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कावेरी विवाद पर कर्नाटक अड़ा, शिवकुमार ने कहा दिल्ली में रखेंगे राज्य का पक्षराजनीति
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कावेरी विवाद पर कर्नाटक अड़ा, शिवकुमार ने कहा दिल्ली में रखेंगे राज्य का पक्ष

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने डीएमके की संसद में कावेरी मुद्दा उठाने की मांग पर पलटवार करते हुए कहा कि राज्य के सांसद भी दिल्ली में तथ्य रखेंगे, क्योंकि कावेरी का पानी कर्नाटक का हक है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने डीएमके की उस मांग पर तीखा जवाब दिया है, जिसमें कावेरी जल विवाद को संसद में उठाने की बात कही गई थी। शनिवार, 18 जुलाई को बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत में शिवकुमार ने साफ कर दिया कि कर्नाटक भी अपनी बात दिल्ली में उतनी ही मजबूती से रखेगा।

शिवकुमार का जवाब

डीएमके की योजना पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवकुमार ने कहा, "कावेरी का मसला जो भी हो, यह हमारा हक है।" उन्होंने बताया कि वे खुद दिल्ली जाएंगे और राज्य के सांसदों को पूरी जानकारी देंगे, ताकि सत्र के दौरान कर्नाटक का पक्ष स्पष्ट रूप से रखा जा सके। उनका कहना है कि पानी के बंटवारे के लिए पहले से ही कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था मौजूद है, और सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की निगरानी केंद्रीय जल आयोग को सौंप रखी है, यानी किसी भी शिकायत का हल उसी रास्ते से निकलना चाहिए, न कि संसद में हंगामे से।

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मेकेदातु परियोजना का विवाद

दोनों राज्यों के बीच असली तनाव की जड़ कर्नाटक की मेकेदातु जलाशय परियोजना है, जो नदी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए प्रस्तावित है और जिसका तमिलनाडु लंबे समय से विरोध करता आया है। शिवकुमार ने इस विरोध को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह परियोजना असल में कर्नाटक से ज्यादा तमिलनाडु के फायदे की है। उन्होंने कहा कि वे इस बात को "बिल्कुल साफ" करना चाहते हैं कि जलाशय पानी रोकने का जरिया नहीं, बल्कि नीचे की ओर पानी के बहाव को नियंत्रित करने वाला ढांचा है।

दिल्ली में डीएमके की तैयारी

यह बयान ऐसे समय आया है जब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने गुरुवार को डीएमके सांसदों के साथ एक वर्चुअल बैठक की थी, जिसमें पार्टी ने कावेरी को लेकर तमिलनाडु के अधिकारों पर केंद्र सरकार से आक्रामक तरीके से बात करने का फैसला किया। डीएमके के संसदीय दल ने प्रस्ताव पास कर केंद्र से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की, ताकि कर्नाटक के साथ चल रहा जल बंटवारे का तनाव सुलझाया जा सके। पार्टी के बयान के मुताबिक, सांसद मानसून सत्र में केंद्र से मेकेदातु बांध विवाद पर एक ट्रिब्यूनल बनाने और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के मुताबिक कर्नाटक से बिना देरी तमिलनाडु का हिस्सा छोड़ने की मांग रखेंगे।

संसद में टकराव तय

दोनों राज्यों के नेतृत्व के दिल्ली में मोर्चा खोलने के ऐलान के बाद कावेरी विवाद के आने वाले सत्र में संसद तक पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है। कर्नाटक पहले ही नदी से जुड़े ढांचागत मुद्दों पर अपना रुख साफ कर चुका है, वहीं डीएमके का प्रस्ताव यह सुनिश्चित करता है कि तमिलनाडु के सांसद ट्रिब्यूनल और केंद्रीय जल आयोग के जरिए पानी छोड़े जाने के हिसाब-किताब पर जोर देंगे। आने वाले मानसून सत्र में दोनों पक्षों के केंद्र सरकार के सामने सीधे यह मुद्दा उठाने की पूरी संभावना है।

सवाल-जवाब

शिवकुमार ने कावेरी विवाद पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि कावेरी का पानी कर्नाटक का हक है और राज्य के सांसद डीएमके की तरह ही संसद में तथ्य रखेंगे।
डीएमके संसद में यह मुद्दा क्यों उठाना चाहती है?
एमके स्टालिन ने गुरुवार को डीएमके सांसदों के साथ वर्चुअल बैठक कर तमिलनाडु के कावेरी अधिकारों पर केंद्र सरकार से आक्रामक तरीके से बात करने का फैसला किया।
मेकेदातु परियोजना क्या है?
यह कावेरी नदी पर कर्नाटक की प्रस्तावित जलाशय परियोजना है, जिसका तमिलनाडु विरोध करता है, लेकिन शिवकुमार का कहना है कि इससे तमिलनाडु को ही फायदा होगा।
जल बंटवारे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है?
शिवकुमार के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला केंद्रीय जल आयोग को सौंप रखा है।
डीएमके केंद्र सरकार से क्या मांग कर रही है?
पार्टी चाहती है कि मानसून सत्र में मेकेदातु बांध विवाद सुलझाने के लिए ट्रिब्यूनल बने और कर्नाटक बिना देरी तमिलनाडु का कावेरी जल हिस्सा छोड़े।
यह मुद्दा संसद में कब उठ सकता है?
इसके आने वाले मानसून सत्र में उठने की संभावना है।
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