छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर देवी उपासना का अभूतपूर्व उल्लास देखने को मिल रहा है. शहर के विभिन्न मोहल्लों और चौराहों पर स्थापित दुर्गा उत्सव समितियों ने इस बार धार्मिक परंपराओं के साथ अनूठी रचनात्मकता का अद्भुत संगम पेश किया है. किसी पंडाल में स्कूली स्टेशनरी और पेंसिलों के सहारे देवी प्रतिमा और तोरण द्वार गढ़े गए हैं, तो कहीं महाभारत काल के उस दृश्य को जीवंत किया गया है जब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के समक्ष अपना अलौकिक विराट रूप प्रकट किया था. कुछ स्थलों पर सफेद और लाल वस्त्रों में मां दुर्गा की भव्य छवि श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर रही है, वहीं कुछ पंडालों में प्राकृतिक विभीषिका के बीच मानव सेवा और करुणा का मार्मिक संदेश दिया जा रहा है.
मसनगंज में स्टेशनरी सामग्री और पेंसिलों से रची गई अनूठी कलाकृति
बिलासपुर के मसनगंज इलाके में इस वर्ष का दुर्गा पंडाल श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों के बीच जबरदस्त चर्चा का केंद्र बना हुआ है. इस पंडाल की विशेषता यह है कि आयोजकों ने पारंपरिक निर्माण सामग्रियों से हटकर स्टेशनरी की वस्तुओं और पेंसिलों का बेहद सुरुचिपूर्ण उपयोग किया है. इन पेंसिलों और लेखन सामग्रियों को व्यवस्थित ढंग से जोड़कर न केवल पूरा पंडाल निर्मित किया गया है, बल्कि मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा को भी इसी विशिष्ट शैली में तैयार किया गया है. पंडाल के हर कोने में झलcolumnsकती इस बारीक कारीगरी को निहारने और माता के अनोखे रूप के दर्शन करने के लिए नगर के कोने-कोने से भारी संख्या में श्रद्धालु मसनगंज पहुंच रहे हैं.
शिव टॉकीज चौक: नेपाल आपदा और बाढ़ पीड़ितों की रक्षा का प्रेरक दृश्य
शिव वाहिनी दुर्गा उत्सव समिति ने शिव टॉकीज चौक पर स्थापित अपने पंडाल में पूजा-अर्चना के साथ एक गहरा सामाजिक संदेश समाहित किया है. समिति ने हाल के दौर में नेपाल में आई भयानक प्राकृतिक आपदा और विनाशकारी बाढ़ की परिस्थितियों को अपनी मुख्य विषयवस्तु बनाया है. पंडाल के आंतरिक भाग में तैयार किए गए सजीव दृश्यों में दिखाया गया है कि कैसे बाढ़ के उफनते पानी और भीषण संकट में फंसे असहाय लोगों की रक्षा स्वयं मां दुर्गा कर रही हैं. आपदा के थपेड़ों से घिरे नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने का यह दृश्य हर दर्शनार्थी को झकझोरता है और यह याद दिलाता है कि विपदा के समय पीड़ित मानवता की सेवा ही ईश्वर की सबसे बड़ी आराधना है.
तिफरा में जय मां काली समिति: तपस्या में लीन ऋषि स्वरूप देवी-देवता
तिफरा क्षेत्र में जय मां काली दुर्गा उत्सव समिति इस वर्ष मां भगवती की स्थापना का अपना 10वां वर्ष मना रही है. पिछले एक दशक से पूजा का आयोजन कर रही इस समिति ने पंडाल के भीतर ध्यान और साधना का अलौकिक परिवेश रचा है. यहां मुख्य देवी प्रतिमा के साथ अन्य सभी देवी-देवताओं को प्राचीन काल के ऋषि-मुनियों की भांति कठोर तपस्या और समाधि की मुद्रा में दर्शाया गया है. इस आध्यात्मिक प्रस्तुति में सनातन साधना परंपरा, मौन और गहन तप का भाव सहज ही प्रकट होता है. शांत और दिव्य वातावरण के साथ इन विशेष प्रतिमाओं के दर्शन के लिए तिफरा में दिन-रात श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है.
तेलीपारा में चंद्रशेखर आजाद समिति का 50वां वर्ष: करोड़ों की भव्यता
बिलासपुर के तेलीपारा में चंद्रशेखर आजाद दुर्गा उत्सव समिति की ओर से आयोजित उत्सव अपनी स्वर्ण जयंती यानी 50वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है. आधी सदी से निरंतर जारी इस गौरवशाली परंपरा के उपलक्ष्य में समिति ने बेहद भव्य और नयनाभिराम पंडाल का निर्माण कराया है. इस विशाल पंडाल को तैयार करने में करोड़ों रुपये की अनुमानित लागत आई है. पंडाल का बाह्य और आंतरिक स्थापत्य अपनी विशालता और भव्य रोशनी से पूरे इलाके को जगमग कर रहा है. पांच दशकों से चली आ रही इस धार्मिक निष्ठा को नमन करने और स्वर्ण जयंती वर्ष में माता के दर्शन पाने के लिए हजारों की तादाद में भक्त कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं.
उदाई चौक पर आसमानी आभा और लाल परिधान में जय संतोषी मां पंडाल
उदाई चौक पर जय संतोषी मां दुर्गा उत्सव समिति ने रंगों और आस्था के मनोहारी तालमेल से भक्तों का दिल जीत लिया है. यहां पंडाल की आंतरिक सजावट में आसमानी नीले रंग का बहुत ही सुंदर प्रयोग किया गया है, जिससे पूरे परिसर में एक शांत और दिव्य वातावरण का आभास होता है. इस आसमानी पृष्ठभूमि के बीच मां दुर्गा को चटख लाल रंग के परिधानों और आकर्षक आभूषणों से सुसज्जित किया गया है. माता रानी के साथ विराजमान अन्य सहवर्ती देवी-देवताओं के विग्रहों को भी बड़ी नफासत से अलंकृत किया गया है, जिससे यह पूरा स्थल भक्तों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया है.
जूना बिलासपुर किलावार्ड: 58वें वर्ष में महाभारत का विराट और रौद्र स्वरूप
जूना बिलासपुर के किलावार्ड में सार्वजनिक उत्सव समिति के दुर्गा पूजा आयोजन का इस वर्ष 58वां गौरवशाली वर्ष है. करीब छह दशकों की लंबी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस बार समिति ने कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक महाभारत प्रसंग को पंडाल का रूप दिया है. पंडाल में उस क्षण को जीवंत किया गया है जब रणभूमि में संशयग्रस्त अर्जुन को भगवान श्रीकृष्ण ने अपना सर्वव्यापी विराट और रौद्र रूप दिखाया था. उसी पौराणिक कथा के अनुरूप पंडाल में भगवान श्रीकृष्ण की अत्यंत विशालकाय और तेजस्वी प्रतिमा स्थापित की गई है. पौराणिक गाथा की यह भव्य और सजीव प्रस्तुति श्रद्धालुओं को रोमांचित कर रही है.
हटरी चौक और शांति लॉज गली में सफेद परिधान और सिंहवाहिनी माता
हटरी चौक पर एकता दुर्गा उत्सव समिति इस वर्ष अपनी स्थापना का 49वां साल मना रही है. इस बार समिति ने मां दुर्गा को संपूर्ण श्वेत वस्त्रों में अलंकृत कर अत्यंत शांत और सौम्य स्वरूप प्रदान किया है. सफेद परिधानों में माता की मनोहारी छवि और पंडाल का सादगीपूर्ण सौंदर्य भक्तों को सहज ही अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. वहीं दूसरी ओर, जूना बिलासपुर के शांति लॉज वाली गली में सजे पंडाल में मां भगवती अपने तेजस्वी सिंह पर सवार होकर भक्तों को दर्शन दे रही हैं. सिंहवाहिनी के इस पराक्रमी रूप को देखने के लिए गली में सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है और संपूर्ण परिवेश मां के जयकारों से गुंजायमान है.
पुराने बस स्टैंड तेलीपारा में श्रीकृष्ण लीला और योगमाया का स्वरूप
तेलीपारा स्थित पुराने बस स्टैंड के पास स्थापित पंडाल में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और पौराणिक आख्यानों से प्रेरित अनूठी झांकी सजाई गई है. यहां आदिशक्ति मां दुर्गा को योगमाया के अलौकिक स्वरूप में प्रतिष्ठापित किया गया है. वैष्णव और शाक्त परंपरा के इस दुर्लभ और विहंगम समन्वय को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. माता के इस योगमाया रूप की आभा और पंडाल की साज-सज्जा पूरे शहर में गहन श्रद्धा और कौतूहल का विषय बनी हुई है.





















