गुरुवार, 29 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर बने रहने की संभावना दिखाई दे रही है। निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के हालिया नीतिगत फैसले के असर का मूल्यांकन कर रहे हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और रुपये की चाल घरेलू बाजार के मूड को प्रभावित कर रही हैं। अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन भविष्य में मौद्रिक रुख को लेकर उसका मार्गदर्शन वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे मुख्य सूचकांक
घरेलू बाजार में बुधवार का कारोबारी सत्र दबाव में समाप्त हुआ था। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के आधिकारिक बयान से पहले निवेशक सतर्क रुख अपना रहे थे। कारोबारी सत्र के अंत में निफ्टी 50 सूचकांक 0.22 प्रतिशत गिरकर 22,698 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 0.48 प्रतिशत का गोता लगाकर 73,246 पर जाकर रुका। बाजार पर ब्रेंट क्रूड की ऊंची कीमतों का लगातार दबाव बना रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है, जिससे बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी की रफ्तार थम गई।
फेडरल रिजर्व का फैसला और बाजार विशेषज्ञों का नजरिया
अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने अपनी अक्टूबर बैठक के समापन पर लक्षित ब्याज दर दायरे को 3.75 प्रतिशत से 4 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया। बाजार को पहले से ही दरों के स्थिर रहने का अनुमान था। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के वेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका ने बाजार की स्थिति पर कहा, "अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले से पहले भारतीय शेयर बाजार के एक सीमित दायरे में रहने की संभावना है, क्योंकि ब्याज दरों के स्थिर रहने की व्यापक उम्मीद थी। हालांकि, भविष्य में ब्याज दरों के रास्ते को लेकर फेड का मार्गदर्शन निकट अवधि में बाजार की दिशा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतें और रुपये की चाल भी लगातार नजर रखने योग्य प्रमुख कारक बने रहेंगे।"
निफ्टी 50 के चार्ट पर कैंडलस्टिक पैटर्न और कंसॉलिडेशन के संकेत
तकनीकी विश्लेषण के नजरिए से देखें तो निफ्टी 50 ने लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में हाई-वेव कैंडल का निर्माण किया है। इस कैंडलस्टिक पैटर्न की पहचान एक छोटे रियल बॉडी और दोनों तरफ लंबी परछाइयों से होती है, जो बाजार में तेज उतार-चढ़ाव के बीच अनिश्चितता और कंसॉलिडेशन की स्थिति दर्शाती है। बुधवार के सत्र में निफ्टी की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई थी और सत्र के पहले हिस्से में सूचकांक ने 22,500 के निचले स्तर का परीक्षण किया। हालांकि निचले स्तरों पर खरीदारों की सक्रियता लौटी, जिससे सूचकांक अपने दिन के निचले स्तर से लगभग 200 अंक सुधरकर 22,700 के करीब बंद होने में कामयाब रहा।
निफ्टी के लिए 22,830 का स्तर बना अहम प्रतिरोध
निफ्टी 50 इस समय अपने 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के आसपास कारोबार कर रहा है। इसके साथ ही यह पिछले सप्ताह 23,175 से 22,372 तक आई गिरावट के 50 प्रतिशत रिट्रेसमेंट स्तर के समीप बना हुआ है। तकनीकी चार्ट पर यह क्षेत्र 22,800 से 22,830 के स्तर पर एक मजबूत रुकावट पेश कर रहा है। यदि बाजार को इस दायरे से बाहर निकलना है, तो इस प्रतिरोध को पार करना आवश्यक होगा।
बजाज ब्रोकिंग के रिसर्च डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पवित्र मुखर्जी ने निफ्टी के तकनीकी परिदृश्य पर कहा, "निफ्टी पिछले दो सत्रों से 20 दिनों के ईएमए और पिछले हफ्ते की 23,175 से 22,372 की गिरावट के 50 प्रतिशत रिट्रेसमेंट के आसपास कारोबार कर रहा है, जो 22,800 से 22,830 के स्तर के करीब स्थित है। आगे बढ़ते हुए, मंगलवार के उच्चतम स्तर 22,830 के ऊपर मजबूती दिखने पर 23,000 और 23,175 के स्तर तक रिकवरी की संभावना बनेगी, जो पिछले हफ्ते के उच्चतम स्तर और 50 दिनों के ईएमए का संगम है।"
यदि निफ्टी 22,830 के इस महत्वपूर्ण अवरोध को पार करने में असमर्थ रहता है, तो चालू कंसॉलिडेशन 22,370 से 22,830 के व्यापक दायरे में खिंच सकता है। गिरावट की स्थिति में सूचकांक को 22,500 पर तात्कालिक सहारा मिलेगा, जो बुधवार का निचला स्तर है और हालिया तेजी से जुड़े रिट्रेसमेंट स्तर से मेल खाता है। इस स्तर के टूटने पर बाजार का तकनीकी ढांचा कमजोर पड़ सकता है, जबकि इस समर्थन के बने रहने पर सीमित दायरे में गति जारी रह सकती है।
बैंक निफ्टी में निचले स्तरों से तेज सुधार और मुख्य दायरे
बैंकिंग क्षेत्र के सूचकांक बैंक निफ्टी ने बुधवार के कारोबारी सत्र में एक बुलिश कैंडल तैयार की, जो पिछले महीने के निचले स्तर के पास खरीदारों की मजबूत वापसी का संकेत देती है। सत्र की शुरुआत में बैंक निफ्टी भारी दबाव में दिखा और शुरुआती कारोबार में फिसलकर 53,626 के निचले स्तर तक चला गया था। इसके बाद बैंकिंग शेयरों में जोरदार लिवाली देखने को मिली और सूचकांक ने निचले स्तर से 550 अंकों से अधिक की छलांग लगाकर 54,250 के आसपास अपनी स्थिति संभाली।
निचले स्तरों से इस तेज उछाल के बावजूद व्यापक तकनीकी रुझान अब भी सुधारात्मक बना हुआ है। निकट अवधि में बैंक निफ्टी के 53,600 से 54,650 के दायरे में समेकित होने की उम्मीद है। इस दायरे का ऊपरी छोर 54,650 एक कड़ा प्रतिरोध साबित हो सकता है। यदि सूचकांक 54,650 के पार टिकने में सफल रहता है, तो यह तेजी को नया बल देगा और 55,200 के स्तर का रास्ता साफ हो सकता है।
बैंक निफ्टी के लिए 53,626 का निचला समर्थन स्तर
पवित्र मुखर्जी ने बैंक निफ्टी के स्तरों को समझाते हुए कहा, "हाल के निचले स्तर 53,626 से नीचे कमजोरी आने पर गिरावट 53,200 से 53,000 के प्रमुख अल्पकालिक समर्थन क्षेत्र तक बढ़ सकती है, जो पिछले प्रमुख निचले स्तरों को जोड़ने वाली ट्रेंडलाइन समर्थन और पिछली बड़ी बढ़त के मुख्य रिट्रेसमेंट का संगम है।"
इस विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि बैंक निफ्टी के लिए 53,626 का स्तर रक्षात्मक दीवार का काम करेगा। अगर विक्रेता इस स्तर को तोड़ने में सफल होते हैं, तो गिरावट का दायरा 53,200 से 53,000 तक फैल सकता है। वहीं दूसरी ओर, जब तक सूचकांक 53,626 के ऊपर मजबूती से टिका रहेगा, तब तक यह कंसॉलिडेशन की स्थिति में बना रहेगा और कारोबारी 54,650 के ऊपर संभावित ब्रेकआउट पर नजरें गड़ाए रखेंगे। गुरुवार को बाजार प्रतिभागियों का पूरा ध्यान वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये के उतार-चढ़ाव पर टिका रहेगा।


















