मध्य प्रदेश राज्यसभा उपचुनाव: दो पर्चे रद्द होने के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का निर्विरोध चुना जाना तयसर्दियों में गुलाब पर ढेरों कलियां लाने के लिए अपनाएं प्रूनिंग और घरेलू पोषण का सही तरीकापश्चिम बर्दवान में सूने मकान को चोरों ने तीसरी बार बनाया निशाना, भगवान के गहने और नकदी पारकर्नाटक संगीत के दिग्गज मुथुस्वामी दीक्षितार के सम्मान में 250 रुपये का विशेष सिक्का पेशमिजोरम में आतिशबाजी कानून सख्ती के बजाय जन-जागरूकता से लागू करने पर जोरविदेश में मिला तलाक भारत में अपने आप नहीं होगा वैध, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिकाघर पर तैयार करें मुंबई का मशहूर आइस हलवा, इस दिवाली मेहमानों को परोसें कुछ खासदीपावली पार्टी में दिखना है सबसे जुदा तो इन पांच सितारों के फ्यूजन लुक्स से लें आइडियावक्री बुध का गोचर: अगले 10 दिनों में 5 राशियों को रहना होगा बेहद सतर्कगुरुग्राम के होटल में हॉट टब के अंदर मृत मिले ब्रिटेन में कार्यरत 35 वर्षीय इंजीनियर प्रांजिल पाठक
बिहान योजना से संवरी किस्मत: सरगुजा के साकालो गांव की चंचल और चांदनी गेंदे के फूलों से बढ़ा रहीं कमाईछत्तीसगढ़
3 नव॰ 2026, 9:28 pm (7 मिनट पहले)· 0

बिहान योजना से संवरी किस्मत: सरगुजा के साकालो गांव की चंचल और चांदनी गेंदे के फूलों से बढ़ा रहीं कमाई

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के साकालो गांव में चंचल सिंह और चांदनी मंडल ने बिहान योजना से कर्ज लेकर गेंदे के फूलों की खेती शुरू की है। त्योहारी मांग को देखते हुए दोनों महिला किसान परिवार को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रही हैं।

त्योहारों के मौसम में बाजारों के भीतर सजावटी फूलों की मांग में भारी उछाल दर्ज किया जाता है। घरों के प्रवेश द्वारों की सजावट से लेकर दुकानों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, पूजा अनुष्ठानों और बड़े धार्मिक आयोजनों में गेंदे के फूलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। बाजार की इसी तेज मांग को आमदनी का साधन बनाते हुए छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की दो महिला किसानों ने अपनी आजीविका संवारने की ठोस पहल की है। साकालो गांव की रहने वाली चंचल सिंह और चांदनी मंडल ने सरकारी सहायता का लाभ उठाकर गेंदे की व्यावसायिक खेती शुरू की है, जिससे उनके परिवारों को नियमित आय मिलने की नई राह खुली है।

बिहान योजना के कर्ज से मिली स्वरोजगार की नींव

साकालो गांव की चंचल सिंह और चांदनी मंडल पारंपरिक फसलों की अनिश्चितता और सीमित मुनाफे से आगे बढ़कर कुछ नया करना चाहती थीं। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और ग्रामीण स्तर पर स्वरोजगार के अवसर तैयार करने के लिए संचालित बिहान योजना ने उन्हें यह मंच उपलब्ध कराया। दोनों महिला किसानों ने बिहान योजना के तहत आवश्यक वित्तीय ऋण लिया और गेंदे के फूलों की खेती में निवेश किया। योजना से मिली वित्तीय सहायता ने उन्हें खाद, बीज और खेत की तैयारी के जरूरी संसाधन जुटाने का संबल दिया, जिसके दम पर उन्होंने बिना किसी आर्थिक अड़चन के अपने खेत में फूलों की क्यारियां तैयार कीं।

ये भी पढ़ें

त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने से बेहतर मुनाफे की उम्मीद

दीपावली और अन्य धार्मिक पर्वों के दौरान गेंदे के पीले और नारंगी फूलों की बिक्री चरम पर पहुंच जाती है। मंदिरों में होने वाली दैनिक पूजा, विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और रिहायशी परिसरों की साज-सज्जा के लिए स्थानीय मंडियों में भारी मात्रा में फूल खरीदे जाते हैं। चंचल सिंह और चांदनी मंडल ने अपनी फसल की तैयारी को इसी त्योहारी समय के अनुरूप ढाला है। बाजार में फूलों की मजबूत मांग के चलते दोनों महिला किसानों को अपनी उपज का बेहतर भाव मिलने और लागत के मुकाबले शानदार मुनाफा कमाने की पूरी उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर उत्पादित ताजे फूलों की उपलब्धता से व्यापारियों और ग्राहकों को भी सुविधा मिल रही है।

ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल

चंचल सिंह और चांदनी मंडल की कड़ी मेहनत ने यह साबित कर दिखाया है कि सही मार्गदर्शन और संस्थागत समर्थन मिलने पर खेती को एक लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है। दोनों किसान किसी अन्य पर आर्थिक रूप से निर्भर रहने के बजाय अपनी मेहनत से परिवार की आमदनी बढ़ाने में जुटी हैं। उनका यह कदम ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आर्थिक स्वतंत्रता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है। यदि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं का सही दिशा में सदुपयोग किया जाए और किसानों को बेहतर बाजार से जोड़ा जाए, तो फूलों की व्यावसायिक खेती आजीविका का एक स्थायी और मजबूत माध्यम साबित हो सकती है।

सवाल-जवाब

सरगुजा जिले की किन महिला किसानों ने गेंदे के फूलों की खेती शुरू की है?
ग्राम साकालो की रहने वाली चंचल सिंह और चांदनी मंडल ने गेंदे के फूलों की खेती शुरू की है।
फूलों की खेती के लिए दोनों महिलाओं को किस योजना से मदद मिली?
उन्हें खेती शुरू करने के लिए बिहान योजना के माध्यम से ऋण सहायता प्राप्त हुई।
गेंदे के फूलों की खेती के लिए यह समय क्यों चुना गया?
दिवाली और त्योहारों के दौरान घरों, प्रतिष्ठानों और मंदिरों में गेंदे के फूलों की मांग काफी बढ़ जाती है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर फूलों की बिक्री से अच्छी आमदनी अर्जित करना और परिवार को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp