अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों ने एक बार फिर जोरदार वापसी की है। महीनों के बिकवाली के दबाव के बाद पीली धातु ने अगस्त के बाद से अपना सबसे शानदार एकदिवसीय प्रदर्शन किया है। अक्टूबर के दौरान सोने में लगभग 7 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जिससे इसका भाव 3,870 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक गिर गया था, जो एक साल से भी अधिक समय का न्यूनतम स्तर था। हालांकि, ताजा उछाल के बाद सर्राफा बाजार में यह बहस छिड़ गई है कि क्या यह तेजी किसी दीर्घकालिक सुधार की शुरुआत है या फिर व्यापक मंदी के रुझान के बीच केवल एक अस्थायी उछाल है।
मिड-टर्म चुनाव परिणाम और अमेरिकी डॉलर व यील्ड में गिरावट
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका में हाल ही में संपन्न हुए मिड-टर्म चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी को मिली बढ़त के बाद विधायी गतिरोध की स्थिति बन सकती है। निवेशकों का आकलन है कि संसद में गतिरोध के कारण सरकारी खर्च और कर्ज लेने की क्षमता सीमित होगी, जिससे मुद्रास्फीति का दबाव कम हो सकता है। इस संभावना के उभरते ही अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और अमेरिकी डॉलर दोनों में गिरावट दर्ज की गई, जिसने सोने के लिए बेहद अनुकूल माहौल तैयार कर दिया।
बुधवार को अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) गिरकर अपने एक महीने के निचले स्तर पर आ गया। वहीं, 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड गुरुवार को घटकर 4.84 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई, जो छह सप्ताह से अधिक समय का इसका सबसे निचला स्तर है। ट्रेजरी यील्ड में कमी आने से बिना ब्याज वाले एसेट जैसे सोने को अपने पास रखने की अवसर लागत (ऑपर्च्युनिटी कॉस्ट) घट जाती है। इसके साथ ही, कमजोर डॉलर अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोने को अधिक किफायती बना देता है।
बाजार की इस हलचल पर आईएनजी के रणनीतिकार वॉरेन पैटरसन और ईवा मन्थे ने अपनी राय व्यक्त की है। वॉरेन पैटरसन और ईवा मन्थे के अनुसार, अमेरिकी मिड-टर्म चुनावों के नतीजों के बाद स्पॉट गोल्ड 3 प्रतिशत से अधिक चढ़कर फिर से 4,000 डॉलर प्रति औंस के पार चला गया।
हालांकि, राजनीतिक गतिरोध सोने के लिए पूरी तरह से सकारात्मक ही सिद्ध हो, ऐसा आवश्यक नहीं है। राजकोषीय विस्तार में कमी आने से अत्यधिक सरकारी कर्ज को लेकर बनी चिंताएं कम हो सकती हैं, जिससे दीर्घकालिक अवधि में सोने की मांग को मिलने वाला एक प्रमुख आधार कमजोर भी पड़ सकता है।
भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
सोने के इस ताजा घटनाक्रम में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट की भी अहम भूमिका रही है। मध्य पूर्व में कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं के संकेत मिलने के बाद कच्चे तेल के दामों में तीव्र गिरावट दर्ज की गई। बुधवार को वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड ऑयल लगभग 8 प्रतिशत टूट गया, क्योंकि डेमोक्रेटिक पार्टी की चुनावी जीत के बाद निवेशकों ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आशंकाओं पर पुनर्विचार करना शुरू कर दिया।
ऊर्जा दरों में कमी आने से चालू वर्ष के दौरान सैन्य संघर्ष के कारण भड़की महंगाई पर अंकुश लग सकता है। यह स्थिति सोने के लिए एक अनूठा समीकरण बनाती है। वैसे तो भू-राजनीतिक तनाव कम होने से सुरक्षित निवेश वाले एसेट के रूप में सोने की मांग घटती है, लेकिन कच्चे तेल की घटती कीमतें मुद्रास्फीति को नियंत्रित कर केंद्रीय बैंकों को सख्त मौद्रिक नीतियां ढीली करने का अवसर दे सकती हैं, जो अंततः सोने के लिए फायदेमंद साबित होता है।
फेडरल रिजर्व का रुख और ब्याज दर वृद्धि की संभावनाएं
कीमतों में हालिया शानदार सुधार के बावजूद, सोने के तेजड़ियों (बुल्स) के सामने अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़ों के मुताबिक, बाजार प्रतिभागी अभी भी दिसंबर की बैठक में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की लगभग 83 प्रतिशत संभावना जता रहे हैं। उच्च ब्याज दरें सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों के आकर्षण को सीमित करती हैं।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और संस्थागत निवेशकों का रुझान
राजनीतिक अनिश्चितताओं और मौद्रिक नीतियों के अलावा, संस्थागत निवेशकों और केंद्रीय बैंकों की ओर से आ रही मांग सोने के दीर्घकालिक परिदृश्य को मजबूत आधार प्रदान कर रही है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने चालू वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान शुद्ध रूप से 321 टन सोने की खरीद की। यह आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 42 प्रतिशत अधिक है। वर्ष के पहले नौ महीनों में सार्वजनिक क्षेत्र की कुल खरीदारी 675 टन तक पहुंच गई है, जो विदेशी मुद्रा भंडार को विविधता प्रदान करने के उनके निरंतर प्रयासों को दर्शाती है।
निवेश मांग के मोर्चे पर भी मजबूती देखी जा रही है। गोल्ड-बैक-ईटीएफ (ETF) में तीसरी तिमाही के दौरान लगभग 211 टन का नया निवेश आया, जिससे वैश्विक स्तर पर कुल ईटीएफ होल्डिंग बढ़कर 4,256 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि हालिया मूल्य सुधार के बावजूद संस्थागत निवेशक सोने को एक रणनीतिक संपत्ति के रूप में देख रहे हैं। फिर भी, यदि मौद्रिक स्थितियां सख्त बनी रहती हैं, तो केवल केंद्रीय बैंकों की खरीदारी तुरंत कीमतों में टिकाऊ तेजी की गारंटी नहीं दे सकती।
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार और आगामी रोजगार आंकड़े
सोने का 3,890 डॉलर के नीचे जाने के बाद वापस 4,000 डॉलर के ऊपर आना खरीदारों के लिए उत्साहजनक है, लेकिन केवल एक दिन की बड़ी तेजी से यह पुष्टि नहीं होती कि बाजार का रुझान पूरी तरह बदल चुका है। वर्तमान में सोने की तेजी तीन कारकों पर टिकी है: अमेरिकी डॉलर में सतत कमजोरी, ट्रेजरी यील्ड में गिरावट, और मुद्रास्फीति में कमी के ऐसे संकेत जो फेडरल रिजर्व को अपना रुख बदलने पर मजबूर कर सकें।
शुक्रवार को जारी होने वाली अमेरिकी श्रम विभाग की रोजगार रिपोर्ट (Nonfarm Payrolls) इन परिस्थितियों की पहली बड़ी परीक्षा होगी। अमेरिका के ब्यूरो ऑफ लेबर स्टेटिस्टिक्स द्वारा अक्टूबर महीने के नॉन-फॉर्म पेरोल आंकड़े शुक्रवार को 13:30 GMT पर जारी किए जाएंगे। बाजार का अनुमान है कि इस महीने 65 हजार नई नौकरियां जुड़ी हैं, जबकि पिछले महीने यह संख्या 29 हजार थी। यदि रोजगार डेटा कमजोर आता है, तो सोने की तेजी आगे बढ़ सकती है। इसके विपरीत, मजबूत रोजगार आंकड़े बिकवाली के दबाव को फिर से बढ़ा सकते हैं।
अन्य मुद्रा जोड़ों की बात करें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) एशियाई सत्र के दौरान तीन सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के नरम रुख और शेयर बाजारों में बिकवाली ने इस पर दबाव बनाया, हालांकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने इसके नुकसान को सीमित रखा। दूसरी ओर, USD/JPY अपने साप्ताहिक निचले स्तर से संभलता दिखा, लेकिन बैंक ऑफ जापान (BoJ) के सख्त रुख और हस्तक्षेप के जोखिम के कारण इसकी बढ़त सीमित रही। वहीं, कनाडा का सांख्यिकी विभाग भी शुक्रवार को 13:30 GMT पर अपना लेबर फोर्स सर्वे जारी करेगा। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,070 से 4,075 डॉलर प्रति औंस के दायरे में हल्के नकारात्मक रुझान के साथ कारोबार कर रहा है।



















