अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अमेरिकी डॉलर का दबदबा एक बार फिर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। प्रमुख प्रतिस्पर्धी मुद्राओं के मुकाबले मजबूत बढ़त दर्ज करते हुए डॉलर इंडेक्स नए चक्रीय उच्च स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका और जी6 देशों के बीच ब्याज दरों के बढ़ते अंतर ने डॉलर को अतिरिक्त सहारा दिया है। इसके साथ ही वैश्विक बॉन्ड बाजार में तेज बिकवाली देखी गई है, जिसका सीधा असर सरकारी प्रतिभूतियों पर पड़ा है। निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी है कि केंद्रीय बैंकों के आगामी फैसले किस दिशा में जाएंगे।
वैश्विक बॉन्ड बाजार पर दबाव और कर्ज स्थिरता की चिंताएं
दुनिया भर के बॉन्ड बाजारों में आई गिरावट के पीछे सख्त मौद्रिक नीति मार्ग की संभावनाएं मुख्य वजह बनी हैं। इसके अलावा बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा भारी मात्रा में नए बॉन्ड जारी करने से क्राउडिंग-आउट प्रभाव देखने को मिला है। इस अतिरिक्त कॉरपोरेट उधारी ने सरकारी प्रतिभूतियों के लिए उपलब्ध पूंजी पर दबाव डाला है। इसके साथ ही कई देशों के सॉवरेन कर्ज की स्थिरता को लेकर भी बाजार में गहरी चिंताएं उभरी हैं। इन तमाम कारकों ने मिलकर वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड को ऊपर धकेलने में बड़ी भूमिका निभाई है।
रोजगार के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक दिशा का असर
सितंबर महीने के कमजोर गैर-कृषि पेरोल आंकड़ों ने अमेरिकी डॉलर की तेज रफ्तार पर कुछ समय के लिए ब्रेक लगाया। इन आंकड़ों के आने के बाद फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में लगातार दूसरी बार ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं में कमी आई। हालांकि, पेरोल रिपोर्ट से यह भी साफ हुआ कि श्रम बाजार अब भी स्थिर बना हुआ है, जिससे फेड की दरों में सख्ती बनाए रखने की मूल नीति को कोई बड़ा झटका नहीं लगा है। इसी वजह से अमेरिकी ट्रेजरी बाजार में राहत भरी तेजी बहुत कम समय तक ही टिक सकी और यील्ड ऊंचे स्तरों पर बनी रही।
डॉलर के सामने चुनौतियां और आगे की संभावनाएं
अन्य देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा अपनाई जा रही सख्त नीतियां और फेडरल रिजर्व की ओर से अक्टूबर बैठक में दरों पर विराम लगाने की बढ़ती उम्मीदें डॉलर के लिए कुछ हद तक विपरीत हवा साबित हो रही हैं। इसके बावजूद अमेरिकी आर्थिक विकास दर का अन्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं से आगे निकलना और अमेरिकी संपत्तियों के लिए विदेशी निवेशकों की मजबूत मांग डॉलर के पक्ष में काम कर रही है। इन मजबूत बुनियादों के कारण आने वाले समय में भी अमेरिकी डॉलर में तेजी का पलड़ा भारी नजर आ रहा है।
विदेशी मुद्रा बाजार में प्रमुख जोड़ों की चाल
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में नई बिकवाली दर्ज की गई और एयूडी/यूएसडी गिरकर 0.6900 के स्तर की ओर आ गया। मध्य पूर्व के साथ-साथ रूस और यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को डॉलर की शरण लेने पर मजबूर किया। ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा के कारोबारियों की नजर अब कच्चे तेल की कीमतों, ट्रेजरी यील्ड और रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की नीतियों पर टिकी है।
दूसरी तरफ जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर ने शुरुआती गिरावट से उबरते हुए 158.00 का स्तर फिर से छू लिया। फेड द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें कम होने के बावजूद वैश्विक अनिश्चितता डॉलर को सहारा दे रही है। हालांकि, बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख और मुद्रा बाजार में संभावित सरकारी हस्तक्षेप के खतरे के चलते इस मुद्रा जोड़े में और बड़ी बढ़त सीमित रह सकती है।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार की स्थिति
सोने के बाजार में शुरुआती तेजी टिक नहीं पाई और पीली धातु में लगभग सपाट कारोबार देखने को मिला। फेड की दरों में नरमी की उम्मीदों और मजबूत अमेरिकी डॉलर के बीच सोना फंसा हुआ है। इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का कई वर्षों के उच्च स्तर के करीब बने रहना भी सर्राफा बाजार पर दबाव डाल रहा है।
डिजिटल एसेट बाजार में बिटकॉइन सीमित दायरे में कारोबार करते हुए 86,000 डॉलर के ऊपर बना हुआ है। वहीं ऑल्टकॉइन्स में सकारात्मक रुख देखा गया, जहां इथेरियम 2,700 डॉलर के पार निकल गया और रिपल 1.52 डॉलर के ऊपर स्थिर कारोबार करता दिखा।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने मौद्रिक असमंजस
यूरोपीय सेंट्रल बैंक के समक्ष भी जटिल आर्थिक स्थिति बन गई है। सामान्य परिस्थितियों में जब मुद्रास्फीति अपने तय लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से दौड़ रही हो, तो ब्याज दरें बढ़ाना सीधा कदम होता है। लेकिन मौजूदा हालात बेहद असामान्य हैं। बॉन्ड बाजार में यील्ड बढ़ने से पहले ही वित्तीय स्थितियां काफी सख्त हो चुकी हैं, जिसने केंद्रीय बैंक के काम का एक हिस्सा पहले ही कर दिया है। इस स्थिति ने ईसीबी के नीति निर्माताओं के सामने दरें तय करने को लेकर बड़ी दुविधा खड़ी कर दी है।

















