इंजीनियरिंग के क्षेत्र में देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली परीक्षाओं में शुमार जेईई एडवांस्ड के नियमों में बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस प्रतिष्ठित परीक्षा के लिए छात्रों को केवल दो नहीं बल्कि तीन मौके मिलने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। कोविड-19 महामारी के दौर और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों का हवाला देते हुए देश के लाखों युवा लंबे समय से प्रयासों की सीमा बढ़ाने की पुरजोर मांग कर रहे थे। इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामले पर आईआईटी कानपुर के निदेशक मनिंद्र अग्रवाल ने बड़ा और स्पष्ट संकेत दिया है, जिससे परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों विद्यार्थियों में एक नई उम्मीद जगी है।
वर्तमान नियम और छात्रों की ऑनलाइन याचिका
मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, कोई भी अभ्यर्थी अपनी बारहवीं बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण करने के वर्ष और उसके ठीक अगले साल यानी लगातार दो बार ही जेईई एडवांस्ड परीक्षा में बैठ सकता है। हालांकि, कोरोना काल के दौरान दी गई विशेष छूट की याद ताजा रखते हुए छात्र इस सुविधा को स्थायी रूप से तीन प्रयास करने की मांग कर रहे हैं। हाल ही में बारह हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने एक ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर करके इस मांग को फिर से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। शिक्षा जगत के विभिन्न हल्कों में इस बात पर लंबी बहस छिड़ गई है कि क्या इस प्रवेश परीक्षा का मौजूदा ढांचा पूरी तरह से कोचिंग संस्थानों की गिरफ्त में आ चुका है।
आईआईटी कानपुर के निदेशक का बड़ा बयान
एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान इस मुद्दे पर खुलकर बात करते हुए आईआईटी कानपुर के निदेशक मनिंद्र अग्रवाल ने साफ किया है कि भले ही फिलहाल तत्काल प्रभाव से कोई नया बदलाव लागू नहीं किया जा रहा हो, लेकिन आने वाले कुछ वर्षों में इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है। उन्होंने तीसरे प्रयास का विकल्प दिए जाने की संभावना से बिल्कुल इनकार नहीं किया है। शिक्षाविदों का मानना है कि यदि यह नियम लागू होता है, तो यह उन छात्रों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा जो किन्हीं अप्रत्याशित कारणों से अपने पहले के प्रयासों में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाए थे।
कोचिंग संस्थानों पर बढ़ती निर्भरता और उसके दुष्परिणाम
आईआईटी कानपुर के निदेशक मनिंद्र अग्रवाल ने इस बात को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की है कि जेईई एडवांस्ड परीक्षा का पूरा तंत्र अब धीरे-धीरे पूरी तरह से कोचिंग पर निर्भर होता जा रहा है। वर्तमान स्थिति यह बन चुकी है कि बिना किसी मंहगे और भारी-भरकम फीस वाले कोचिंग संस्थान की मदद लिए बिना इस परीक्षा को क्रैक करना असंभव सा प्रतीत होने लगा है। इस अस्वस्थ प्रवृत्ति के कारण सामान्य और गरीब परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों पर मानसिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर भारी दबाव बढ़ रहा है। इसी समस्या से निपटने के लिए आईआईटी प्रशासन परीक्षा के पैटर्न में बुनियादी बदलाव लाने पर गहन मंथन कर रहा है, ताकि कोचिंग माफिया का वर्चस्व कम किया जा सके।
परीक्षा पैटर्न में सुधार और रटने की प्रवृत्ति पर वार
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रयासों की संख्या बढ़ा देने से ही इस पूरी समस्या का समाधान नहीं हो जाएगा, बल्कि इसके लिए परीक्षा के स्तर में सुधार जरूरी है। जेईई एडवांस्ड परीक्षा के पैटर्न को स्कूली शिक्षा के बुनियादी आधार और विश्लेषणात्मक सोच पर आधारित बनाया जाना वक्त की मांग है। यदि परीक्षा का स्वरूप ऐसा हो जाए जिसमें केवल शॉर्टकट या रटने की कला काम न आए, बल्कि वास्तविक वैचारिक स्पष्टता परखने का मौका मिले, तो इससे उन छात्रों को आगे बढ़ने का उचित अवसर मिलेगा जो पारंपरिक कोचिंग के मोहताज नहीं हैं। अकादमिक जानकारों की सलाह है कि छात्रों को केवल कोचिंग के फॉर्मूलों पर टिके रहने के बजाय एनसीईआरटी की किताबों से अपने बेसिक्स मजबूत करने चाहिए।
तीसरा प्रयास मिलने से किसे होगा फायदा और क्या हैं नुकसान
भविष्य में यदि तीन प्रयासों का नियम वास्तविकता बनता है, तो देश के दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों के ऐसे मेधावी युवाओं को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा जिन्हें इस कठिन परीक्षा के बारे में थोड़ी देर से सही मार्गदर्शन मिल पाता है। इसके अलावा गंभीर बीमारी, पारिवारिक आपदा या किसी भी अन्य नियंत्रण से बाहर की स्थिति के कारण अपना कीमती मौका गंवा चुके छात्र बिना अपना भविष्य अंधकारमय होने के डर के फिर से तैयारी शुरू कर सकेंगे। दूसरी ओर, कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि तीसरा अवसर मिलने से विद्यार्थी अपनी तैयारी में एक साल और अधिक झोंकेंगे, जिससे उनके परिवारों पर कोचिंग का अतिरिक्त आर्थिक बोझ और ज्यादा बढ़ सकता है।



















