त्योहारी सीजन में बनाएं बिना मैदा और बिना ओवन वाला केसर पिस्ता चीजकेकप्रलयंकारी सैलाब के बाद पेड़ों पर बिछी जालों की चादर, जानिए कैसे यह बनी बीमारी से सुरक्षा कवचजालोर में ड्रिप और मल्चिंग के जरिए मिर्च की खेती से किसानों को हो रहा बढ़िया मुनाफापश्चिम एशिया में गहराया तनाव: तेहरान ने सैन्य बलों को दी खुली छूट, वॉशिंगटन ने कहा बातचीत में कोई जल्दबाजी नहींकानपुर में त्योहारी मिलावटखोरी पर कड़ा प्रहार, खाद्य विभाग ने नष्ट कराई 12 क्विंटल से ज्यादा दूषित मिठाई और खोयाकेरल के अलाथुर में बहन को बचाने आए 65 वर्षीय सुलेमान की पोते के चाकू हमले में मौतजैसलमेर की सांवल कॉलोनी में बंद मकान के भीतर मिले मां और नाबालिग बेटे के शव, पुलिस जांच में जुटीजुहू में ट्रैफिक सिपाही पर बीएमडब्ल्यू चढ़ाने की कोशिश करने वाली महिला हवालात पहुंचीभड़ला में सिरेमिक स्टोरेज से सूर्यास्त के बाद भी पैदा होगी सौर ऊर्जा, एनटीपीसी शुरू करेगी पायलट प्रोजेक्टरोहतक में बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन करेंगे विशाल पदयात्रा का नेतृत्व, विपक्ष पर साधा निशाना
बीजापुर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में 30 साल बाद 1 नवंबर से जंगल सफारी होगी शुरूछत्तीसगढ़
31 अक्तू॰ 2026, 6:58 pm (5 मिनट पहले)· 0

बीजापुर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में 30 साल बाद 1 नवंबर से जंगल सफारी होगी शुरू

छत्तीसगढ़ के बीजापुर स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व में तीन दशक बाद आगामी 1 नवंबर से जंगल सफारी शुरू होने जा रही है। पहले चरण में 9 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर 4 जिप्सियां चलाई जाएंगी, जिनका किराया प्रति वाहन 2 हजार रुपये तय किया गया है।

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में वन्यजीव प्रेमियों और सैलानियों के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। लगभग तीन दशक यानी 30 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद इंद्रावती टाइगर रिजर्व के दरवाजे आम पर्यटकों के लिए दोबारा खुलने जा रहे हैं। आगामी 1 नवंबर से सैलानी इस विशाल और घने वन क्षेत्र में जंगल सफारी का लुत्फ उठा सकेंगे। इस शुरुआत से पर्यटकों को न केवल घने जंगलों की प्राकृतिक सुंदरता देखने को मिलेगी, बल्कि कई दुर्लभ वन्यजीवों को उनके मूल परिवेश में निहारने का अवसर भी हासिल होगा।

पहले चरण का रूट और जिप्सी का तय शुल्क

सफारी को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए प्रशासन ने पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है। शुरुआती चरण के अंतर्गत पर्यटकों के भ्रमण के लिए 9 किलोमीटर लंबा सफारी मार्ग निर्धारित किया गया है। इस पूरे 9 किलोमीटर के ट्रैक पर सैलानियों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए 4 जिप्सियां उतारी जाएंगी। प्रशासन ने सफारी शुल्क भी तय कर दिया है, जिसके अनुसार प्रति जिप्सी 2 हजार रुपये का भुगतान करना होगा। पर्यटकों की सुरक्षा, निगरानी और सुगम यात्रा को सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां मुकम्मल कर ली गई हैं।

ये भी पढ़ें

स्थानीय युवाओं को रोजगार और विशेष प्रशिक्षण

इस नई पहल का मकसद केवल पर्यटन को बढ़ावा देना ही नहीं है, बल्कि आसपास के ग्रामीण और स्थानीय युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी है। सफारी को पेशेवर तरीके से चलाने के लिए 6 स्थानीय युवाओं को खास प्रशिक्षण दिया गया है। इन प्रशिक्षित युवाओं को सफारी वाहनों के चालक और टूर गाइड के रूप में तैनात किया जाएगा। इससे स्थानीय समुदाय के लिए आजीविका और रोजगार के सीधे रास्ते खुलेंगे और इलाके में पर्यटन को एक नई पहचान मिलेगी।

देश का चौथा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व और इसका इतिहास

इंद्रावती टाइगर रिजर्व अपने विस्तृत क्षेत्रफल और अनूठी जैव विविधता के कारण पूरे देश में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आकार और भूभाग के मामले में यह समूचे भारत का चौथा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व माना जाता है। इसके ऐतिहासिक सफर को देखें तो साल 1981 में इस इलाके को राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया था। इसके ठीक बाद, वर्ष 1982-83 में इसे केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट टाइगर नेटवर्क का हिस्सा बनाया गया था।

कोर और बफर जोन का व्यापक फैलाव

इस पूरे अभयारण्य का कुल दायरा 2,799.07 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। पूरे रिजर्व को सुरक्षा और प्रबंधन की दृष्टि से दो मुख्य हिस्सों, कोर जोन और बफर जोन में विभाजित किया गया है। इसमें अत्यंत संरक्षित कोर क्षेत्र का दायरा 1,258.37 वर्ग किलोमीटर है। वहीं, कोर के चारों ओर फैला बफर क्षेत्र 1,540.70 वर्ग किलोमीटर के विशाल भूभाग को कवर करता है।

दुर्लभ वन्यजीवों और लुप्तप्राय पक्षियों का सुरक्षित बसेरा

यह अभयारण्य कई संकटग्रस्त और दुर्लभ प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है। इस वन क्षेत्र में बाघ, तेंदुआ, जंगली भैंसा, गौर, चीतल और ऊदबिलाव जैसे कई प्रमुख जंगली जानवर स्वच्छंद विचरण करते हैं। सिर्फ चौपाया जीव ही नहीं, बल्कि पक्षी प्रेमियों के लिए भी यह क्षेत्र बेहद खास है। यहां भारतीय गिद्ध और सफेद पीठ वाले गिद्ध जैसी दुर्लभ पक्षी प्रजातियां सुरक्षित जीवन जी रही हैं। 1 नवंबर से विधिवत शुरू होने वाली यह सफारी वन्यजीव प्रेमियों को इन सभी जीवों को करीब से देखने का सुनहरा अवसर प्रदान करेगी।

सवाल-जवाब

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी किस तारीख से शुरू हो रही है?
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पर्यटकों के लिए जंगल सफारी 1 नवंबर से आधिकारिक रूप से शुरू हो रही है।
सफारी के लिए प्रति जिप्सी कितना शुल्क तय किया गया है?
प्रशासन द्वारा जंगल सफारी के लिए प्रति जिप्सी 2 हजार रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है।
सफारी का ट्रैक कितना लंबा है और कितनी जिप्सियां चलाई जाएंगी?
सफारी के पहले चरण में 9 किलोमीटर लंबा रूट तय किया गया है, जिस पर सैलानियों के लिए 4 जिप्सियां संचालित होंगी।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल कितना है?
इस टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 2,799.07 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 1,258.37 वर्ग किमी कोर और 1,540.70 वर्ग किमी बफर जोन है।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व को प्रोजेक्ट टाइगर में कब शामिल किया गया था?
इसे साल 1981 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था और वर्ष 1982-83 में इसे प्रोजेक्ट टाइगर के तहत शामिल किया गया था।
यहां कौन-कौन से मुख्य वन्यजीव और दुर्लभ पक्षी पाए जाते हैं?
यहां बाघ, तेंदुआ, जंगली भैंसा, गौर, चीतल और ऊदबिलाव के साथ-साथ भारतीय गिद्ध और सफेद पीठ वाले गिद्ध जैसी दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp