कमजोर मानसूनी बारिश और अल-नीनो के प्रतिकूल प्रभाव के कारण महाराष्ट्र में सूखे का गंभीर खतरा मंडराने लगा है। जल संकट की इसी गंभीर स्थिति से निपटने के लिए राज्य प्रशासन ने पूरे सूबे में व्यापक स्तर पर पानी की बचत योजना लागू करने की तैयारी कर ली है। जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने सोमवार को घोषणा की कि 16 अक्टूबर 2026 से राज्य के हर ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकाय क्षेत्र में जलापूर्ति में 10 प्रतिशत की कटौती अमल में लाई जाएगी। इस दायरे में सभी ग्राम पंचायतें, नगरपालिकाएं तथा नगर निगम शामिल रहेंगे। इससे पहले इसी वर्ष 15 मई को मुंबई में भी 10 फीसदी जलापूर्ति घटाने का कदम उठाया जा चुका था।
अगस्त 2027 तक का व्यापक जल प्रबंधन खाका
जल संकट के लंबे समय तक बने रहने की संभावना को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने आगामी महीनों के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाई है। विभागीय आकलन के अनुसार जलाशयों में बचे मौजूदा पानी के भंडार का उपयोग 31 अगस्त 2027 तक के लिए नियोजित किया गया है। अधिकारियों ने प्रत्येक बांध के जलस्तर और उपयोग के आधार पर पूरा ब्योरा तैयार किया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि आने वाले महीनों में सूखे जैसी परिस्थितियों के बीच आम लोगों की प्यास बुझाना शासन का सबसे बड़ा दायित्व होगा, इसलिए पेयजल आपूर्ति को शीर्ष प्राथमिकता पर रखा जा रहा है।
लीकेज पर सख्त पहरा और शोधित जल का इस्तेमाल
पाइपलाइनों से होने वाले पानी के नुकसान को रोकने के लिए स्थानीय निकायों को कड़े निर्देश दिए गए हैं। आपूर्ति व्यवस्था में होने वाले रिसाव को तुरंत ठीक करने के लिए विशेष निगरानी अभियान संचालित किए जाएंगे। इसके अलावा नगरों में स्थापित सीवेज शोधन संयंत्रों को अपनी पूरी कार्यक्षमता के साथ चलाने का आदेश दिया गया है। शोधित पानी का अधिकतम उपयोग अन्य गैर-पेय कार्यों में करने पर जोर दिया गया है, ताकि शुद्ध जल की बर्बादी न हो।
कारखानों के लिए 30 फीसदी जल पुनर्चक्रण अनिवार्य
औद्योगिक इकाइयों में पानी की भारी खपत को नियंत्रित करने के लिए कड़े नियम तय किए गए हैं। सरकार ने सभी फैक्ट्रियों और उद्योगों को स्पष्ट आदेश दिया है कि वे अपनी कुल जरूरत का कम से कम 30 प्रतिशत पानी रीसायकल करके दोबारा इस्तेमाल में लाएं। इस कदम का मुख्य मकसद प्राकृतिक जलाशयों और नदियों के ताजे पानी पर कल-कारखानों की निर्भरता को घटाना है।
जलाशयों में 10 फीसदी आपातकालीन बफर रिजर्व
भविष्य की अनिश्चितताओं से बचने के लिए जलाशयों के प्रबंधन में अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है। गिरीश महाजन के अनुसार, राज्य के हर बांध में 10 प्रतिशत का अतिरिक्त आपात स्टॉक सुरक्षित रखा जाएगा। भीषण गर्मी के दिनों में होने वाले वाष्पीकरण, तलछट में जमा होने वाली गाद और पानी की अवैध निकासी से होने वाले नुकसान का सटीक आकलन करने के बाद 31 अगस्त 2027 तक के पेयजल का कोटा आरक्षित रहेगा।
जल वितरण की नई प्राथमिकताएं
जलाशयों से पानी छोड़ने के लिए नई वरीयता सूची तैयार की गई है। जल संसाधन विभाग सबसे पहले इंसानों के पीने के पानी, मवेशियों और पशु चारे की जरूरतों को पूरा करेगा। इन अनिवार्य आवश्यकताओं की आपूर्ति सुनिश्चित होने के बाद ही बचे हुए जल भंडार को कृषि और नहरों के जरिए सिंचाई के लिए छोड़ा जाएगा। खेती के लिए पानी देने का अंतिम फैसला बांधों में उपलब्ध स्टॉक की समीक्षा के बाद होगा।
अवैध पंपों की जब्ती और संयुक्त गश्त
नदियों, नहरों और बांधों से बिना अनुमति पानी चुराने वालों के खिलाफ व्यापक दंडात्मक कार्रवाई की तैयारी है। पानी की चोरी रोकने के लिए जल संसाधन विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमें लगातार गश्त करेंगी। किसी भी जलस्रोत से अवैध रूप से पानी खींचने वाले मोटरों और पंपिंग उपकरणों को तुरंत जब्त किया जाएगा।
विभिन्न विभागों का संयुक्त समन्वय
सूखे की इस चुनौती से निपटने के लिए कई प्रशासनिक महकमों को एक मंच पर लाया गया है। जल संसाधन, शहरी विकास, कृषि, उद्योग और राजस्व विभाग मिलकर दैनिक आधार पर जल उपलब्धता की निगरानी कर रहे हैं। मंत्री ने सभी नागरिकों और सरकारी प्रतिष्ठानों से पानी की एक-एक बूंद बचाने और उसका जिम्मेदारी से उपयोग करने का आह्वान किया है।


















