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तेलंगाना के हथकरघा उद्योग से चीन जा रहा सिल्क वेस्ट, प्रोसेसिंग की कमी से बुनकरों को बड़ा घाटाव्यापार
31 अक्तू॰ 2026, 12:27 pm (1 घंटे पहले)· 0

तेलंगाना के हथकरघा उद्योग से चीन जा रहा सिल्क वेस्ट, प्रोसेसिंग की कमी से बुनकरों को बड़ा घाटा

तेलंगाना में आधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट्स के अभाव के चलते रेशम का कीमती वेस्टेज सस्ते में चीन भेजा जा रहा है, जिससे स्थानीय कारोबारियों को भारी नुकसान हो रहा है।

दक्षिण भारत के प्रमुख हथकरघा और रेशम केंद्रों में शामिल तेलंगाना से रेशम उत्पादन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बेहद कम कीमत पर विदेश भेजा जा रहा है। रेशम के कीड़ों के कोकून से मुख्य धागा निकालने के बाद जो अवशेष बच जाता है, उसे सिल्क वेस्ट के नाम से जाना जाता है। घरेलू स्तर पर उन्नत और आधुनिक तकनीक न होने के कारण यह उपयोगी कच्चा माल स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। इसका सीधा फायदा विदेशी खरीदार उठा रहे हैं, जबकि स्थानीय बुनकर और व्यापारी वाजिब मुनाफे से वंचित हैं।

कोकून से धागा निकालने के बाद कैसे बनता है यह कचरा

तेलंगाना के यादाद्री भुवनगिरी जिले के चौटुप्पल इलाके में स्थित ‘कृष्णा रीलिंग, ट्विस्टिंग एंड सिल्क साड़ीज’ के संचालक श्रीहरि पिछले 10 सालों से इस काम से जुड़े हैं। वे बताते हैं कि पारंपरिक रेशम उत्पादन में कोकून को खौलते पानी में डाला जाता है, जिससे उसका मुख्य और मजबूत धागा अलग कर लिया जाता है। इसी धागे से पारंपरिक और प्रसिद्ध रेशमी साड़ियों का निर्माण होता है।

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धागा खींचने की इस प्रक्रिया के दौरान कोकून के बाहरी हिस्से और अंत में बचने वाले बारीक रेशे अलग हो जाते हैं। इन बचे हुए रेशों को ही सिल्क वेस्ट कहा जाता है। इकाइयां इन अवशेषों को धूप में सुखाती हैं और फिर बड़ी चादरों या शीट्स के रूप में सुरक्षित रख लेती हैं। हर महीने रीलिंग इकाइयों से भारी मात्रा में ऐसा वेस्टेज निकलता है।

घरेलू तकनीक का अभाव और विदेशी मंडियों का रुख

स्थानीय स्तर पर इस सूखे अवशेष को रिफाइन करने के लिए जरूरी अत्याधुनिक मशीनें और ढांचा उपलब्ध नहीं है। दूसरी ओर, चीन के पास इस कचरे को परिष्कृत करने की उन्नत तकनीक मौजूद है। यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर काम करने वाले वेंडर और बिचौलिए इस सूखे माल को कम दामों पर खरीदकर सीधे चीन तथा अन्य देशों को निर्यात कर देते हैं।

चीन इस कच्चे कचरे को उन्नत मशीनों की मदद से रिफाइन करता है और उससे उच्च गुणवत्ता वाला स्पन सिल्क तैयार करता है। इस स्पन सिल्क को अन्य बेहतरीन कपड़ों के साथ मिलाकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में महंगे कोट, सूट और ब्लेजर तैयार किए जाते हैं।

स्थानीय इकाइयों की स्थापना से बदल सकती है तस्वीर

व्यापारियों और रीलिंग संचालकों का मानना है कि यदि तेलंगाना और देश के अन्य हिस्सों में उन्नत स्पन सिल्क प्रोसेसिंग संयंत्र लगाए जाएं, तो देश का कच्चा माल बाहर जाने से रुक सकेगा। इससे बुनकरों और रीलिंग ऑपरेटरों को उनके उत्पाद की पूरी कीमत मिलेगी, साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और आमदनी के नए अवसर भी पैदा होंगे।

सवाल-जवाब

सिल्क वेस्ट क्या होता है?
कोकून को गर्म पानी में डालकर मुख्य धागा निकालने के बाद जो बाहरी परत और बारीक रेशे बचते हैं, उन्हें सिल्क वेस्ट कहा जाता है।
तेलंगाना का सिल्क वेस्ट चीन क्यों भेजा जा रहा है?
स्थानीय स्तर पर आधुनिक प्रोसेसिंग मशीनें उपलब्ध न होने के कारण इसे सस्ते दामों पर चीन और अन्य देशों को निर्यात किया जाता है।
चीन में इस कचरे से क्या बनाया जाता है?
चीन में इसे आधुनिक मशीनों से रिफाइन करके स्पन सिल्क बनाया जाता है, जिससे महंगे सूट, ब्लेजर और कोट तैयार होते हैं।
चौटुप्पल में कौन सी रीलिंग यूनिट कार्यरत है?
चौटुप्पल में श्रीहरि पिछले 10 सालों से ‘कृष्णा रीलिंग, ट्विस्टिंग एंड सिल्क साड़ीज’ नाम से यूनिट संचालित कर रहे हैं।
भारत में प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाने से क्या फायदा होगा?
इससे कच्चे माल का सस्ता निर्यात रुकेगा, स्थानीय बुनकरों को बेहतर मूल्य मिलेगा और रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे।
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