कानपुर के औद्योगिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के बाद उत्तर प्रदेश से होने वाले निर्यात में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। इस समझौते की बदौलत राज्य के निर्यातकों के लिए ओशिनिया क्षेत्र के देशों में व्यापार के द्वार व्यापक रूप से खुल गए हैं। विशेषज्ञों और उद्योगपतियों का मानना है कि चमड़ा उद्योग, तैयार वस्त्र, कालीन, हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग उपकरण, कृषि उत्पाद और फूड प्रोसेसिंग जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए यह एक स्वर्णिम अवसर है। शुरुआत में ही करीब 250 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर प्राप्त होने से कानपुर, आगरा, नोएडा, मुरादाबाद, वाराणसी और भदोही जैसे औद्योगिक केंद्रों में उत्साह का माहौल है।
ओशिनिया क्षेत्र में भारतीय उत्पादों की बढ़ती धमक
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशन (FIEO) के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव के अनुसार, न्यूजीलैंड के साथ व्यापारिक सुगमता बढ़ने का लाभ केवल उसी देश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे पापुआ न्यू गिनी, फिजी, समोआ, टोंगा और वनुआटू जैसे छोटे द्वीपीय देशों तक भारतीय उत्पादों की पहुंच आसान हो जाएगी। अतीत में इन दूरदराज के देशों के साथ व्यापार करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अब नई परिस्थितियों में व्यापारिक मार्ग सुलभ हो गए हैं। यूपी का पीतल का काम, फुटवियर, रेडीमेड गारमेंट और इंजीनियरिंग से जुड़े सामान की इन देशों में भारी मांग देखी जा रही है, जो प्रदेश के हजारों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को सीधे तौर पर सशक्त बनाएगा।
निर्यात लक्ष्य और भविष्य की संभावनाएं
निर्यात परिषद से जुड़े विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि व्यापार की यही गति बरकरार रही, तो उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात आगामी समय में 30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान, उत्तर प्रदेश ने न्यूजीलैंड को लगभग 1200 करोड़ रुपये का माल निर्यात किया था, जो इस नए समझौते के बाद और अधिक बढ़ने की प्रबल संभावना है। उद्योग जगत का स्पष्ट मानना है कि यदि राज्य सरकार निर्यातकों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भागीदारी सुनिश्चित करने और समय-समय पर व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भेजने में सक्रिय सहायता करे, तो ओशिनिया का पूरा क्षेत्र यूपी के उत्पादों के लिए एक विशाल बाजार बनकर उभरेगा।
इस व्यापारिक विस्तार का सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। इससे न केवल नए निवेश आकर्षित होंगे और औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि हजारों नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। आर्थिक साझेदारी का यह नया अध्याय उत्तर प्रदेश के एमएसएमई सेक्टर की नींव को मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।













