नियमित नौकरी के साथ अपनी आय बढ़ाने की इच्छा रखने वाले कामकाजी लोगों के लिए छोटा पशुपालन एक व्यावहारिक विकल्प साबित हो सकता है। बिहार के रोहतास जिले में स्थित बिक्रमगंज के निवासी प्रमोद कुमार ने इस विचार को हकीकत में बदलकर दिखाया है। वह नेटवर्किंग क्षेत्र में अपनी पूर्णकालिक नौकरी जारी रखते हुए बत्तखों का पालन कर रहे हैं। इस पूरे काम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्हें अपनी नौकरी से समझौता नहीं करना पड़ता और वह केवल सुबह और शाम का थोड़ा सा वक्त देकर इस उद्यम का संचालन कर रहे हैं।
सीमित जगह में छोटा सेटअप तैयार करके की शुरुआत
प्रमोद कुमार ने करीब सात महीने पहले अपनी नियमित आय के साथ कमाई का दूसरा साधन तैयार करने की योजना बनाई थी। उनका मुख्य लक्ष्य ऐसा व्यवसाय चुनना था जिसमें पूरे दिन की निगरानी की जरूरत न पड़े। इसके लिए उन्होंने यूट्यूब पर उपलब्ध जानकारियों का अध्ययन किया और बत्तख पालन की बुनियादी बारीकियों को समझा। इसके बाद उन्होंने लगभग 200 बत्तखों के साथ इस काम को शुरू करने का निर्णय लिया। उन्होंने इस काम के लिए 50×10 फीट आकार के भूखंड का इस्तेमाल किया, जहां उन्होंने बत्तखों के अनुकूल एक गड्ढा तैयार करके आवश्यक व्यवस्थाएं स्थापित कीं।
दैनिक दिनचर्या और काम का समय प्रबंधन
नौकरीपेशा होने के कारण समय का उचित प्रबंधन प्रमोद के लिए सबसे अहम पहलू था। उन्होंने अपने दैनिक कार्यक्रम को इस तरह व्यवस्थित किया कि बत्तख पालन उनकी नौकरी के आड़े न आए। वह प्रतिदिन सुबह करीब एक घंटा और शाम को करीब एक घंटा ही इस फार्म की देखभाल के लिए निकालते हैं। इस दौरान पक्षियों को दाना-पानी देने, आवास की सफाई करने और अंडों को सुरक्षित एकत्रित करने जैसे बुनियादी काम आसानी से पूरे हो जाते हैं।
अंडों की दैनिक बिक्री और आमदनी का गणित
प्रमोद के फार्म पर मौजूद बत्तखें हर दिन औसतन करीब 100 अंडे देती हैं। इन अंडों को वह 15 रुपये प्रति अंडे की दर से बाजार में बेचते हैं। इस हिसाब से अंडों की प्रतिदिन बिक्री से लगभग 1,500 रुपये की सीधी आमदनी होती है। यदि पूरे महीने का आकलन किया जाए, तो अंडों से होने वाला कुल सकल राजस्व लगभग 45,000 रुपये से 50,000 रुपये के बीच पहुंच जाता है।
चारा खर्च और महीने का शुद्ध मुनाफा
इस व्यवसाय में पक्षियों के पोषण पर होने वाला खर्च मुख्य परिचालन लागत है। प्रमोद के अनुसार, 200 बत्तखों के दैनिक चारे पर लगभग 700 रुपये से 800 रुपये खर्च होते हैं। इस खर्च को रोजाना की कुल कमाई से घटाने पर हर दिन लगभग 700 रुपये से 800 रुपये की सीधी शुद्ध बचत होती है। इस आधार पर केवल अंडों की नियमित बिक्री से उन्हें हर महीने करीब 21,000 रुपये से लेकर 24,000 रुपये तक का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है।
बत्तखों की बिक्री से अलग से होती है कमाई
अंडों की नियमित आपूर्ति के अलावा प्रमोद के पास आय का एक और विकल्प भी तैयार रहता है। वह जरूरत के अनुसार तैयार बत्तखों की जोड़ियां भी बेचते हैं। बत्तखों की एक जोड़ी लगभग 600 रुपये में बेची जाती है, जिससे कुल मुनाफे में और इजाफा हो जाता है। सात महीने पहले शुरू किया गया यह प्रयोग अब एक आत्मनिर्भर मॉडल का रूप ले चुका है, जो यह साबित करता है कि वर्तमान आजीविका को जोखिम में डाले बिना भी अतिरिक्त वित्तीय सुरक्षा हासिल की जा सकती है।

















