दुनिया के सबसे विध्वंसक तेज गेंदबाजों में शुमार 'रावलपिंडी एक्सप्रेस' यानी शोएब अख्तर ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर को लेकर एक बेहद भावुक खुलासा किया है. 161.3 किमी/घंटा की तूफानी गति से गेंदबाजी करके दुनिया भर के दिग्गज बल्लेबाजों को खौफजदा करने वाले इस पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर के मन में आज भी एक बड़ा पछतावा छिपा हुआ है. जिओ टीवी के एक टीवी शो में बातचीत करते हुए शोएब अख्तर ने स्वीकार किया कि यदि उन्हें अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के शुरुआती दौर में पूर्व कप्तान व महान ऑलराउंडर इमरान खान के नेतृत्व में खेलने का अवसर प्राप्त हुआ होता, तो टेस्ट क्रिकेट में उनके विकेटों के आंकड़े बिल्कुल नए रिकॉर्ड कायम कर रहे होते.
इमरान खान का आक्रामक नेतृत्व और 400 टेस्ट विकेटों का सपना
जिओ टीवी के कार्यक्रम में अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए शोएब अख्तर ने कहा कि इमरान खान की कप्तानी के तहत न खेल पाना उनके जीवन का सबसे बड़ा अफसोस है. शोएब का मानना है कि इमरान खान एक ऐसे निडर और दूरदर्शी कप्तान थे, जो किसी भी गेंदबाज के अंदर से उसकी छिपी हुई प्रतिभा को पूरी तरह बाहर निकालने की महारत रखते थे. यदि उन्हें अपने टेस्ट करियर की शुरुआत में ही इमरान जैसा मेंटॉर मिल जाता, तो उनकी गेंदबाजी का स्तर किसी अलग ही मुकाम पर पहुंच गया होता.
अपनी इस बात के पक्ष में शोएब ने अपने प्रथम श्रेणी क्रिकेट के रिकॉर्ड को सामने रखा. उन्होंने याद दिलाया कि फर्स्ट-क्लास मैचों में उनके नाम 400 से अधिक शिकार दर्ज हैं. शोएब ने अपनी बात रखते हुए कहा, "अगर मैं इमरान खान के नेतृत्व में थोड़ा पहले खेला होता, तो टेस्ट क्रिकेट में कम से कम 400 विकेट जरूर लेता." उनका दृढ़ विश्वास है कि इमरान की आक्रामक सोच और तेज गेंदबाजों पर उनका अटूट भरोसा उन्हें टेस्ट प्रारूप में 400 विकेटों की उपलब्धि तक आसानी से पहुंचा देता.
रावलपिंडी में पहला टेस्ट और कप्तानी के तेजी से बदलते समीकरण
शोएब अख्तर के अंतरराष्ट्रीय सफर की शुरुआत भी कम नाटकीय नहीं रही. शोएब ने अंतरराष्ट्रीय टेस्ट करियर का पहला मुकाबला अपने गृहनगर रावलपिंडी के मैदान पर वेस्टइंडीज की मजबूत टीम के विरुद्ध खेला था. परंतु, जब शोएब ने कदम रखा, उस समय तक इमरान खान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह चुके थे. इसी वजह से अपने सबसे पसंदीदा कप्तान की देखरेख में खेलने का उनका सपना अधूरा ही रह गया.
इमरान के संन्यास के बाद शोएब को अपने करियर में कई अलग-अलग कप्तानों की कमान में खेलना पड़ा. उस जमाने में पाकिस्तान टीम की कप्तानी बहुत जल्दबाजी में बदलती रहती थी. हर नए कप्तान की अलग रणनीति, मिजाज और सोच के साथ तालमेल बिठाना शोएब के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हुआ. विभिन्न कप्तानों के साथ उनके रिश्ते काफी पेचीदा और तनावपूर्ण रहे. करियर का अंत भी इसी उथल-पुथल के बीच हुआ, जब साल 2011 में आयोजित एकदिवसीय विश्व कप के समय कप्तान शाहिद अफरीदी के साथ अनबन की चर्चाओं के मध्य उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी.
वसीम अकरम के साथ रिश्ते: शुरुआती झिझक, सम्मान और मैदान पर कहर
शुरुआती दौर के पलों को याद करते हुए शोएब ने दिग्गज पेसर वसीम अकरम के नेतृत्व पर भी अपनी बात रखी. करियर की शुरुआत में वसीम अकरम शोएब को सीधे टेस्ट क्रिकेट में उतारने के पक्ष में नहीं थे. अकरम का सोचना था कि युवा शोएब के लिए अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट के भारी दबाव को तुरंत झेलना सही नहीं होगा और उन्हें थोड़ा वक्त दिया जाना चाहिए.
वक्त बीतने के साथ वसीम अकरम तथा शोएब अख्तर की जोड़ी का आपसी तालमेल एक दिलचस्प मोड़ पर रहा. दोनों के बीच सम्मान और तारीफ तो थी, लेकिन साथ ही एक अनकहा खिंचाव और मतभेद भी बने रहे. इसके बावजूद, जब भी ये दोनों तेज गेंदबाज एक साथ मैदान पर उतरे, तो विपक्षी टीमों के लिए काल साबित हुए. चाहे साल 1999 का ऐतिहासिक भारत दौरा रहा हो या फिर 1999 में इंग्लैंड में हुआ वनडे विश्व कप (जिसमें पाकिस्तान उपविजेता रहा था), इस जोड़ी ने पाकिस्तान को कई यादगार मुकाबलों में जीत दिलाई.
घुटनों का असहनीय दर्द, सीरिंज से तरल निकालना और 5 घंटे की रिकवरी
फैंस केवल 161.3 किमी/घंटा की गति और उखड़ते हुए स्टंप्स देखते थे, लेकिन उस रफ्तार को बनाए रखने के लिए शोएब ने अपने शरीर पर जो अत्याचार झेला, उसकी दास्तान सुनकर कोई भी हैरान रह जाएगा. शोएब ने पहली बार उस दर्दनाक प्रक्रिया का खुलासा किया, जिससे उन्हें हर मैच से पहले गुजरना पड़ता था.
शोएब ने बताया कि मैच वाले दिन उन्हें टीम के बाकी साथियों से कम से कम 3 घंटे पहले जागना पड़ता था. वह पहले साइक्लिंग करते थे और फिर जिम में पसीना बहाते थे. रात भर में उनके घुटने पूरी तरह लॉक और जाम हो जाते थे. मैच शुरू होने से ठीक पहले डॉक्टरों द्वारा सीरिंज के जरिए घुटनों के जोड़ों से फ्लूइड बाहर निकाला जाता था, दवाइयां लगाई जाती थीं और बर्फ के पैक से सिकाई होती थी.
इस खौफनाक दर्द को सहने के बाद ही वह मैदान पर उतरकर पूरी ताकत से गेंदबाजी कर पाते थे. मुकाबला खत्म होने के बाद दर्द इतना भयानक होता था कि अपने शरीर को सामान्य हालत में वापस लाने और रिकवर होने में उन्हें रोजाना 5 घंटे का समय लगता था. यह कष्टदायक दिनचर्या उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बन गई थी.
करियर के आंकड़े और 'रावलपिंडी एक्सप्रेस' की बेमिसाल विरासत
अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड की बात करें तो शोएब अख्तर ने 46 टेस्ट मुकाबलों में 178 विकेट हासिल किए. इसके अलावा उन्होंने 163 एकदिवसीय मैचों में 247 शिकार बनाए तथा 15 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 21 विकेट अपने नाम दर्ज किए. यदि उनका शरीर बार-बार की चोटों से मुक्त रहता तथा इमरान खान जैसा मार्गदर्शन शुरुआत में मिल जाता, तो 400 टेस्ट विकेट का उनका सपना जरूर सच होता. इसके बावजूद, भयानक शारीरिक पीड़ा झेलकर भी 100 मील प्रति घंटा की गति सीमा पार करने वाले इस गेंदबाज का जुनून क्रिकेट के इतिहास में हमेशा अमर रहेगा.



















