गुजरात का मशहूर केसर आम अपने लाजवाब स्वाद और सोंधी खुशबू के लिए न सिर्फ देश बल्कि पूरी दुनिया में अपनी एक खास पहचान रखता है। आमतौर पर इस खास फल का सीजन अप्रैल के महीने में शुरू होता है और मई आते-आते यह अपने चरम पर पहुंच जाता है। लेकिन इस बार प्रकृति ने कुछ ऐसा अनूठा खेल दिखाया कि सर्दियों की ठंडी शुरुआत होने से पहले ही केसर आम बाजारों की शोभा बढ़ाने पहुंच गया। गुजरात के पोरबंदर मार्केटिंग यार्ड में शरद पूर्णिमा के ठीक अगले दिन नीलामी के लिए केसर आम से भरे चार बक्से लाए गए, जिनमें से प्रत्येक बक्से का वजन 10 किलोग्राम था। इस अजीबोगरीब घटना ने स्थानीय व्यापारियों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को पूरी तरह से अचंभित कर दिया है।
कहां से आए आम के चार बक्से और कैसे हुई नीलामी
ये अनोखे आम गुजरात के बरडा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रानावव और हनुमानगढ़ गांवों से तोड़कर लाए गए थे। इन सभी बक्सों को पोरबंदर मार्केटिंग यार्ड में स्थित सुदामा फ्रूट कंपनी की दुकान पर बिक्री और नीलामी के लिए रखा गया था। आम के पारंपरिक और निर्धारित सीजन से कई महीने पहले इस फल का बाजार में आ जाना किसी हैरानी से कम नहीं था। इस अनूठी नीलामी की शुरुआत बेहद पारंपरिक और उत्साहजनक तरीके से हुई, जहां नारियल फोड़कर और लोगों में मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया गया। वहां मौजूद सभी व्यापारियों ने इसे प्रकृति का एक अनोखा और दुर्लभ करिश्मा करार दिया, जिसने सबको चौंका दिया।
नीलामी में टूटे सारे रिकॉर्ड और ब्रिटेन तक हुई पहुंच
इस अद्भुत नीलामी के दौरान 10 किलो के महज एक बक्से के लिए भारी-भरकम 14,500 रुपये की बोली लगाई गई, जिसके हिसाब से आम की यह खेप 1,450 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बिकी। इसके अलावा, दो अन्य बक्से कुल 28,500 रुपये की कीमत में बिके, जो कि 1,425 रुपये प्रति किलो की दर से तय हुए। वहीं, चौथे और अंतिम बक्से की कीमत 10,500 रुपये लगाई गई, जो 1,050 रुपये प्रति किलोग्राम के बराबर बैठती है। इन चारों बक्सों की कुल मिला जुलकर बिक्री 53,500 रुपये में संपन्न हुई। खास बात यह रही कि इनमें से एक बक्सा राजकोट के एक व्यापारी ने खरीदा और दूसरा पोरबंदर के ही स्थानीय व्यापारी के हाथ लगा, जबकि बाकी के दो बक्से ब्रिटेन (UK) भेजने यानी निर्यात करने के उद्देश्य से खरीदे गए।
समय से पहले फल आने की वजह बनी मौसम की मार
सुदामा फ्रूट कंपनी से जुड़े नितिन दसानी के मुताबिक, इस बार मानसून के सीजन के दौरान पर्याप्त बारिश नहीं हुई और उसके बाद लगातार भीषण गर्मी का प्रकोप झेलना पड़ा। इसी वजह से आम के पेड़ों पर सावन यानी श्रावण के पवित्र महीने में ही समय से पहले नए फूल खिल उठे। मौसम में आए इन्हीं असामान्य और विपरीत बदलावों के चलते आम तय समय से काफी पहले ही पककर तैयार हो गए और बाजारों तक पहुंच गए। हालांकि, कारोबारियों का यह भी मानना है कि यह एक बेहद दुर्लभ और अलग घटना है, जिससे केसर आम के कुल उत्पादन या आने वाले मुख्य मौसम के बारे में कोई बहुत बड़ा व्यापक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है।
अप्रैल-मई के बजाय अक्टूबर में नीलामी
मतौर पर गुजरात के गिर-सोमनाथ और उसके आसपास के तमाम इलाकों में उत्पादित होने वाला केसर आम अपनी बेहतरीन क्वालिटी के कारण जाना जाता है और इसकी भारी मात्रा विदेशों में भी भेजी जाती है। आमतौर पर गर्मियों के मौसम में अपनी मिठास बिखेरने वाला यह फल इस बार सीधे अक्टूबर के महीने में नीलामी के लिए पहुंच गया, जिसने फल कारोबारियों और आम ग्राहकों दोनों को हैरान कर दिया है। अब इस बेमौसम और असामान्य समय पर हुई इस रिकॉर्ड नीलामी की वजह से पोरबंदर का यह केसर आम हर तरफ चर्चा का मुख्य विषय बन गया है।

















