पुणे प्लांट में बनने लगी लैंड रोवर डिफेंडर, कीमतों में 34 लाख रुपये तक की भारी कटौतीसावन में बेलपत्र चढ़ाने का सही नियम क्या है, एक गलती से बेकार हो सकती है पूजाक्विंस की मेरिनो वूल टी-शर्ट बाजार में क्यों मचा रही है धूमवियतनाम में आर्थिक रफ्तार 2027 तक रहेगी तेज, 11 फीसदी तक पहुंच सकती है विकास दरड्यून: पार्ट थ्री का फाइनल ट्रेलर रिलीज, पॉल अत्रेइदेस और चानी के बीच भयंकर टकराव की झलकयमन से मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद रियाद में धमाके, उधर होर्मुज में तेल टैंकर में लगी आगफर्रुखाबाद के इस प्राचीन शिव मंदिर में एक साथ होते हैं बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, महाभारत काल से जुड़ा है गहरा इतिहासअमेरिकी डॉलर की मजबूती से टूटा यूरो, तकनीकी स्तर पर 1.1113 का अहम सपोर्ट क्षेत्र बेहद संवेदनशीलऐप्पल ने जारी किया iOS 27.2 अपडेट, सिरी एआई में नई भाषाएं और सुरक्षा पैच शामिलजीमेल और ड्राइव के डेटा से गूगल दिखा रहा विज्ञापन, ऐसे रोकें
36वें जन्मदिन पर मोहम्मद शमी की फर्श से अर्श तक की दास्तान, कोलकाता से 900 विकेटों का सफरक्रिकेट
3 सित॰ 2026, 10:28 am (55 दिन पहले)· 1

36वें जन्मदिन पर मोहम्मद शमी की फर्श से अर्श तक की दास्तान, कोलकाता से 900 विकेटों का सफर

36वें जन्मदिन के मौके पर भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने दलीप ट्रॉफी में 5 विकेट लेकर पेशेवर क्रिकेट में 900 शिकार पूरे किए। उत्तर प्रदेश में चयन न होने के बाद कोलकाता आकर सिर पर छत न होने से लेकर सौरव गांगुली द्वारा पहचाने जाने तक, जानिए शमी के सफर की पूरी कहानी।

भारतीय तेज गेंदबाजी के मुख्य स्तंभ मोहम्मद शमी 36 वर्ष के हो चुके हैं और उन्होंने अपने जन्मदिन के अवसर पर पेशेवर क्रिकेट में 900 विकेटों का शानदार आंकड़ा पार कर लिया है। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में पले-बढ़े इस अनुभवी गेंदबाज की कहानी केवल मैदान पर हासिल की गई सफलताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शुरुआती उपेक्षा, गृह राज्य त्यागने के कठिन फैसलों और कोलकाता की गलियों में किए गए कड़े संघर्ष का एक ऐसा उदाहरण है जिसने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। जिस तरह एक पुराना डीजल इंजन धीरे-धीरे गर्म होकर अपनी पूरी गति हासिल करता है, ठीक उसी तरह 36 की उम्र में भी शमी का प्रदर्शन अधिक पैना और प्रभावशाली नजर आ रहा है।

अमरोहा के मैदानों से उत्तर प्रदेश की उपेक्षा और बंगाल की ओर कदम

मोहम्मद शमी की क्रिकेट यात्रा की शुरुआत उत्तर प्रदेश के अमरोहा से हुई थी। उन्होंने अपनी शुरुआती गेंदबाजी का अभ्यास मुरादाबाद के क्रिकेट मैदानों पर किया, जहां वे स्थानीय लड़कों के साथ मिलकर खेल की बारीकियों को सीखते थे। हालांकि, जब उन्होंने राज्य स्तरीय क्रिकेट में कदम रखने की कोशिश की, तो उत्तर प्रदेश की अंडर-19 टीम के चयनकर्ताओं ने उनकी क्षमता को पहचानने से इनकार कर दिया और उन्हें दरकिनार कर दिया। इस उपेक्षा के बावजूद शमी ने हार स्वीकार नहीं की और क्रिकेट में करियर बनाने का अपना संकल्प बनाए रखा।

ये भी पढ़ें

राज्य टीम में जगह न मिलने के बाद शमी ने वर्ष 2005 के आसपास अपना घर, परिवार, गांव और राज्य छोड़कर कोलकाता का रुख करने का बड़ा निर्णय लिया। अपने गृह राज्य को छोड़कर परदेस जाना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए एक बेहद कठिन और जोखिम भरा कदम होता है। लेकिन शमी ने अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए यह बलिदान स्वीकार किया। उन्होंने बंगाल के घरेलू क्रिकेट सर्किट में कड़ी मेहनत की और अपनी धारदार गेंदबाजी के बल पर धीरे-धीरे अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी।

पुरानी गेंदों से प्रयोग और रिवर्स स्विंग की कला पर महारत

मोहम्मद शमी की गेंदबाजी की सबसे बड़ी ताकत उनकी सटीक लाइन-लेंथ और दोनों तरफ गेंद को तेजी से स्विंग कराने की क्षमता मानी जाती है। विशेष रूप से रिवर्स स्विंग को उन्होंने अपना सबसे मारक हथियार बनाया है, जिसकी नींव उन्होंने मुरादाबाद के अभ्यास मैदानों पर रखी थी। जब मुरादाबाद में प्रैक्टिस मैच खत्म हो जाते थे, तो बाकी खिलाड़ी पुरानी और घिसी हुई गेंदों को बेकार समझकर मैदान के किनारे फेंक देते थे।

शमी मैच समाप्त होने के बाद उन्हीं उपेक्षित और पुरानी गेंदों को इकट्ठा करते थे और उनसे घंटों अभ्यास किया करते थे। वे गेंद की एक तरफ की चमक को बनाए रखते थे और दूसरी तरफ के रफ पैच का इस्तेमाल करके हवा में गेंद को अंदर की तरफ लाने के विज्ञान को समझने की कोशिश करते थे। इस लीक से हटकर की गई मेहनत के कारण ही वे आगे चलकर रिवर्स स्विंग के विशेषज्ञ बने, जिससे आज दुनिया के बड़े से बड़े बल्लेबाज भी खौफ खाते हैं।

कोलकाता में बेघर रहने का संघर्ष और सौरव गांगुली से मुलाकात का टर्निंग पॉइंट

वर्ष 2005 के आसपास जब मोहम्मद शमी कोलकाता पहुंचे, तो उनके सामने जीवन यापन की बेहद कठिन परिस्थितियां थीं। शुरुआती दिनों में उनके पास सिर छुपाने के लिए कोई पक्की छत भी नहीं थी। इस बेहद मुश्किल दौर में क्लब क्रिकेट खेलते समय उनके गेंदबाजी कौशल ने देवव्रत दास को प्रभावित किया। शमी की प्रतिभा को देखकर देवव्रत दास ने उनके रहने और भोजन का जरूरी बंदोबस्त कराया, जिससे उन्हें अपने खेल पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली।

इसके बाद शमी जब मोहन बगान क्रिकेट क्लब से जुड़े, तो उनके करियर में एक नया और निर्णायक मोड़ आया। ईडन गार्डंस के ऐतिहासिक मैदान पर उन्हें पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली को नेट सेशन में गेंदबाजी करने का अवसर प्राप्त हुआ। शमी की रफ्तार, नियंत्रण और स्विंग से सौरव गांगुली बेहद प्रभावित हुए। गांगुली ने बिना समय गंवाए बंगाल के चयनकर्ताओं से बात की और उन्हें रणजी ट्रॉफी की बंगाल टीम में शामिल करने की सिफारिश की। इस एक मौके ने शमी के लिए प्रथम श्रेणी और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के दरवाजे खोल दिए।

दलीप ट्रॉफी में 5 विकेट, 900 शिकार का आंकड़ा और भारतीय टीम में वापसी की राह

अपने 36वें जन्मदिन से ठीक पहले मोहम्मद शमी ने दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल मुकाबले में ईस्ट जोन की ओर से खेलते हुए अपनी श्रेष्ठता फिर सिद्ध की। उन्होंने मैच की दोनों पारियों को मिलाकर कुल पांच विकेट चटकाए। इसके साथ ही उन्होंने एक शानदार लो-फ्लोर कैच पकड़कर मैदान पर अपनी फुर्ती का लोहा मनवाया और पेशेवर क्रिकेट में 900 विकेट पूरे करने की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।

वर्तमान समय में शमी राष्ट्रीय टीम से बाहर चल रहे हैं और चयनकर्ताओं द्वारा उनकी फिटनेस को लेकर चिंताएं जताई गई हैं। लेकिन 36 वर्ष की उम्र में भी शमी लाल गेंद से घरेलू क्रिकेट में लगातार गेंदबाजी कर रहे हैं और हार मानने को तैयार नहीं हैं। विश्व कप के इतिहास में भारत के लिए सबसे ज्यादा बार 5 विकेट लेने का रिकॉर्ड अपने नाम रखने वाले शमी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी के लिए पुरजोर प्रयास कर रहे हैं। बेकार गेंदों से अपनी गेंदबाजी तराशने वाला अमरोहा का यह लड़का आज भारतीय क्रिकेट का मुख्य स्तंभ बन चुका है।

सवाल-जवाब

मोहम्मद शमी ने अपने 36वें जन्मदिन पर क्या उपलब्धि हासिल की?
उन्होंने दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल मुकाबले में 5 विकेट चटकाकर पेशेवर क्रिकेट में 900 विकेट पूरे किए।
उत्तर प्रदेश छोड़कर मोहम्मद शमी कोलकाता क्यों गए थे?
उत्तर प्रदेश की अंडर-19 टीम में चयन न होने के बाद वे वर्ष 2005 के आसपास क्रिकेट में बेहतर मौकों की तलाश में कोलकाता चले गए थे।
मोहम्मद शमी ने रिवर्स स्विंग की कला कैसे सीखी?
मुरादाबाद के मैदानों पर मैच खत्म होने के बाद अन्य खिलाड़ियों द्वारा फेंकी गई पुरानी गेंदों से घंटों अभ्यास करके उन्होंने रिवर्स स्विंग में महारत हासिल की।
सौरव गांगुली ने शमी के करियर में क्या भूमिका निभाई?
ईडन गार्डंस में नेट सेशन के दौरान शमी की गेंदबाजी से प्रभावित होकर सौरव गांगुली ने बंगाल के चयनकर्ताओं से बात की और उन्हें बंगाल की रणजी टीम में शामिल करवाया।
विश्व कप क्रिकेट में मोहम्मद शमी के नाम कौन सा प्रमुख रिकॉर्ड है?
मोहम्मद शमी विश्व कप इतिहास में भारत की ओर से सबसे ज्यादा बार 5 विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp