राणा प्रताप सागर बांध के पास 14 फीट लंबे अजगर ने कुत्ते को निगला, वन विभाग ने किया रेस्क्यूमेजर गरिमा यादव बनीं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल की पहली महिला एडीसी, जानिए मॉडलिंग से सेना तक का सफरजोधपुर में अनुराधा आडवाणी की अनोखी कला, कॉफी की झाग पर उकेरे मां दुर्गा के सात रूपक्रोमा की फेस्टिव सेल में iPhone 17 Pro पर भारी बचत, ऐसे पाएं ₹40,000 तक की छूटगौतम बुद्ध नगर में पांच लोगों की संदिग्ध मौत का मामला, मृतक की बहनों और बहनोई पर केस दर्जनागपुर के कॉलेज में छात्रा को आपत्तिजनक संदेश भेजने का आरोप, पिता ने प्रोफेसर पर उठाया हाथवेस्टइंडीज सीरीज में बाहर बैठे रहे वैभव सूर्यवंशी, कप्तान श्रेयस अय्यर ने बताई प्लेइंग इलेवन की हकीकतहैदराबाद के अभिलेखागार में सहेजी गईं ताड़पत्रों की अनमोल पांडुलिपियां, आंध्र महाभारतम् की मूल प्रति भी मौजूदबस्तर के किसान ने बदली खेती की राह, करेले की जगह उगा रहे बीज और हो रही बंपर कमाईसोलन में एनएच-5 पर बस और स्कॉर्पियो चालकों का विवाद, जमकर हुआ हंगामा और तोड़फोड़
बस्तर के किसान ने बदली खेती की राह, करेले की जगह उगा रहे बीज और हो रही बंपर कमाईछत्तीसगढ़
18 अक्तू॰ 2026, 12:13 pm (17 मिनट पहले)· 0

बस्तर के किसान ने बदली खेती की राह, करेले की जगह उगा रहे बीज और हो रही बंपर कमाई

बस्तर के एक किसान सब्जी की जगह करेले के बीज की खेती कर रहे हैं। शेड नेट तकनीक और सही प्रबंधन से वे इस अनोखी खेती से लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं।

बस्तर क्षेत्र में कृषि के क्षेत्र में एक नया प्रयोग देखने को मिल रहा है, जहां एक किसान पारंपरिक सब्जियों की बजाय करेले के बीज का उत्पादन कर रहा है। समलू कश्यप नामक इस किसान ने सरकारी सब्सिडी की मदद से शेड नेट की स्थापना की है और इसके भीतर करेले के बीज उगाने का काम शुरू किया है। इस विशेष प्रकार की खेती से उन्हें भारी मुनाफा होने की पूरी उम्मीद है। आमतौर पर किसान करेले की फसल को सब्जी के रूप में बाजार में बेचकर आय अर्जित करते हैं, लेकिन समलू कश्यप ने बीज उत्पादन को अपनी व्यावसायिक प्राथमिकता बनाया है। इस तरह की कृषि में उचित तकनीक अपनाने, फसल की निरंतर देखभाल करने और उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने पर विशेष जोर देना पड़ता है।

खेती की तैयारी और उर्वरक प्रबंधन

खेती की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए समलू कश्यप ने साझा किया कि वे लगभग आधा एकड़ भूमि पर यह फसल ले रहे हैं। जमीन तैयार करने के लिए खेत की चार से पांच बार जुताई की जाती है और उसके बाद रोटावेटर चलाकर क्यारियां या बेड तैयार किए जाते हैं। इन बेड के बीच की दूरी 5 फीट रखी जाती है, जबकि एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच 4 फीट का अंतराल रखा जाता है। मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए इसमें गोबर की सड़ी हुई खाद के साथ डीएपी और सुपर फॉस्फेट का उपयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त, फसल के बेहतर विकास के लिए ऊपर से 12:61, 19:19 और 13:0:45 उर्वरकों का भी छिड़काव किया जाता है।

ये भी पढ़ें

उत्पादन चक्र और बाजार मूल्य का गणित

यह पूरी फसल मात्र तीन महीने की अवधि में तैयार हो जाती है। संबंधित कंपनी के मानकों के अनुसार, इस विधि से लगभग तीन क्विंटल तक का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। किसान के अनुसार, आधा एकड़ भूमि पर खेती करने पर उन्हें तीन क्विंटल तक बीज उत्पादन की पूरी संभावना नजर आ रही है। वर्तमान में बाजार में इस बीज का भाव 2100 से 2200 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास चल रहा है। इस हिसाब से एक क्विंटल बीज की कीमत 2 लाख 10 हजार रुपये बैठती है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले साल इसी आधा एकड़ जमीन से दो क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ था।

लागत, मुनाफा और खरीदार की सुविधा

इस पूरी कृषि प्रक्रिया में लगभग 60 से 70 हजार रुपये तक की लागत आती है। यदि आधा एकड़ में न्यूनतम डेढ़ क्विंटल उत्पादन भी हासिल होता है, तो भी किसान को तीन लाख रुपये तक की शानदार कमाई हो सकती है। इस खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि उत्पादक किसानों को खरीदार खोजने के लिए मंडियों के चक्कर नहीं काटने पड़ते हैं। बीज तैयार होने के बाद संबंधित कंपनी स्वयं खेत तक आती है और सारा उत्पाद खरीदकर अपने साथ ले जाती है। इस प्रकार यह अभिनव कृषि मॉडल बस्तर के किसानों के लिए आर्थिक रूप से बेहद लाभदायक साबित हो रहा है।

सवाल-जवाब

समलू कश्यप कहां के रहने वाले हैं और वे क्या खेती कर रहे हैं?
समलू कश्यप बस्तर के रहने वाले हैं और वे करेले की सब्जी की बजाय करेले के बीज की खेती कर रहे हैं।
इस खेती के लिए कितनी जमीन का उपयोग किया जा रहा है?
यह खेती लगभग आधा एकड़ भूमि पर की जा रही है।
करेले के बीज की इस फसल की अवधि कितने दिनों की होती है?
यह तीन महीने की फसल होती है जो कम समय में तैयार हो जाती है।
बाजार में इन बीजों का भाव क्या चल रहा है?
बाजार में इन बीजों का भाव 2100 से 2200 रुपये प्रति किलो चल रहा है।
किसानों को फसल बेचने के लिए कहां जाना पड़ता है?
किसानों को बाजार या मंडी जाने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि संबंधित कंपनी खुद खेत से आकर बीज खरीदती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp