श्रीलंका के खिलाफ खेले जा रहे शृंखला के पहले टेस्ट मैच की पहली पारी में युवा भारतीय बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल ने अपनी क्लासिक बल्लेबाजी से एक नया अध्याय लिख दिया है। टीम में चोटिल खिलाड़ी साई सुदर्शन के स्थान पर शामिल किए गए पडिक्कल को बल्लेबाजी क्रम में तीसरे नंबर की बेहद चुनौतीपूर्ण भूमिका सौंपी गई थी। इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए उन्होंने मैदान पर संयम और आक्रामक स्ट्रोकप्ले का एक बेहतरीन संतुलन पेश किया। देवदत्त पडिक्कल ने मात्र 134 गेंदों में अपना पहला टेस्ट शतक पूरा किया, जिसमें 9 कलात्मक चौके और 1 दर्शनीय छक्का शामिल रहा। तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी का स्वाभाविक दबाव होने के बावजूद पडिक्कल ने जिस परिपक्वता के साथ श्रीलंकाई आक्रमण का सामना किया, उसने भारतीय ड्रेसिंग रूम के साथ-साथ क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीत लिया।
15 अगस्त पर शतक जमाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज
15 अगस्त यानी देश के स्वतंत्रता दिवस के पावन राष्ट्रीय पर्व पर शतक जमाकर देवदत्त पडिक्कल ने एक ऐसा ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है जो इससे पहले भारत के किसी भी बल्लेबाज के खाते में नहीं दर्ज था। वह स्वतंत्रता दिवस वाले दिन टेस्ट क्रिकेट में शतक लगाने वाले देश के सबसे पहले बल्लेबाज बन गए हैं। जैसे ही पडिक्कल ने एक रन लेकर अपने करियर के तीसरे ही टेस्ट मैच में 100 रन का आंकड़ा पार किया, स्टेडियम में मौजूद दर्शक खुशी से झूम उठे। इस यादगार पल की महत्ता उस समय और बढ़ गई जब पवेलियन की बालकनी में मौजूद भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर और मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने खड़े होकर इस युवा वामहस्त बल्लेबाज का गर्मजोशी से ताली बजाकर अभिनंदन किया। पडिक्कल का यह ऐतिहासिक शतक न केवल टीम प्रबंधन के भरोसे को सही साबित करता है, बल्कि भारतीय टेस्ट बल्लेबाजी के आने वाले भविष्य के प्रति एक सुखद और आश्वस्त करने वाली तस्वीर भी पेश करता है।
कठिन अभ्यास और कोलंबो के अभ्यास मैच का लाभ
पडिक्कल का यह प्रदर्शन अचानक नहीं आया है, बल्कि इसके पीछे उनकी कड़ी मेहनत और सुनियोजित तैयारी रही है। साई सुदर्शन की चोट के कारण सीरीज से बाहर होने के बाद जब पडिक्कल के लिए अंतिम एकादश में तीसरे नंबर पर खेलने की राह आसान हुई, तो उन्होंने अपनी तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ी। मुख्य मुकाबले से पहले कोलंबो में श्रीलंका क्रिकेट अध्यक्ष एकादश के खिलाफ खेले गए अभ्यास मैच में पडिक्कल ने 142 रनों की शानदार पारी खेली थी। उस बड़ी पारी से मिले आत्मविश्वास को उन्होंने मुख्य टेस्ट में बखूबी भुनाया। इसके अतिरिक्त टेस्ट मैच की शुरुआत से पहले नेट सत्रों में उन्होंने कप्तान शुभमन गिल के साथ घंटों समय बिताया। श्रीलंकाई स्पिनरों को ध्यान में रखते हुए पडिक्कल ने विशेष रूप से ऑफ-स्पिनरों के खिलाफ स्वीप शॉट्स खेलने का गहन अभ्यास किया था और शॉर्ट लेग पर कैच लेने की अपनी तकनीक पर भी काफी काम किया था। उनकी इस सुनियोजित पदोन्नति और क्रीज पर बिताए गए समय ने यह साबित कर दिया कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार थे।
नंबर तीन के स्थान पर जारी अस्थिरता का समीकरण
भारतीय टेस्ट क्रिकेट में तीसरे नंबर का बल्लेबाजी क्रम लंबे समय से टीम की रीढ़ माना जाता रहा है। अतीत में राहुल द्रविड़ और चेतेश्वर पुजारा जैसे टेस्ट क्रिकेट के दिग्गजों ने इस स्थान पर सालों तक अविश्वसनीय मजबूती प्रदान की थी और हजारों रन बनाकर टीम को स्थिरता दी थी। हालांकि जून 2023 में विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के फाइनल मुकाबले के बाद से स्थिति तेजी से बदली है। पुजारा को टीम से बाहर किए जाने, रोहित शर्मा और विराट कोहली के संन्यास तथा समय-समय पर खिलाड़ियों की चोटों की वजह से तीसरे नंबर का स्थान लगातार अस्थिर बना हुआ है। टीम प्रबंधन को इस स्थान पर बार-बार नए प्रयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
जून 2023 से अब तक आजमाए गए बल्लेबाजों के आंकड़े
अगर जून 2023 के WTC फाइनल के बाद से आंकड़ों पर नजर डालें तो भारतीय टीम प्रबंधन ने तीसरे नंबर के महत्वपूर्ण स्थान पर 7 अलग-अलग खिलाड़ियों को आजमाकर देखा है। इन खिलाड़ियों का व्यक्तिगत प्रदर्शन इस प्रकार रहा है
- साई सुदर्शन: 7 मैचों की 12 पारियों में सर्वाधिक 383 रन बनाए हैं।
- शुभमन गिल: 5 मैचों की पारियों में 237 रन जोड़े हैं।
- करुण नायर: 2 मैचों में कुल 111 रन दर्ज किए हैं।
- विराट कोहली: 1 मैच में 70 रन बनाए हैं।
- वाशिंगटन सुंदर: 1 मैच में 60 रन का योगदान दिया है।
- देवदत्त पडिक्कल: इस मौजूदा टेस्ट मैच से पहले खेले गए 1 मैच में 25 रन बनाए थे।
- केएल राहुल: 1 मैच में 24 रन जोड़े थे।
वैश्विक टीमों की तुलना में भारतीय नंबर तीन का औसत
जून 2023 के बाद से भारतीय टीम के लिए तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने वाले खिलाड़ियों का सामूहिक बल्लेबाजी औसत मात्र 32.9 का रहा है। यह आंकड़ा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अन्य प्रमुख टेस्ट टीमों के मुकाबले काफी कम नजर आता है। अगर वैश्विक आंकड़ों की तुलना करें तो इस अवधि में तीसरे नंबर पर पाकिस्तान का बल्लेबाजी औसत 41.37 रहा है, बांग्लादेश का औसत 39.75 रहा है और इंग्लैंड का औसत 37.16 का दर्ज किया गया है। टेस्ट खेलने वाले प्रमुख देशों में केवल वेस्टइंडीज ही एकमात्र ऐसी टीम है जिसका तीसरे नंबर का औसत भारत से नीचे रहा है।
शीर्ष क्रम की व्यवस्था और भविष्य की राह
वर्तमान समय में भारतीय शीर्ष क्रम के तीन मुख्य स्थान केएल राहुल, यशस्वी जायसवाल और शुभमन गिल के रूप में काफी हद तक तय माने जा रहे हैं। ऐसे में नंबर-3 का खाली स्थान टीम प्रबंधन को नए खिलाड़ियों के साथ प्रयोग करने की स्वतंत्रता तो प्रदान करता है, लेकिन इसके साथ ही जोखिम भी काफी बढ़ जाता है। टेस्ट क्रिकेट में तीसरे नंबर का बल्लेबाज रातों-रात तैयार नहीं होता, बल्कि विषम परिस्थितियों में निरंतर समर्थन और अवसर देकर उसे निधारा जाता है। यदि प्रबंधन लगातार प्रदर्शन करो या बाहर जाओ की नीति पर चलता रहेगा तो खिलाड़ी टीम में अपनी जगह को लेकर असुरक्षित महसूस करेंगे। ऐसे समय में देवदत्त पडिक्कल ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दबाव में शतक जमाकर इस बेहद अहम स्थान के लिए अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है।



















