छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक ऐसा अनूठा हनुमान मंदिर स्थित है जहां बजरंगबली अपने भक्तों की हर मुराद कागज पर लिखी गई अर्जी के जरिए पूरी करते हैं। कैलाशपुरी चौक के पास बूढ़ातालाब के निकट बना यह मंदिर अपनी बेहद खास और अनोखी परंपरा के कारण पूरे इलाके में प्रसिद्ध है। यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी परेशानियों और इच्छाओं को शब्दों में पिरोकर कागज पर उतारते हैं और फिर उसे सीधे हनुमान जी के चरणों में समर्पित कर देते हैं। इस दरबार में नौकरी पाने की चाहत रखने वालों से लेकर शादी और घर-परिवार की तमाम उलझनों से राहत पाने की आस लगाए लोग अपनी फरियाद लेकर पहुंचते हैं। ऐसी अटूट मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन और पूरी श्रद्धा के साथ यहां अपनी अर्जी लगाता है, संकटमोचन उसकी पुकार अवश्य सुनते हैं और उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।
इस प्राचीन मंदिर में पूजा-अर्चना करने का तरीका भी काफी अलग है। भक्तजन अपनी समस्याओं और इच्छाओं को पहले एक कागज पर लिखते हैं और फिर उसे भगवान के समक्ष प्रस्तुत करते हैं। इस लिखित अर्जी के साथ-साथ बजरंगबली को श्रीफल, नारियल, सुपारी और हल्दी भी अर्पित की जाती है। श्रद्धालुओं का यह पक्का विश्वास है कि उनके द्वारा लिखी गई यह अर्जी सीधे भगवान तक पहुंचती है। इसी अनूठी प्रथा के कारण इस धार्मिक स्थल को लोग प्यार से चिट्ठी वाला हनुमान मंदिर या फिर आवेदन वाले हनुमान मंदिर के नाम से भी पुकारते हैं। यहां आने वाले हर व्यक्ति के मन में बस यही आस होती है कि उनकी यह चिट्ठी उनकी जिंदगी की तमाम परेशानियों का अंत कर देगी।
50 साल पुरानी है भगवान को अर्जी भेजने की यह परंपरा
इस मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित रामनारायण पांडेय ने बताया कि भगवान के दरबार में आवेदन लिखकर अपनी बात पहुंचाने का यह सिलसिला आज का नहीं बल्कि 50 साल से भी ज्यादा पुराना है। उनके पूर्वजों और बाप-दादा के समय से यह अनूठी रीति चली आ रही है जिसे आज भी पूरी निष्ठा के साथ निभाया जा रहा है। भक्त अपनी तमाम परेशानियों और मनोकामनाओं को कागजों पर उतारकर इस मंदिर में आते हैं और बहुत श्रद्धा के साथ अपनी अर्जी भगवान के चरणों में रख देते हैं। समय बीतने के साथ-साथ इस परंपरा के प्रति लोगों की आस्था कम होने की बजाय और अधिक मजबूत होती गई है, जिसके चलते दूर-दूर से लोग अपनी फरियाद लेकर यहां पहुंचते हैं।
श्रीफल, नारियल और हल्दी के साथ लगती है अर्जी
पंडित रामनारायण पांडेय ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि लोग अपनी अर्जी के साथ-साथ हनुमान जी को श्रीफल, नारियल, सुपारी और हल्दी भी भेंट करते हैं। उनका ऐसा मानना है कि जब कोई भक्त पूरी तल्लीनता के साथ बजरंगबली का स्मरण करते हुए अपनी मन्नत उनके सामने रखता है, तो भगवान उसकी चिट्ठी को सहर्ष स्वीकार कर लेते हैं। सच्चे दिल और साफ नीयत से मांगी गई हर मुराद इस दरबार में जरूर पूरी होती है। रायपुर के इस हनुमान मंदिर में चिट्ठी चढ़ाने की प्रथा केवल एक रस्म नहीं बल्कि लोगों की अटूट आस्था का जीवंत प्रतीक है।
भक्तों के लिए मंदिर में चढ़ाई जाने वाली यह चिट्ठी केवल कागज का साधारण टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह उनकी उम्मीदों, हौसले और प्रार्थनाओं का एकमात्र जरिया है। अपनी तमाम मुश्किलों और दिल की गहराइयों में दबी इच्छाओं को लिखकर हनुमान जी के सामने रख देने की यह अनूठी शैली इस मंदिर को एक विशिष्ट और अलौकिक पहचान दिलाती है। रायपुर के इस विशेष पावन स्थल पर हर दिन बड़ी संख्या में ऐसे श्रद्धालु पहुंचते हैं जो तमाम कोशिशों के बाद भगवान के इस दरबार में अपनी उम्मीदों की आखिरी चिट्ठी सौंपने आते हैं।
























