गॉल में श्रीलंका के खिलाफ खेले जा रहे टेस्ट मैच के पहले ही दिन भारतीय टीम को एक अनपेक्षित झटका झेलना पड़ा। मैच की शानदार शुरुआत के बाद सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल 11वें ओवर में एक दर्दनाक तालमेल की कमी के कारण रन आउट होकर पवेलियन लौट गए। जायसवाल क्रीज पर बेहद अच्छी लय में नजर आ रहे थे और उन्होंने 37 गेंदों का सामना करते हुए 32 रन बना लिए थे। हालांकि, साथी सलामी बल्लेबाज केएल राहुल के साथ रन लेने के दौरान हुई गफलत ने उनकी इस पारी का दुखद अंत कर दिया। इस घटना के समय भारत का स्कोर 11 ओवर में बिना किसी नुकसान के 47 रन था, जिससे टीम एक मजबूत नींव तैयार करती दिख रही थी।
गॉल टेस्ट के 11वें ओवर का पूरा घटनाक्रम
यह पूरा वाकया भारतीय पारी के 11वें ओवर की अंतिम गेंद पर घटित हुआ, जब श्रीलंकाई तेज गेंदबाज केशरा नुवांथा गेंदबाजी कर रहे थे। स्ट्राइक पर मौजूद केएल राहुल ने गेंद को हल्के हाथों से लेग साइड की दिशा में धकेला और बिना किसी झिझक के तुरंत एक रन के लिए दौड़ पड़े। राहुल की ओर से रन का कॉल एकदम साफ था और उनके पास अपनी क्रीज तक आसानी से पहुंचने के लिए पर्याप्त समय मौजूद था। दूसरी छोर पर खड़े यशस्वी जायसवाल ने शुरुआत में रन के लिए कदम आगे बढ़ाए, लेकिन तभी एक अप्रत्याशित हादसा हो गया।
दौड़ने की कोशिश में जायसवाल की सीधी टक्कर गेंदबाज केशरा नुवांथा से हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि जायसवाल का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया और वह पिच पर गिर पड़े। इस अचानक हुए हादसे के कारण जायसवाल का ध्यान कुछ अमूल्य सेकंडों के लिए गेंद और अपने जोड़ीदार राहुल से पूरी तरह हट गया। जब तक जायसवाल संभलकर दोबारा खड़े हुए और स्थिति को समझ पाए, तब तक केएल राहुल दौड़कर स्ट्राइकर एंड वाली क्रीज तक पहुंच चुके थे। नतीजा यह हुआ कि दोनों भारतीय बल्लेबाज एक ही छोर पर खड़े रह गए, और श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने बिना किसी गलती के गिल्लियां बिखेरकर जायसवाल को रन आउट कर दिया।
संजय मांजरेकर ने जताई नाराजगी और बताया जायसवाल की गलती
यशस्वी जायसवाल के इस तरह आउट होने पर पूर्व भारतीय बल्लेबाज संजय मांजरेकर ने कमेंट्री के दौरान गहरी हैरानी और निराशा व्यक्त की। मांजरेकर ने इस घटना का बारीकी से विश्लेषण करते हुए कहा कि इसमें पूरी गलती जायसवाल की ही थी, क्योंकि राहुल के पास रन पूरा करने का पूरा मौका था।
कमेंट्री बॉक्स से इस रन आउट पर टिप्पणी करते हुए मांजरेकर ने कहा, "मुझे लगता है कि वहां आसानी से रन बन सकता था, केएल राहुल अपनी क्रीज पर आराम से पहुंच जाते लेकिन ऐसा लगा कि जायसवाल अपनी ही दुनिया में खोए हुए थे।" मांजरेकर का मानना था कि बल्लेबाज को हर समय मैदान की स्थिति और अपने पार्टनर की चाल पर नजर रखनी चाहिए, और इस तरह ध्यान भटकना टीम के लिए नुकसानदेह साबित हुआ।
शानदार शुरुआत का दुखद अंत
जायसवाल का इस तरह आउट होना भारतीय टीम के लिए बड़ा झटका माना गया क्योंकि वह सेट हो चुके थे। अपनी 32 रनों की पारी में जायसवाल ने कुछ बेहद दर्शनीय और कलात्मक शॉट लगाए थे। वह केएल राहुल के साथ मिलकर श्रीलंकाई गेंदबाजों पर दबाव बना रहे थे। शुरुआती 11 ओवरों में 47 रन जोड़कर दोनों ओपनर्स ने मैच पर भारत की पकड़ मजबूत कर दी थी। यदि यह रन आउट न होता तो जायसवाल के पास एक बड़ी और यादगार पारी खेलने का बेहतरीन अवसर मौजूद था।
राहुल और पडिक्कल ने संभाली भारतीय पारी
शुरुआती झटके और जायसवाल के पवेलियन लौटने के बावजूद केएल राहुल ने अपना धैर्य नहीं खोया। उन्होंने संयम के साथ बल्लेबाजी जारी रखी और तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने आए देवदत्त पडिक्कल का बेहतरीन साथ निभाया। राहुल और पडिक्कल ने मिलकर श्रीलंकाई आक्रमण का डटकर मुकाबला किया और भारतीय पारी को फिर से मजबूती प्रदान की। पडिक्कल ने इस मौके का पूरा फायदा उठाते हुए टेस्ट मैच के पहले ही दिन एक शानदार शतक जड़ दिया, जिससे श्रीलंका की टीम बैकफुट पर धकेल दी गई और भारत ने मैच में अपनी स्थिति को बेहद मजबूत कर लिया।



















