छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में चक्रवाती तूफान 'अर्नब' के खतरे को भांपते हुए प्रशासनिक अमला पूरी तरह से सतर्क हो गया है। क्षेत्र में बारिश का दौर भी शुरू हो चुका है, जिससे मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। इस संभावित प्राकृतिक आपदा और खराब मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए, संभाग के विभिन्न जिलों में सुरक्षा और राहत कार्यों के व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। जिला मुख्यालय जगदलपुर से भी बारिश शुरू होने के समाचार मिले हैं, जिसके बाद प्रशासन ने चौकसी बढ़ा दी है।
दंतेवाड़ा में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों का अवकाश
चक्रवाती तूफान और तेज हवाओं से उत्पन्न होने वाले खतरों के मद्देनजर दंतेवाड़ा जिला प्रशासन ने एक अहम कदम उठाया है। दंतेवाड़ा कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने आगामी 28 अक्टूबर के लिए एक दिन का अवकाश बढ़ाने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। इस निर्देश के अनुसार, जिले के अंतर्गत आने वाले सभी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र पूरी तरह बंद रहेंगे। यह छुट्टी केवल विद्यार्थियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह सभी शिक्षकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर भी समान रूप से लागू होगी ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।
सांसद के निर्देश पर बस्तर में विशेष समीक्षा
दूसरी तरफ, बस्तर में भी 28 अक्टूबर को सभी शैक्षणिक संस्थानों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। बस्तर सांसद ने चक्रवाती तूफान 'अरनब' के हालातों की उच्च स्तरीय समीक्षा की है और प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। सांसद ने बस्तर संभाग के सभी जिला कलेक्टरों और राजस्व महकमे को 28 अक्टूबर से लेकर 29 अक्टूबर तक पूरी तरह से सतर्क रहने का हुक्म दिया है। अधिकारियों को यह दो टूक चेतावनी दी गई है कि राहत और बचाव कार्य में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, इस चक्रवात का सबसे ज्यादा प्रभाव बस्तर संभाग पर ही पड़ने की आशंका जताई गई है।
इंद्रावती नदी किनारे के लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर भेजने की तैयारी
संभावित खतरे को देखते हुए बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिलों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। विशेष तौर पर इंद्रावती नदी के तटीय इलाकों में बसर करने वाले नागरिकों को तुरंत सुरक्षित राहत शिविरों में शिफ्ट करने के निर्देश जारी किए गए हैं। किसी भी आपातकालीन परिस्थिति से तुरंत निपटने के लिए SDRF और NDRF के कुल 50 प्रशिक्षित जवानों को आधुनिक उपकरणों के साथ मुस्तैद रखा गया है। सरकार की ओर से यह भी सुनिश्चित किया गया है कि राहत शिविर चौबीसों घंटे क्रियाशील रहें। इसके साथ ही, गर्भवती महिलाओं को जरूरत पड़ने पर फौरन सुरक्षित स्थानों और अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए विशेष परिवहन प्रबंध किए गए हैं।
बिजली, सड़क और कृषि व्यवस्था पर खास नजर
प्रशासन ने इस आपदा के दौरान विद्युत आपूर्ति, दूरसंचार नेटवर्क और सड़क मार्ग के यातायात को निर्बाध बनाए रखने पर अपना पूरा जोर दिया है। कोंडागांव जिले में राजस्व विभाग, नगरीय प्रशासन, स्वास्थ्य महकमा, बिजली विभाग और पंचायतों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रखा गया है। इसके अलावा, अन्नदाताओं की फसलों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए एक विशेष कृषि एडवाइजरी भी जारी की गई है, ताकि किसान समय रहते एहतियाती कदम उठा सकें।
कोंडागांव में भी अवकाश का ऐलान
मझधार में भारी बारिश होने की प्रबल संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कोंडागांव प्रशासन ने भी 28 अक्टूबर को सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है। जिला शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। आदेश के तहत 28 अक्टूबर को जिले के सभी शासकीय, अशासकीय और अनुदान प्राप्त विद्यालयों में अवकाश रहेगा, ताकि बच्चों और स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
























