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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में फ्लैट की दरें 12 प्रतिशत उछलीं, प्रति वर्ग फुट 1000 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी दर्जव्यापार
4 अक्तू॰ 2026, 12:27 am (25 दिन पहले)· 3

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में फ्लैट की दरें 12 प्रतिशत उछलीं, प्रति वर्ग फुट 1000 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज

दिल्ली-एनसीआर में निर्माण खर्च और लग्जरी प्रोजेक्ट्स के जोर पकड़ने से घरों की औसत कीमत 9,980 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गई है, जो देश के शीर्ष सात शहरों में सबसे तेज सालाना उछाल है।

राष्ट्रीय राजधानी और उससे सटे प्रमुख उपनगरों में अपना खुद का मकान खरीदने की योजना बना रहे लोगों के बजट पर भारी दबाव बन गया है। दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम में आवासीय फ्लैटों तथा मकानों की कीमतें पिछले एक वर्ष में तेजी से ऊपर गई हैं। चालू वित्तवर्ष की जुलाई से सितंबर वाली तिमाही में दिल्ली-एनसीआर के आवासीय बाजार में संपत्तियों के औसत दाम बीते वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 12 प्रतिशत से अधिक चढ़ चुके हैं।

एनसीआर में प्रति वर्ग फुट 1,000 रुपये से ज्यादा का इजाफा

रियल एस्टेट सलाहकार फर्म एनारॉक के ताजा विश्लेषण के अनुसार, जुलाई-सितंबर तिमाही में दिल्ली-एनसीआर के रिहायशी बाजार में संपत्तियों की औसत दर 9,980 रुपये प्रति वर्ग फुट दर्ज की गई है। पिछले वित्तवर्ष की इसी समान तिमाही के दौरान यही दर 8,900 रुपये प्रति वर्ग फुट पर थी। इस प्रकार मात्र एक वर्ष के अंतराल में ही खरीदारों के लिए प्रति वर्ग फुट दर में 1,080 रुपये की सीधी बढ़ोतरी हो चुकी है। उद्योग के जानकारों का कहना है कि निर्माण सामग्री के महंगे होने और अधिकांश बिल्डरों द्वारा प्रीमियम व लग्जरी श्रेणियों के प्रोजेक्ट्स पर अधिक ध्यान केंद्रित करने से कीमतों में यह तेजी आई है।

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देश के शीर्ष सात शहरों में भी संपत्तियां हुईं महंगी

कीमतों में वृद्धि का यह सिलसिला केवल राजधानी क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य प्रमुख महानगरों में भी दरों में लगातार उछाल दिख रहा है। देश के सात शीर्ष शहरों में रिहायशी संपत्तियों की औसत दर सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर 9,714 रुपये प्रति वर्ग फुट पर पहुंच गई है, जो पिछले वित्तवर्ष की समान तिमाही में 9,105 रुपये प्रति वर्ग फुट थी। हालांकि, अन्य सभी महानगरों की तुलना में दिल्ली-एनसीआर ने कीमतों में 12 प्रतिशत की सालाना वृद्धि के साथ सबसे तेज रफ्तार दर्ज की है।

एनारॉक के वाइस चेयरमैन संतोष कुमार के मुताबिक, कोविड-19 महामारी के बाद के दौर में सभी प्रमुख केंद्रों पर आवास की कीमतों में तेज वृद्धि देखी गई है। जमीन के महंगे सौदों के साथ-साथ सीमेंट, स्टील और अन्य निर्माण सामग्रियों की लागत बढ़ने से डेवलपर्स के पास कीमतें बढ़ाने के अलावा विकल्प नहीं बचा। अध्ययन में शामिल सात प्रमुख केंद्रों में बेंगलुरु, मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर), दिल्ली-एनसीआर, पुणे, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता शामिल हैं, जहां आवासीय बाजार में यह तेजी साफ नजर आ रही है।

किफायती मकानों की मौजूदा 45 लाख की सीमा में बदलाव की तैयारी

रियल एस्टेट डेवलपर्स के शीर्ष संगठन क्रेडाई ने स्पष्ट किया है कि निर्माण लागत में आए भारी उछाल के बाद अब पुरानी मूल्य सीमा में किफायती मकान बना पाना व्यावहारिक नहीं रह गया है। संगठन ने सरकार से मांग की है कि किफायती श्रेणी के तहत आने वाले मकानों की परिभाषा को संशोधित किया जाए और इसकी कीमत सीमा बढ़ाई जाए। वर्तमान नियमों के तहत 45 लाख रुपये तक के मकान को किफायती या अफॉर्डेबल माना जाता है। क्रेडाई ने उम्मीद जताई है कि आगामी 6 महीने के भीतर केंद्र सरकार इस परिभाषा और मूल्य सीमा में संशोधन कर सकती है, जिससे इस सेक्टर में नए प्रोजेक्ट्स को दोबारा गति मिल सके।

सवाल-जवाब

दिल्ली-एनसीआर में जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान मकानों की औसत कीमत क्या रही?
इस तिमाही में दिल्ली-एनसीआर में आवासीय संपत्तियों की औसत कीमत बढ़कर 9,980 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई, जो पिछले साल इसी दौरान 8,900 रुपये थी।
दिल्ली-एनसीआर में आवास की कीमतों में सालाना आधार पर कितने प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई?
दिल्ली-एनसीआर के आवासीय बाजार में सालाना आधार पर 12 प्रतिशत से अधिक का उछाल दर्ज किया गया, जो देश के शीर्ष शहरों में सबसे अधिक है।
देश के सात प्रमुख शहरों में औसत आवासीय दर कितनी दर्ज की गई?
शीर्ष सात शहरों में औसत संपत्ति दर सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर 9,714 रुपये प्रति वर्ग फुट दर्ज की गई, जो पिछले साल 9,105 रुपये थी।
देश के कौन से सात शहर इस रियल एस्टेट अध्ययन में शामिल हैं?
अध्ययन में बेंगलुरु, मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर), दिल्ली-एनसीआर, पुणे, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता शामिल हैं।
वर्तमान में किफायती मकान यानी अफॉर्डेबल हाउसिंग की कीमत सीमा क्या है?
वर्तमान नियमों के तहत देश में किफायती मकान के लिए तय की गई अधिकतम सीमा 45 लाख रुपये है।
क्रेडाई ने सरकार से किफायती मकानों को लेकर क्या मांग की है?
क्रेडाई ने बढ़ती निर्माण लागत के कारण अफॉर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा बदलने और 45 लाख रुपये की सीमा बढ़ाने की मांग की है, जिसमें 6 महीने में बदलाव की संभावना है।
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टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·25 दिन पहले

दिल्ली-एनसीआर में बारह परसेंट का उछाल तो ठीक है, पर बिल्डर हर बार महंगा सामान और लग्जरी का बहाना बना देते हैं। लगता है आम आदमी का घर खरीदने का सपना बस सपना ही रह जाएगा।

Rohan Gupta@rohan-gupta·25 दिन पहले

पिछले महीने ही नोएडा में एक दोस्त फ्लैट देखने गया था, ब्रोशर में जो दाम थे वो सुनकर ही उसके होश उड़ गए थे।

Rohan Verma@rohan-verma·25 दिन पहले

रोहन भाई, सच कह रहे हो। पिछले हफ्ते मैं भी लखनऊ में एक रिश्तेदार के लिए प्रॉपर्टी पता कर रहा था, रेट सुनकर दिमाग घूम गया। आम आदमी का घर लेना अब सपना ही रह गया है।

Ravikash Gupta@ravikash·25 दिन पहले

एनसीआर में घर खरीदना अब आम आदमी के बस से बाहर होता जा रहा है, दाम आसमान छू रहे हैं।

Michael Anderson@michael-anderson·25 दिन पहले

रविकेश जी, बिल्कुल सही कहा आपने। अमेरिका के बड़े शहरों में भी आजकल हाउसिंग का हाल कुछ ऐसा ही है, मिडिल क्लास के लिए घर खरीदना सपना बनता जा रहा है।

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