरे वाकये का सीसीटीवी फुटेज अब सामने आ चुका है, जिसमें दोनों के बीच तीखी नोकझोक से लेकर धक्का-मुक्की और मारपीट की स्थिति साफ नजर आ रही है। फुटेज में अंचल अधिकारी सोनू भगत और प्रधान लिपिक संजय वर्मा के बीच पहले तीखी बहस होती दिखती है, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। आम नागरिकों की फाइलों पर मुहर लगाने वाली जगह पर इस तरह के तमाशे ने पूरे राजस्व विभाग को सकते में डाल दिया है।
पुलिस थाने तक पहुंचा मामला और शिकायतों का दौर
इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद बात केवल कार्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं रही, बल्कि दोनों पक्षों की तरफ से स्थानीय सहायक थाना में लिखित आवेदन भी सौंपे गए हैं। घटना के बाद से पूरे प्रशासनिक महकमे में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। स्थानीय स्तर पर ऐसी बातें भी सामने आ रही हैं कि फाइलों के निस्तारण और कथित अवैध वसूली को लेकर यह पूरा विवाद शुरू हुआ था, हालांकि इस बात की अभी तक किसी भी आधिकारिक स्तर पर पुष्टि नहीं की गई है। असली वजह क्या थी, यह पूरी जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
हाल ही में सर्जरी कराकर ड्यूटी पर लौटे थे अधिकारी
इस पूरे प्रकरण से जुड़ी एक और बात चर्चा का विषय बनी हुई है। अंचल अधिकारी सोनू भगत कुछ समय पहले ही एक छात्र आंदोलन के दौरान हुई पत्थरबाजी की घटना में घायल हो गए थे। उनकी आंख में चोट लग गई थी और वे हाल ही में उसका सफल ऑपरेशन करवाकर वापस अपनी ड्यूटी पर लौटे थे। लेकिन काम संभालते ही कार्यालय के भीतर ऐसा टकराव हुआ जिसने सभी को चौंका दिया।
जिलाधिकारी ने दिए जांच के सख्त आदेश
प्रशासन ने इस गंभीर अनुशासनहीनता को बहुत ही कड़े रुख से लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने तुरंत प्रभाव से जांच के आदेश जारी कर दिए हैं और एक विशेष टीम का गठन भी किया गया है। यह जांच टीम सामने आए सीसीटीवी फुटेज, दोनों पक्षों द्वारा थाने में दिए गए आवेदनों और उनके बयानों को आधार बनाकर मामले की तह तक जाने का प्रयास कर रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि आखिर उस रोज कार्यालय के बंद कमरे में ऐसा क्या घटा कि फाइलों का काम छोड़कर मामला सीधे मारपीट तक जा पहुंचा।



















