श्रीलंका दौरे पर गॉल के ऐतिहासिक मैदान में खेले जा रहे पहले टेस्ट मुकाबले में भारतीय टीम ने अपनी पहली पारी में ठोस शुरुआत की है। मैच के शुरुआती दिन गॉल की पिच पर मौजूद शुरुआती नमी और गेंदबाजों को मिल रही मदद के बीच भारतीय बल्लेबाजों को खासी सावधानी बरतनी पड़ी। भारत के उप-कप्तान केएल राहुल ने मुश्किल परिस्थितियों का सामना करते हुए बेहद संयमित अंदाज में बल्लेबाजी की और टीम को एक मजबूत स्थिति में पहुंचाया। हालांकि, अपनी बेहतरीन पारी के दौरान शरीर में खिंचाव और उंगली के दर्द के कारण उन्हें 77 रन के व्यक्तिगत स्कोर पर रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान छोड़ना पड़ा। इसके बाद युवा बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल ने जिम्मेदारी संभालते हुए अपने टेस्ट करियर का पहला शतक जड़ा और भारतीय स्कोर को 200 रन के पार पहुंचा दिया।
गॉल की चुनौतीपूर्ण पिच और केएल राहुल का संयम
मैच की शुरुआत में जब भारतीय टीम बल्लेबाजी करने मैदान में उतरी, तब गॉल की पिच पर तेज गेंदबाजों के लिए हल्की नमी और स्पिनरों के लिए अनुकूल परिस्थितियां मौजूद थीं। ऐसे समय में क्रीज पर टिकना और संयम बनाए रखना बेहद जरूरी था। उप-कप्तान केएल राहुल ने परिस्थितियों को भांपते हुए बहुत संभलकर खेलना शुरू किया। उन्होंने रक्षात्मक खेल के साथ-साथ खराब गेंदों को उनके अंजाम तक पहुंचाने में कोई कोताही नहीं बरती। राहुल ने गेंद की मेरिट पर भरोसा किया और अपनी तकनीक का शानदार मुआयना पेश किया।
अपनी इस अनुशासित बल्लेबाजी के दौरान राहुल ने 162 गेंदों का सामना किया और 77 रनों की एक बेहद महत्वपूर्ण पारी खेली। उनकी इस पारी में 9 नजाकत भरे चौके और 1 दर्शनीय छक्का शामिल रहा। उन्होंने मैदान के चारों तरफ संतुलित शॉट्स लगाए और दूसरे छोर पर मौजूद बल्लेबाजों के साथ मिलकर भारतीय पारी को संवारा। राहुल का यह संयम टीम इंडिया के लिए एक बड़े स्कोर का आधार साबित हुआ।
उमस और उंगली के दर्द से परेशान हुए राहुल
टी-ब्रेक तक भारतीय टीम काफी मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही थी और केएल राहुल एक छोर पर डटकर बल्लेबाजी कर रहे थे। लेकिन टी-ब्रेक खत्म होने के बाद गॉल के मैदान पर बढ़ती चिलचिलाती गर्मी और उमस ने खिलाड़ियों की परीक्षा लेना शुरू कर दिया। अत्यधिक थकावट की वजह से राहुल के शरीर में खिंचाव की समस्या पैदा होने लगी। वह क्रीज पर बल्लेबाजी करते हुए बार-बार अपने हाथों और उंगलियों को स्ट्रेच करते हुए दिखाई दिए।
धीरे-धीरे दर्द इतना बढ़ गया कि उनके दाहिने हाथ की उंगली में गंभीर असहजता साफ नजर आने लगी। राहुल के लिए क्रीज पर खड़े रहना भी चुनौतीपूर्ण होता जा रहा था। स्थिति को देखते हुए भारतीय मेडिकल टीम और फिजियो को तुरंत मैदान पर बुलाया गया। फिजियो ने पिच पर ही राहुल के दाहिने हाथ और उंगली का प्राथमिक इलाज किया, लेकिन कुछ ही मिनटों में यह स्पष्ट हो गया कि राहुल आगे बल्लेबाजी जारी रखने में सक्षम नहीं हैं। इस तरह 77 रन के व्यक्तिगत स्कोर पर राहुल को भारी मन से रिटायर्ड हर्ट होकर पवेलियन लौटना पड़ा। जिस वक्त वह मैदान से बाहर गए, भारत का स्कोर 1 विकेट के नुकसान पर 138 रन था।
देवदत्त पडिक्कल का धमाकेदार पहला टेस्ट शतक
आमतौर पर जब कोई सैट बल्लेबाज अचानक रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान से बाहर जाता है, तो नई साझेदारी बनने में समय लगता है और टीम का रन बनाने का मोमेंटम प्रभावित हो सकता है। लेकिन गॉल में ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ। पहले से क्रीज पर नजरें जमा चुके युवा बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल ने राहुल के बाहर जाने के बाद पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। पडिक्कल ने अपने आक्रामक और कलात्मक अंदाज का प्रदर्शन करते हुए श्रीलंकाई गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा।
पडिक्कल ने श्रीलंकाई गेंदबाजों को कोई मौका न देते हुए मैदान के हर कोने में आकर्षक शॉट्स जड़े। अपनी इस परिपक्व पारी के दौरान उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में अपना पहला शतक पूरा किया। अपने डेब्यू के बाद से इस लंबे प्रारूप में पहला शतक जड़कर पडिक्कल ने अपनी उपयोगिता साबित की और मैदान पर अपनी क्षमता का लोहा मनवाया।
शुभमन गिल के साथ 200 के पार पहुंचा भारतीय स्कोर
देवदत्त पडिक्कल के इस शानदार शतक के दौरान दूसरे छोर पर कप्तान शुभमन गिल ने भी उनका बेहतरीन साथ निभाया। राहुल के 138 रन के स्कोर पर मैदान छोड़ने के बाद इन दोनों खिलाड़ियों ने पारी को सहजता से आगे बढ़ाया। गिल ने एक छोर से संयम और समझदारी से बल्लेबाजी की, जिससे पडिक्कल को खुलकर खेलने का मौका मिला। दोनों बल्लेबाजों की सूझबूझ से भारतीय टीम ने 200 रन का आंकड़ा आसानी से पार कर लिया और पहले टेस्ट में अपनी स्थिति बेहद मजबूत कर ली।



















