भारतीय रेलवे ट्रैक पर वंदे भारत एक्सप्रेस का वही जलवा है जो लग्जरी कारों का सड़कों पर होता है। अधिकतम 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली इस हाई-टेक ट्रेन की कमान संभालने का जिम्मा केवल सबसे अनुभवी और कुशल लोको पायलटों को ही सौंपा जाता है। आम लोगों के मन में हमेशा यह उत्सुकता रहती है कि देश की इस सबसे आधुनिक ट्रेन को चलाने वाले इन मुख्य ड्राइवरों को आखिर कितनी सैलरी मिलती है।
वंदे भारत का संचालन केवल ट्रेन को आगे बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अत्यधिक सतर्कता, हाई-टेक पैनल नियंत्रण और सेकेंड-दर-सेकेंड की सटीक टाइमिंग का बेहद महत्वपूर्ण कार्य है। यही मुख्य वजह है कि भारतीय रेलवे इस अत्यधिक जिम्मेदारी वाले पद के लिए अपने सर्वश्रेष्ठ चालकों का चयन करती है। वंदे भारत के लोको पायलटों को आकर्षक वेतन के साथ-साथ कई बेहतरीन भत्ते भी प्रदान किए जाते हैं। इस लेख में हम वंदे भारत लोको पायलट की सैलरी के पूरे गणित, आवश्यक शैक्षणिक योग्यताओं और चयन के कड़े तरीकों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
वंदे भारत लोको पायलट को कितनी सैलरी मिलती है
वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन करने वाले लोको पायलट रेलवे के सबसे वरिष्ठ और मेल या एक्सप्रेस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। इन चालकों का मूल वेतन सातवें वेतन आयोग के नियमों के अनुसार लेवल-6 या लेवल-7 के दायरे में आता है, लेकिन इनकी कुल इन-हैंड सैलरी विभिन्न भत्तों के जुड़ने के कारण काफी अधिक हो जाती है।
महीने की इन-हैंड सैलरी की बात करें तो वंदे भारत लोको पायलट को हर महीने 90,000 रुपये से लेकर 1,20,000 से अधिक रुपये तक मिल जाते हैं। इस वेतन पैकेज में मूल वेतन के अलावा किलोमीटर रनिंग अलाउंस यानी KMA, नाइट ड्यूटी अलाउंस, ओवरटाइम, महंगाई भत्ता या DA और हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA शामिल होता है। चूँकि वंदे भारत ट्रेनें लंबी दूरी तय करती हैं और बहुत अधिक गति से चलती हैं, इसलिए इनका किलोमीटर अलाउंस भी काफी शानदार बनता है।
क्या सीधे वंदे भारत के लिए ड्राइवर की भर्ती होती है
रेलवे प्रणाली में सीधे तौर पर वंदे भारत एक्सप्रेस का लोको पायलट बनने का कोई प्रावधान नहीं है और न ही इसकी कोई सीधी भर्ती निकलती है। इसके लिए एक निश्चित और लंबा करियर पाथ तय किया गया है जिसका हर चालक को पालन करना होता है। सबसे पहले उम्मीदवारों को आरआरबी एएलपी यानी असिस्टेंट लोको पायलट की परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है।
इसके पश्चात उन्हें मालगाड़ी के सहायक के रूप में और फिर सीनियर लोको पायलट के तौर पर कार्य करना पड़ता है। जब चालकों को पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों को चलाने का पर्याप्त अनुभव प्राप्त हो जाता है, उसके बाद ही सबसे बेहतरीन ट्रैक रिकॉर्ड वाले ड्राइवरों को वंदे भारत ट्रेन का जिम्मा सौंपा जाता है।
वंदे भारत का लोको पायलट बनने के लिए आवश्यक योग्यता
इस विशिष्ट क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत करने के लिए उम्मीदवारों के पास निर्धारित शैक्षणिक डिग्रियाँ होना अनिवार्य है। आवेदक के पास 10वीं कक्षा की परीक्षा पास होने के साथ इलेक्ट्रिशियन, फिटर या डीजल मैकेनिक जैसे ट्रेड में आईटीआई का सर्टिफिकेट होना चाहिए। इसके अलावा, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स या ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा या बीटेक की डिग्री प्राप्त करने वाले युवा भी इसके पात्र होते हैं।
शैक्षणिक योग्यताओं के अलावा लोको पायलट बनने की प्रक्रिया में सबसे कड़ी चुनौती इसका मेडिकल टेस्ट होता है जिसे A-1 मेडिकल स्टैंडर्ड कहा जाता है। इस कड़े परीक्षण में उम्मीदवार की आँखें बिल्कुल सटीक होनी चाहिए। बिना किसी चश्मे के आँखों की नजर 6/6 होनी अनिवार्य है। इसके साथ ही आवेदक को कलर ब्लाइंडनेस की समस्या बिल्कुल नहीं होनी चाहिए, क्योंकि रंगों की पहचान में मामूली सी भी दिक्कत होने पर उम्मीदवार को इस पद के लिए पूरी तरह अयोग्य मान लिया जाता है.
वंदे भारत चलाने के लिए खास स्किल्स और ट्रेनिंग
वंदे भारत ट्रेन पारंपरिक रेलवे इंजनों से पूरी तरह भिन्न होती है। यह एक आधुनिक ट्रेन-सेट है जिसमें मेमू की तरह अलग से इंजन नहीं लगाया जाता है, बल्कि इसकी तकनीक अलग होती है। इसी वजह से चयनित ड्राइवरों को विशेष प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है। गाजियाबाद या अन्य जोनल ट्रेनिंग सेंटरों पर 3D सिम्युलेटर के माध्यम से हाई-स्पीड ड्राइविंग की बारीियाँ सिखाई जाती हैं।
इसके अलावा ड्राइवरों को ऑटोमैटिक दरवाजे, कवच सुरक्षा प्रणाली और टचस्क्रीन आधारित डैशबोर्ड कंट्रोल्स को संभालने का पूरा ज्ञान दिया जाता है। 160 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से दौड़ती ट्रेन में एक सेकंड की भी चूक न हो और किसी भी आपातकालीन स्थिति में पलक झपकते ही सही निर्णय लेने की मानसिक क्षमता विकसित करने पर विशेष जोर दिया जाता है।



















