पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी पीपीएफ देश के करोड़ों निवेशकों के बीच एक बेहद लोकप्रिय लंबी अवधि की बचत योजना है। आम तौर पर लोग इसे केवल रिटायरमेंट फंड तैयार करने या टैक्स छूट हासिल करने के एक सुरक्षित साधन के तौर पर देखते हैं। सरकार हर साल इस योजना पर तय ब्याज प्रदान करती है, जिससे सुरक्षित रिटर्न चाहने वाले निवेशक लगातार इसमें पूंजी लगाते हैं। हालांकि बहुत कम खाताधारकों को इस बात की पूरी जानकारी होती है कि किसी अप्रत्याशित वित्तीय संकट के समय यह फंड नकदी की तत्काल जरूरत पूरी करने में भी अत्यंत मददगार साबित हो सकता है।
दीर्घकालिक निवेश का ढांचा और मौजूदा रिटर्न
पीपीएफ योजना में एक बार खाता खोलने के बाद अनिवार्य रूप से 15 साल की अवधि तक निवेश जारी रखा जाता है। इस प्रारंभिक 15 साल की मैच्योरिटी पूरी हो जाने के बाद भी निवेशकों को इसे आगे जारी रखने की सुविधा मिलती है। नियमों के तहत खाताधारक पांच-पांच साल के ब्लॉक में अधिकतम तीन बार अपने खाते की समयावधि को आगे बढ़ा सकते हैं। मौजूदा समय में केंद्र सरकार की ओर से पीपीएफ निवेश पर करीब 7.1 फीसदी यानी 7.10 फीसदी का सालाना ब्याज दिया जा रहा है। टैक्स बचत के आकर्षक फायदों के कारण यह योजना मध्यम वर्ग के निवेशकों की प्राथमिक पसंद बनी रहती है।
अचानक आए खर्चों में खाता तोड़े बिना नकदी का सहारा
जिंदगी में आपातकालीन खर्च कभी पहले से बताकर नहीं आते हैं। परिवार में अचानक कोई गंभीर मेडिकल बिल सामने आ जाए, मकान की जरूरी मरम्मत करानी हो या कोई अन्य अप्रत्याशित पारिवारिक आवश्यकता आ पड़े, तो तत्काल पैसों की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसी विषम परिस्थितियों में अपने पीपीएफ खाते को समय से पहले बंद कराए बिना अथवा फंड को तोड़े बिना भी वित्तीय मदद प्राप्त की जा सकती है। योजना के प्रावधान खाताधारकों को अपनी ही जमा पूंजी के आधार पर लोन लेने की कानूनी अनुमति देते हैं, जिससे लंबी अवधि की वित्तीय योजना भी प्रभावित नहीं होती है।
लोन सुविधा के लिए निर्धारित समयसीमा और पात्रता
पीपीएफ खाते पर लोन लेने की सुविधा पूरे 15 साल के कार्यकाल के दौरान हर समय उपलब्ध नहीं रहती है। इसके लिए नियम काफी स्पष्ट और सख्त हैं। खाताधारक खाता खोलने के बाद तीसरे वित्त वर्ष की शुरुआत से लेकर छठे वित्त वर्ष के अंत तक ही इस विशेष लोन सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी निवेशक को अल्पकालिक जरूरत के लिए एक सीमित धनराशि की आवश्यकता है, तो वह इसी तय समयावधि के भीतर आवेदन कर सकता है। छठे वित्त वर्ष की समाप्ति के बाद इस ऋण सुविधा का रास्ता बंद हो जाता है, क्योंकि उसके बाद आंशिक निकासी के अन्य नियम लागू हो जाते हैं।
अधिकतम कर्ज सीमा और ब्याज गणना का पूरा गणित
पीपीएफ लोन के तहत मिलने वाली राशि की एक अधिकतम सीमा भी निर्धारित है। खाताधारक अपनी कुल जमा पूंजी का केवल 25 फीसदी हिस्सा ही लोन या एडवांस के रूप में निकाल सकता है। इसे ऐसे समझा जा सकता है कि यदि किसी निवेशक के खाते में कुल जमा राशि 6 लाख रुपये है, तो वह अधिक से अधिक 1.5 लाख रुपये का ही लोन प्राप्त करने का पात्र होगा। इसके अलावा इस लोन पर लगने वाला ब्याज किसी भी कमर्शियल बैंक के पर्सनल लोन की तुलना में काफी सस्ता पड़ता है। नियमों के अनुसार, पीपीएफ खाते पर मिलने वाले मौजूदा ब्याज दर से ठीक 1 फीसदी अधिक ब्याज लोन पर वसूला जाता है। वर्तमान में पीपीएफ पर ब्याज दर 7.10 फीसदी है, जिसका अर्थ है कि लोन लेने वाले व्यक्ति को 8.1 फीसदी की प्रभावी ब्याज दर चुकानी होगी, जिसमें खाते पर मिलने वाला 7.1 फीसदी ब्याज समायोजित रहता है।
















