घरेलू इक्विटी बाजारों में 10 सितंबर को निवेशकों को भारी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा, हालांकि दिन के अंत में प्रमुख सूचकांक हल्की बढ़त दर्ज करने में कामयाब रहे। सत्र के दौरान दोनों बेंचमार्क सूचकांकों में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया। कारोबार समाप्ति पर बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 138.36 अंक यानी बढ़त दर्ज करते हुए 74,902.59 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 इंडेक्स 46.30 अंक की मजबूती के साथ 23,477.80 के स्तर पर बंद होने में सफल रहा। समग्र बाजार की चौड़ाई यानी मार्केट ब्रेड्थ के आंकड़े मिले-जुले रहे। पूरे सत्र में करीब 1,872 कंपनियों के शेयरों में मजबूती दर्ज की गई, जबकि 2,272 शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया और वे लाल निशान में बंद हुए। वहीं 155 शेयरों के भाव में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं देखा गया।
शीर्ष बढ़त और गिरावट दर्ज करने वाले शेयर
निफ्टी 50 बास्केट में शामिल प्रमुख कंपनियों में एचडीएफसी लाइफ का शेयर 2.36 प्रतिशत चढ़कर टॉप गेनर की सूची में पहले पायदान पर रहा। इसके अलावा पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन में 2.22 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया, जबकि ओएनजीसी के शेयर 1.39 प्रतिशत मजबूत हुए। भारती एयरटेल 1.34 प्रतिशत और टेक महिंद्रा 0.18 प्रतिशत की बढ़त हासिल करने में सफल रहे। इसके विपरीत कुछ प्रमुख दिग्गज कंपनियों में भारी बिकवाली का असर देखा गया। एचसीएल टेक्नोलॉजीज का शेयर 1.85 प्रतिशत टूटकर सबसे बड़ा लूजर साबित हुआ। इसके बाद हिंडाल्को इंडस्ट्रीज में 1.26 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि टाटा स्टील का शेयर 1.04 प्रतिशत फिसल गया। अडानी एंटरप्राइजेज 0.89 प्रतिशत और महिंद्रा एंड महिंद्रा 0.83 प्रतिशत गिरकर बंद हुए।
विभिन्न सेक्टर्स और ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन
क्षेत्रीय सूचकांकों के मोर्चे पर प्रदर्शन काफी बंटा हुआ दिखाई दिया। मीडिया सेक्टर के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों यानी पीएसयू बैंक और निजी बैंकों के इंडेक्स खरीदारी के दम पर हरे निशान में बंद होने में कामयाब रहे। दूसरी ओर मेटल, ऑटोमोबाइल और फार्मा सेक्टर्स पर लगातार बिकवाली का दबाव बना रहा और इन क्षेत्रों के सूचकांकों में 0.5 फीसदी तक की कमजोरी दर्ज की गई। व्यापक बाजार यानी ब्रॉडर मार्केट की स्थिति भी सुस्त रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स किसी बड़े बदलाव के बिना लगभग सपाट स्तर पर बंद हुआ।
वैश्विक और संस्थागत दबाव के मुख्य कारक
कारोबार के दौरान सूचकांकों पर दो प्रमुख कारणों से दबाव देखा गया। पहला मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आया अचानक उछाल रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चा तेल 102 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। अमेरिका द्वारा ईरान के पांच तेल टैंकरों को डुबोए जाने के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट 10 जहाजों पर हमला करने का दावा किया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का अधिकांश तेल विदेशों से आयात करता है, जिससे कच्चे तेल के दामों में तेजी देश के आयात बिल और घरेलू मुद्रास्फीति पर सीधा प्रतिकूल असर डालती है। दूसरा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की ओर से निरंतर की जा रही बिकवाली रहा। बीते कारोबारी सत्र यानी 9 सितंबर को एफआईआई ने 583 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, हालांकि इस बिकवाली के मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई ने 1,509 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया।

















