बस्तर फाइटर आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय स्तर पर पदों के बेहद कम आवंटन ने क्षेत्र के शिक्षित और बेरोजगार युवाओं में भारी असंतोष पैदा कर दिया है। इसी मुद्दे पर अपनी बात रखने के लिए लगभग एक हजार अभ्यर्थी संगठित होकर सामने आए और प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उम्मीदवारों का सीधा तर्क है कि शासन स्तर से इस पूरी प्रक्रिया के लिए 1588 पदों की प्रशासनिक मंजूरी दी जा चुकी है। इसके बावजूद, बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय द्वारा 26 सितंबर 2026 को जारी किए गए पत्राचार में बस्तर जिले के भीतर 199 रिक्तियां दर्ज होने के बाद भी केवल 79 पदों पर ही चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
प्रतियोगियों का संघर्ष और अन्य जिलों से तुलना
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों से जुटे स्थानीय युवाओं का कहना है कि यह सीमित संख्या उनकी लंबी मेहनत पर पानी फेर रही है। जगदलपुर में बीते तीन वर्षों से किराए का कमरा लेकर अभ्यास कर रहीं अभ्यर्थी यशोदा बघेल ने अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए बताया कि घर में कोई दूसरा कमाने वाला सदस्य न होने के कारण वे भारी आर्थिक तंगी के बीच संघर्ष कर रही हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि पड़ोसी जिलों में जहां 300 से भी अधिक रिक्त पदों पर नियुक्तियां प्रस्तावित की गई हैं, वहीं बस्तर के हिस्से में महज 79 पद दिए गए हैं। अभ्यर्थियों ने दो टूक चेतावनी जारी की है कि यदि शासन ने उनकी बात पर संज्ञान नहीं लिया तो वे व्यापक स्तर पर धरने पर बैठने को बाध्य होंगे।
आरक्षण का गणित और अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें
बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद पिछले पांच से छह सालों से वर्दी पहनने का सपना देख रहे दिलीप कश्यप ने भर्ती ढांचे की तकनीकी कमियों को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुल विज्ञापित संख्या में से अग्निवीरों के खाते में 30 प्रतिशत, नगर सैनिकों के लिए 25 प्रतिशत तथा भूतपूर्व सैनिकों को 5 प्रतिशत कोटा तय किया गया है। इन सभी विशेष वर्गों के आरक्षण को अलग करने के बाद सामान्य श्रेणी के साधारण अभ्यर्थियों के लिए बेहद नाममात्र अवसर शेष रह जाते हैं। इस असंतुलन को दूर करने के लिए युवाओं ने मांग रखी है कि बस्तर जिले के कोटे में तत्काल विस्तार किया जाए और कम से कम 60 प्रतिशत के अनुपात में जगह दी जाए। इसके अतिरिक्त अभ्यर्थियों ने यह विकल्प भी सुझाया है कि नियुक्तियों को अलग-अलग जिलों में बांटने की जगह पूरे संभाग स्तर पर एक साथ भर्ती प्रक्रिया संचालित की जाए।



















