यूरोपीय बॉन्ड बाजार में बिखराव का डर बढ़ा, यूरो पर गहराया दबावकमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद सोने की चाल पर दो विश्लेषकों की अलग राय, जानिए आगे के संकेतअंबाला में 100 साल पुरानी मिट्टी की विरासत: 75 वर्षीय देवराज और उनका परिवार पीढ़ियों से संजोए हुए हैं पुश्तैनी हुनरवेस्टइंडीज नहीं मानेगा हार, टी20 सीरीज के आगाज से पहले स्पिनर अकील हुसैन ने भरी हुंकारहेयर वॉश के तुरंत बाद ऑयली हो रहे हैं बाल, नहाते समय होने वाली इन आम चूकों पर दें ध्यानघर पर बनाएं शादी और ढाबे जैसी गाढ़ी मिक्स वेज, दही और काजू की ग्रेवी से आएगा असली जायकाशीर्ष अदालत में तीन नए जजों की नियुक्ति, कुल संख्या बढ़कर हुई 37ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में फ्लावियो बोल्सोनारो की बढ़त से रियाल और बॉन्ड बाजार में मजबूतीसऊदी अरामको ने एशिया के लिए कच्चे तेल के दाम घटाए, क्या भारत में घटेगी पेट्रोल-डीजल की कीमतपूर्वोत्तर से हाथियों के स्थानांतरण पर रोक लगाने की मांग, पशु अधिकार संस्था ने केंद्रीय मंत्रालय को लिखा पत्र
कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद सोने की चाल पर दो विश्लेषकों की अलग राय, जानिए आगे के संकेतबाज़ार
5 अक्तू॰ 2026, 7:35 pm (22 मिनट पहले)· 1

कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद सोने की चाल पर दो विश्लेषकों की अलग राय, जानिए आगे के संकेत

महीनों में सबसे सुस्त अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बावजूद सोने में तेजी न लौटने पर विश्लेषक बंटे हुए हैं। जहां एक पक्ष इसे बॉन्ड यील्ड के दबाव में और गिरावट का संकेत मानता है, वहीं दूसरा पक्ष चार हजार डॉलर के स्तर पर मजबूत संस्थागत मांग देख रहा है।

अमेरिकी रोजगार बाजार से महीनों में सबसे कमजोर आंकड़े सामने आने के बाद भी सर्राफा बाजार में अपेक्षित तेजी दर्ज नहीं की जा सकी। इस घटनाक्रम को लेकर वित्तीय बाजार के दो प्रमुख विश्लेषक पूरी तरह से विपरीत निष्कर्ष पर पहुंचे हैं। एक तरफ जहां राडोम्स्की का मानना है कि तीन कारोबारी सत्रों में दूसरी बार तेजी के अनुकूल समाचार पर भी धातु का न चढ़ पाना यह साबित करता है कि मौजूदा रुझान अब भी बॉन्ड बाजार के दीर्घकालिक यील्ड के नियंत्रण में है और इसकी दिशा नीचे की तरफ है। वहीं दूसरी तरफ, सोकोलिडोउ का विश्लेषण कहता है कि बीस साल के उच्च स्तर पर पहुंची सरकारी यील्ड के बावजूद सोने का चार हजार डॉलर प्रति औंस के नीचे न फिसलना अंतर्निहित और ढांचागत मांग का प्रमाण है, जो अंततः बाजार में प्रभावी रहेगी। निवेशकों के लिए अब अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर के मुख्य चालकों पर नजर रखना आवश्यक हो गया है, क्योंकि यदि यील्ड में बढ़त जारी रही और डॉलर को घरेलू मजबूती मिली तो मंदी का रुख हावी रहेगा, जबकि केंद्रीय बैंकों और सुरक्षित निवेश की मांग दबाव को सोखती रही तो सोने का लचीलापन बरकरार रहेगा।

विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर का दबाव और प्रमुख मुद्राओं की स्थिति

व्यापक वित्तीय बाजारों में अमेरिकी डॉलर की नई मजबूती अन्य संपत्तियों पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है। एशियाई कारोबारी सत्र के उत्तरार्ध में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) में ताजा बिकवाली देखी गई, जिससे यह जोड़ी शून्य दशमलव छह नौ शून्य शून्य (0.6900) के स्तर की ओर फिसल गई। इस गिरावट के पीछे पश्चिम एशिया तथा रूस और यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच डॉलर को मिला समर्थन प्रमुख कारण रहा। मुद्रा बाजार के व्यापारी नई दिशा तलाशने के लिए कच्चे तेल की कीमतों, ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) से जुड़ी ब्याज दर अपेक्षाओं पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

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दूसरी ओर, डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) ने अपनी पुरानी गिरावट को मिटाते हुए एशियाई सत्र के दौरान एक सौ अट्ठावन दशमलव शून्य शून्य (158.00) के स्तर को दोबारा हासिल कर लिया और यह पिछले एक सप्ताह के सीमित दायरे में कारोबार करता रहा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें क्षीण पड़ने के बावजूद वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता डॉलर को सहारा दे रही है, जिससे इस जोड़ी को वापसी करने में मदद मिली। हालांकि, बैंक ऑफ जापान (BoJ) के सख्त मौद्रिक रुख की संभावनाओं और मुद्रा हस्तक्षेप के मंडराते जोखिम के कारण येन को समर्थन मिल सकता है, जो डॉलर की इस बढ़त को सीमित कर सकता है।

सोने के प्रमुख तकनीकी स्तर और दायरा

सोमवार के कारोबार में सोने ने अपने शुरुआती नुकसान को थोड़ा कम किया, लेकिन इसके बावजूद यह अपने पुराने दायरे में ही फंसा नजर आया। बाजार में ऊपर की ओर सुधार के प्रयास बयालीस सौ डॉलर ($4,200) के नीचे ही सीमित रहे, जबकि दो महीने का निचला स्तर इकतालीस सौ दस डॉलर ($4,110) इससे कुछ ही दूरी पर बना हुआ है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में हालिया नरमी ने कीमती धातुओं को कुछ हद तक राहत दी है, लेकिन अमेरिकी ट्रेजरी की ऊंची बॉन्ड यील्ड डॉलर की किसी भी बड़ी गिरावट को रोक रही है और सोने की कीमतों पर दबाव बनाए हुए है।

क्रिप्टोकरेंसी बाजार में स्थिरता और तेजी के संकेत

डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में बिटकॉइन सोमवार को सियासी और आर्थिक संकेतों के बीच संकीर्ण दायरे में स्थिरता के साथ छियासी हजार डॉलर ($86,000) के स्तर से ऊपर कारोबार करता दिखा। दूसरी तरफ ऑल्टकॉइन्स में सकारात्मक परिदृश्य देखने को मिला, जहां एथेरियम बढ़त के साथ सत्ताईस सौ डॉलर ($2,700) के पार पहुंच गया, जबकि रिपल एक दशमलव पांच दो डॉलर ($1.52) के ऊपर मजबूती से टिका रहा।

यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने मौद्रिक नीति का असमंजस

यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के समक्ष भी नीतिगत स्तर पर बड़ी दुविधा खड़ी हो गई है। सामान्य परिस्थितियों में जब मुद्रास्फीति तय लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से चल रही हो, तब केंद्रीय बैंक के पास ब्याज दरें बढ़ाने का सीधा रास्ता होता है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियां सामान्य नहीं हैं। इस समय बॉन्ड बाजार पहले ही मौद्रिक सख्ती का एक बड़ा हिस्सा अपने स्तर पर अंजाम दे चुका है, जिसके चलते यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने नीतिगत फैसले लेने का एक जटिल और कठिन संकट खड़ा हो गया है।

सवाल-जवाब

अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के कमजोर रहने के बाद भी सोने में तेजी क्यों नहीं आई?
अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड बीस साल के उच्च स्तर के करीब बनी हुई है, जिससे बिना ब्याज देने वाले सोने की मांग पर दबाव बना रहा।
सोने के बाजार में विश्लेषक राडोम्स्की और सोकोलिडोउ के विचारों में क्या अंतर है?
राडोम्स्की का मानना है कि यील्ड के दबाव से सोने में और गिरावट आएगी, जबकि सोकोलिडोउ का कहना है कि चार हजार डॉलर का स्तर न टूटना मजबूत ढांचागत मांग का संकेत है।
सोने के लिए मौजूदा समय में कौन से प्रमुख स्तर देखे जा रहे हैं?
सोने की बढ़त बयालीस सौ डॉलर ($4,200) के नीचे सीमित है, जबकि दो महीने का निचला स्तर इकतालीस सौ दस डॉलर ($4,110) नजदीक बना हुआ है।
विदेशी मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और येन की क्या स्थिति है?
डॉलर की मजबूती से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर गिरकर 0.6900 के करीब आ गया है, जबकि USD/JPY संभलकर 158.00 के स्तर पर पहुंच गया है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में प्रमुख टोकन किस स्तर पर कारोबार कर रहे हैं?
बिटकॉइन छियासी हजार डॉलर ($86,000) के ऊपर टिका हुआ है, एथेरियम सत्ताईस सौ डॉलर ($2,700) के पार है और रिपल एक दशमलव पांच दो डॉलर ($1.52) के ऊपर है।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के सामने क्या चुनौती है?
मुद्रास्फीति लक्ष्य से दोगुनी होने के बावजूद बॉन्ड बाजार पहले ही सख्ती कर चुका है, जिससे ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला जटिल हो गया है।
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