छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में माकड़ी ब्लॉक स्थित शामपुर के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय का विवाद अब प्रशासन की चौखट तक पहुंच चुका है. स्कूल में हॉस्टल के बाथरूम में कैमरे लगवाने, भोजन में लापरवाही बरतने और छात्राओं के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार के संगीन आरोप सामने आए हैं. इन गंभीर शिकायतों के बाद स्कूल के छात्र, उनके परिजन और शिक्षक रात के समय कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे और सीधे प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अपना विरोध दर्ज कराया.
कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन और कोंडागांव बंद की चेतावनी
नाराज छात्राओं और उनके अभिभावकों ने देर रात तक कलेक्ट्रेट परिसर में डेरा डालकर स्कूल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि यदि इस मामले में 48 घंटे के भीतर प्रिंसिपल के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो पूरे कोंडागांव को बंद कराया जाएगा. इस प्रदर्शन में शामिल लोग आवासीय परिसर में बच्चों की निजता और बुनियादी सुविधाओं के साथ हो रहे खिलवाड़ पर तुरंत जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं.
भोजन में कीड़े, धान और जातिगत टिप्पणी का दावा
प्रदर्शन के दौरान स्कूल के छात्र श्याम ने हॉस्टल की दैनिक व्यवस्थाओं की पोल खोली. छात्र श्याम ने बताया कि मीटिंग के बाद शिक्षिका प्रियंका परिहार ने जब बच्चों को बुलाया, तब प्रिंसिपल ने कहा कि बच्चे आदिवासी हैं, वे एक्सपायरी खाना भी खाएंगे तो क्या होगा. छात्र ने यह भी खुलासा किया कि हॉस्टल में मिलने वाले भोजन में अक्सर कीड़े निकलते हैं और पोहा बनाने के दौरान उसमें साबुत धान मिला रहता है. इसके अलावा, विद्यार्थियों ने जब स्कूल में कंप्यूटर उपलब्ध कराने की मांग की, तो उन्हें सुविधाएं देने के बजाय धमकियों का सामना करना पड़ा.
शिक्षिका पर दबाव, बर्खास्तगी और फर्जी बिलिंग के आरोप
स्कूल की शिक्षिका प्रियंका परिहार ने प्राचार्य और वार्डनों पर मानसिक प्रताड़ना तथा गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं. शिक्षिका ने बताया कि अस्पताल में इलाज के दौरान ही उन्हें गैरकानूनी तरीके से पदमुक्त कर दिया गया और मेडिकल सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने पर भी उसे स्वीकार नहीं किया गया. प्रियंका परिहार के अनुसार, जब उन्होंने वेतन की मांग की तो स्पष्ट मना कर दिया गया और रात में चार महिला पुलिसकर्मियों को बुलाकर उनका सामान बाहर फेंकने का प्रयास हुआ.
नौकरी छीनने की धमकी और लाखों के फर्जी बिल
शिक्षिका प्रियंका परिहार ने बताया कि हॉस्टल में बच्चों के नाम पर लाखों रुपये के फर्जी बिल तैयार किए जाते हैं और शिक्षकों को डरा-धमकाकर उन पर दस्तखत करवाए जाते हैं. उन्होंने कहा कि सहायक आयुक्त और कलेक्टर के नाम की धमकियां देकर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया जाता है और बात न मानने पर करियर खराब करने की चेतावनी दी जाती है. शिक्षिका का कहना है कि बच्चों के हक में आवाज उठाने पर उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से लगातार प्रताड़ित किया गया है.























