ब्रिटेन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है, लेकिन देश का पावर ग्रिड एक अनोखी चुनौती से जूझ रहा है। ऊर्जा नियामक ऑफ़जेम के पास बिजली कनेक्शन के लिए आए आवेदनों में से कई ऐसे प्रोजेक्ट्स के हैं, जो केवल कागजों पर मौजूद हैं। इन सट्टेबाज़ी वाले या स्पेक्युलेटिव आवेदनों के कारण वास्तविक परियोजनाओं को ग्रिड से जुड़ने में सालों का इंतजार करना पड़ रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए नियामक ने अब सख्त नियम बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि कतार में जमा फर्जी आवेदनों को बाहर निकाला जा सके।
सख्त वित्तीय शर्तों और गैर-वापसी योग्य जमा राशि का प्रस्ताव
जुलाई में ब्रिटेन के ऊर्जा नियामक ऑफ़जेम ने एक व्यापक सुधार प्रस्ताव पेश किया, जिसका मुख्य उद्देश्य पावर ग्रिड की लंबी कतार से सट्टेबाज़ डेवलपर्स को बाहर निकालना है। इस उद्योग प्रतिक्रिया प्रक्रिया की समयसीमा सितंबर में समाप्त हो रही है, जिसके बाद इन नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा। नए प्रस्तावों के तहत, डेटा सेंटर डेवलपर्स को ग्रिड कनेक्शन पाने के लिए एक बड़ी और गैर-वापसी योग्य जमा राशि जमा करनी होगी। बड़ी परियोजनाओं के मामले में यह रकम सैकड़ों मिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। इसके अलावा, डेवलपर्स को यह साबित करना होगा कि उनके पास निर्माण पूरा करने के लिए पर्याप्त फंडिंग मौजूद है और उन्होंने पहले से ही ग्राहकों को लाइन अप कर लिया है।
हालांकि, इस पूरी कवायद में ऑफ़जेम के सामने एक कठिन संतुलन साधने की चुनौती है। नियम इतने सख्त होने चाहिए कि वे केवल कागजी दांव खेलने वाले स्पेक्युलेटरों को रोक सकें, लेकिन इतने भी कठोर न हों कि वास्तविक डेटा सेंटर परियोजनाओं को ब्रिटेन छोड़कर दूसरे देशों का रुख करना पड़े। यदि असली प्रोजेक्ट्स बाहर चले जाते हैं, तो इससे परिष्कृत AI मॉडल्स को चलाने के लिए आवश्यक कंप्यूटिंग क्षमता हासिल करने की ब्रिटेन की महत्वाकांक्षा को भारी झटका लग सकता है।
ग्लोबल ग्रिड संकट और ब्रिटेन के सामने बढ़ती चुनौतियां
डेटा सेंटर निर्माण के दौरान ग्रिड कनेक्शन में देरी केवल ब्रिटेन तक सीमित नहीं है। अमेरिका और यूरोप के कई देश भी इसी तरह की पावर ग्रिड भीड़भाड़ की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। लेकिन जानकारों के मुताबिक, अमेरिका जहां विशाल भूमि और ऊर्जा विकल्पों के कारण डेवलपर्स के लिए एक आकर्षक बाजार बना हुआ है, वहीं ब्रिटेन पहले से ही महंगी बिजली और जमीन की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में ऑफ़जेम के नए वित्तीय सुधार ब्रिटेन को दुनिया में डेटा सेंटर बनाने के लिए सबसे महंगे स्थानों में से एक बना सकते हैं।
रियल एस्टेट कंसल्टेंसी नाइट फ्रैंक में डेटा सेंटर प्रमुख एलेक्स बर्गोइन का मानना है कि डेटा सेंटर निर्माण की यह होड़ ब्रिटेन में भारी मात्रा में पूंजीगत निवेश ला रही है। उन्होंने सचेत करते हुए कहा, "हम सोने का अंडा देने वाली मुर्गी को मारना नहीं चाहते।" वहीं ऑफ़जेम ने स्पष्ट किया है कि वह अंतिम शुल्क तय करने से पहले उद्योग की चिंताओं पर विचार करेगा। ऑफ़जेम में रणनीतिक योजना और कनेक्शन के उप निदेशक नेथन मैकव्हिनी ने एक बयान में कहा कि डेटा सेंटर ब्रिटेन की AI महत्वाकांक्षाओं और भविष्य के आर्थिक विकास का एक प्रमुख हिस्सा हैं और व्यवहार्य डेटा केंद्रों को तेजी से जोड़ना इस दिशा में एक बड़ा संबल है।
कतार में अप्रत्याशित उछाल और 73 गीगावॉट की काल्पनिक मांग
ब्रिटेन के पावर ग्रिड में शामिल होने की कतार 2024 के अंत की तरफ तेजी से बढ़ने लगी, जब सरकार ने डेटा सेंटरों को क्रिटिकल नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया। ऑफ़जेम के आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2024 से जून 2025 के बीच कनेक्शन कतार में कुल ऊर्जा मांग 41 गीगावॉट से बढ़कर 125 गीगावॉट हो गई। इसमें से 73 गीगावॉट की मांग अकेले नए डेटा सेंटरों से जुड़ी है। यह आंकड़ा पिछले साल पूरे ब्रिटेन की पीक बिजली मांग का लगभग डेढ़ गुना है।
ब्रिटेन सरकार और ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस भारी मांग का एक बड़ा हिस्सा महज एक भ्रम या मिराज है। ग्रिड ऑप्टिमाइजेशन कंपनी नीयरा के प्रबंध निदेशक टाको एंगेलायर ने इस अनियंत्रित स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा, "यह पूरी तरह से पागलपन है।" उनका कहना है कि इन फर्जी परियोजनाओं के कारण कोई भी यह सही से नहीं समझ पा रहा है कि वास्तव में ग्रिड की असली मांग कितनी होगी।
बिना जोखिम के सट्टेबाज़ी और मध्यस्थों की मुनाफाखोरी
ग्रिड कनेक्शन की कतार में यह भीड़ मुख्य रूप से पुरानी प्रोत्साहन व्यवस्था की खामियों के कारण उत्पन्न हुई है। चूंकि डेवलपर्स को ग्रिड पहुंच के लिए वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है और पहले कतार में शामिल होने की फीस केवल कुछ हजार डॉलर होती थी, इसलिए कई डेवलपर्स बिना किसी ठोस निर्माण योजना के भी बिजली के लिए आवेदन कर देते थे। यह उनके लिए बिना किसी वित्तीय जोखिम का एक ऐसा दांव था, जिससे वे भविष्य में कंप्यूट क्षमता की ऊंची मांग का फायदा उठाने के लिए खुद को सुरक्षित कर लेते थे।
हालांकि, इस प्रक्रिया से वास्तविक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचता है। नेटवर्क की स्थिरता का अध्ययन करते समय ग्रिड ऑपरेटरों को प्रत्येक प्रस्ताव को गंभीर मानकर उसका मूल्यांकन करना पड़ता है। HEC पेरिस बिजनेस स्कूल में फाइनेंस के एसोसिएट प्रोफेसर ओलिवियर डार्मौनी, जिन्होंने पावर ग्रिड पर AI के प्रभाव पर शोध किया है, बताते हैं कि स्पेक्युलेटिव प्रोजेक्ट्स इस वजह से अधिक नुकसानदेह हैं क्योंकि वे ग्रिड क्षमता अध्ययनों को जटिल, महंगा और लंबा बना देते हैं। इसके अलावा, लंबी कतारें मध्यस्थ डेवलपर्स को आकर्षित करती हैं जो केवल बाद में ग्रिड एक्सेस के साथ जमीन को महंगे दामों पर डेटा सेंटर कंपनियों को बेचने के लिए आवेदन करते हैं। डार्मौनी ने इसकी तुलना करते हुए कहा, "यह कॉन्सर्ट टिकटों की कालाबौजारी जैसा है।"
नियमों में सुधार और भविष्य की डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर रणनीति
ब्रिटेन ने 2024 से ही सभी डेवलपर्स के लिए यह अनिवार्य कर दिया था कि वे साबित करें कि उन्होंने भूमि अधिकार सुरक्षित कर लिए हैं, योजना आवेदन जमा कर दिए हैं और अन्य मील के पत्थर हासिल कर लिए हैं। ऑफ़जेम का नया प्रस्ताव इसी तर्क को आगे बढ़ाता है और विशेषज्ञों को उम्मीद है कि यह सट्टेबाजी वाले आवेदनों को काफी हद तक हतोत्साहित करेगा। जब कतार से फर्जी परियोजनाएं हट जाएंगी, तो ग्रिड ऑपरेटरों के लिए भविष्य के नेटवर्क अपग्रेड और विस्तार की योजना बनाना आसान हो जाएगा, जिससे उन हिस्सों पर पैसा बर्बाद नहीं होगा जहां वास्तव में अतिरिक्त क्षमता की जरूरत ही नहीं है।
इसके बावजूद, कानूनी और इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञों को चिंता है कि इन सुधारों से कुछ अनचाहे दुष्परिणाम भी सामने आ सकते हैं। स्लॉटर एंड मे फर्म में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ डैनियल न्यूटन के अनुसार, यदि फीस बहुत कम रखी जाती है तो सट्टेबाजी नहीं रुकेगी, और यदि बहुत अधिक रखी जाती है तो विकास के शुरुआती चरण में भारी जोखिम के कारण वैध परियोजनाएं भी बंद हो सकती हैं। साथ ही, एनस्केल जैसे उभरते हुए नए AI डेटा सेंटर ऑपरेटरों के लिए इतनी भारी फीस देना कठिन हो सकता है, जिससे सेक्टर में प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। हालांकि, लंबे समय के नजरिए से विशेषज्ञों का मानना है कि कतार की सफाई करने से ब्रिटेन को वैश्विक स्तर पर आ रहे अरबों डॉलर के निवेश का सही हिस्सा हासिल करने में मदद मिलेगी।



















