बरसात का दौर खत्म होते ही दोपहिया वाहनों की मुकम्मल देखरेख करना बेहद आवश्यक हो जाता है। लगातार होने वाली बारिश के दौरान पानी, कीचड़ और हवा की नमी गाड़ी के बारीक से बारीक कलपुर्जों के भीतर तक घर कर जाती है। यह ठहरा हुआ पानी और चिपचिपी गंदगी सीधे तौर पर मोटरसाइकिल की ड्राइव चेन, ब्रेकिंग मैकेनिज्म, वायरिंग और इंजन पर बुरा असर डालते हैं। यदि मौसम बदलते ही इस पर ध्यान न दिया जाए, तो धातु के पार्ट्स में जंग लगने, मशीनरी खराब होने और बीच रास्ते में गाड़ी के अचानक बंद पड़ जाने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। सही समय पर की गई नियमित जांच न सिर्फ गाड़ी की कुल उम्र बढ़ाती है, बल्कि सड़क पर सफर को भी सुरक्षित बनाए रखती है।
गहराई से सफाई और सही तरीके से सुखाने का तरीका
बारिश का मौसम अलविदा कहते ही सबसे पहला काम मोटरसाइकिल की मुकम्मल धुलाई का होना चाहिए। पहियों, चेसिस फ्रेम, इंजन कवर और निचले हिस्से यानी अंडरबॉडी पर जमा कीचड़ और धूल की सूखी परतों को पूरी तरह हटाना जरूरी है। सफाई के दौरान मुलायम कपड़े या ब्रश का इस्तेमाल करें ताकि गाड़ी की बॉडी पर खरोंच न आए। इस दौरान बहुत तेज प्रेशर वाले पानी की धार से बचना चाहिए, ताकि सेंसिटिव इलेक्ट्रिकल सर्किट या सॉकेट में नमी न घुसे। धुलाई पूरी होने के बाद गाड़ी को छायादार जगह पर ही सुखाएं। अक्सर लोग गीली बाइक को सीधी धूप में छोड़ देते हैं, जिससे पेंट की चमक फीकी पड़ने और फाइबर व प्लास्टिक के पुर्जों के चटकने का अंदेशा रहता है।
ड्राइव चेन और स्प्रोकेट की स्थिति व लुब्रिकेशन
सड़क के गंदे पानी और रेत के कणों से बाइक की चेन सबसे तेजी से प्रभावित होती है और घिसने लगती है। ऐसे में चेन पर जमा पुरानी मैल को पूरी तरह साफ करके उसे अच्छी तरह सुखा लेना चाहिए। इसके तुरंत बाद किसी बेहतरीन क्वालिटी के चेन लुब्रिकेंट का छिड़काव करें। साथ ही स्प्रोकेट के दांतों के घिसाव और उसके ढीलेपन की बारीकी से जांच करें। अगर चेन बहुत अधिक ढीली हो गई हो या ज्यादा तनी हुई महसूस हो, तो उसे तय मानक के अनुसार सेट करवाएं। सही लुब्रिकेशन मिलने से इंजन की ताकत पहियों तक सुचारू रूप से पहुंचती है और चेन सेट की लाइफ भी लंबी होती है। हर महीने कम से कम एक बार चेन की स्थिति देखना अपनी आदत में शामिल करें।
ब्रेकिंग सिस्टम, पैड्स और फ्लुइड लेवल की पड़ताल
बरसात के दिनों में डिस्क प्लेट और ब्रेक पैड्स के बीच में गीली गंदगी और महीन रेत फंस जाती है। मौसम बीतने पर ब्रेक पैड्स की बची हुई मोटाई और रोटर डिस्क की ऊपरी सतह का मुआयना करें। यदि पैड्स अपनी तय सीमा से अधिक घिस चुके हों, तो बिना किसी देरी के नए पैड लगवाएं। इसके अलावा ब्रेक ऑयल के स्तर की जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि ब्रेक लीवर व पैडल दबाने पर सही और तुरंत रिस्पॉन्स मिल रहा हो। भीगे और खराब ब्रेक के साथ सफर करना सीधे तौर पर दुर्घटना को दावत देना है, इसलिए ब्रेकिंग सेटअप की फिटनेस को हमेशा पहली प्राथमिकता दें।
इलेक्ट्रिकल वायरिंग, बैटरी और फ्यूज बॉक्स की सुरक्षा
पानी के रिसाव और हवा में घुली नमी से वायरिंग हार्नेस और बैटरी के काम करने की क्षमता पर सीधा असर पड़ता है। बाइक की हेडलाइट, सभी टर्न इंडिकेटर्स, हॉर्न और इलेक्ट्रिक स्टार्टर बटन को चलाकर देखें कि वे ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं। बैटरी के दोनों टर्मिनल्स पर जमी गंदगी या सफेद परत को साफ करें और उन पर ग्रीस लगाएं ताकि कार्बन न जमे। यदि बरसात के दौरान गाड़ी लंबे समय तक बिना चले गैराज में खड़ी रही हो, तो बैटरी को चार्ज कराना बेहतर रहता है। साथ ही फ्यूज बॉक्स का ढक्कन खोलकर यह भी तसल्ली कर लें कि उसके भीतर पानी तो नहीं जमा है, क्योंकि छोटी सी अनदेखी आगे चलकर बड़े शॉर्ट सर्किट का रूप ले सकती है।
इंजन ऑयल बदलना, एयर फिल्टर और टायर की देखभाल
मानसून बीत जाने के बाद इंजन ऑयल को बदलवा लेना सबसे समझदारी भरा कदम है, क्योंकि किसी भी रास्ते से अंदर पहुंचे पानी के अंश ऑयल की चिकनाई को खत्म कर देते हैं। इसके साथ ही हवा में तैरती नमी और धूल सोख चुके एयर फिल्टर को साफ करें या जरूरत पड़ने पर नया लगवाएं। सफर पर निकलने से पहले टायरों के हवा के दबाव और उनकी रबर ग्रिप यानी ट्रेड की गहराई का जायजा लें। अगर टायर की सतह पर कहीं कट लगा हो या वह पूरी तरह घिस चुका हो, तो उसे तुरंत बदलें। सही टायर प्रेशर बनाए रखने से बाइक का माइलेज सुधरता है और मोड़ों पर बेहतर ग्रिप मिलती है। इन सभी जरूरी कदमों को उठाने से बाइक की परफॉर्मेंस लंबे समय तक बिना रुकावट बरकरार रहती है।



















