महिला टी20 एशिया कप के खिताबी मुकाबले के बाद पुरस्कार वितरण समारोह में एक बड़ा कूटनीतिक और खेल विवाद सामने आया है। भारत और श्रीलंका के बीच खेले गए इस फाइनल मैच में एशियन क्रिकेट काउंसिल (एसीसी) के प्रमुख मोहसिन नकवी बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे। खिताबी भिड़ंत से पूर्व ही भारतीय क्रिकेट बोर्ड की तरफ से स्पष्ट संदेश दिया जा चुका था कि यदि भारतीय टीम मैच जीतती है, तो खिलाड़ी उनके हाथों से विजेता ट्रॉफी स्वीकार नहीं करेंगे।
मैदान पर भारत की जीत और समारोह में बहिष्कार
फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने शानदार खेल दिखाते हुए श्रीलंका को 72 रनों के अंतर से पराजित किया और रिकॉर्ड आठवीं बार इस प्रतिष्ठित खिताब को अपनी झोली में डाला। मैच की समाप्ति के पश्चात जब प्रजेंटेशन सेरेमनी शुरू हुई, तब उपविजेता श्रीलंका की टीम को रनर-अप मेडल और प्राइज मनी का चेक प्रदान किया गया। इसके तुरंत बाद विजेता भारतीय टीम को मंच पर आमंत्रित किया गया, परंतु भारतीय खिलाड़ियों ने मंच पर जाने से साफ इनकार कर दिया। इसका मुख्य कारण मंच पर मोहसिन नकवी की उपस्थिति थी, जो विजेता को ट्रॉफी सौंपने के लिए तैयार खड़े थे। काफी देर तक चले इंतजार और गतिरोध के बाद नकवी बिना ट्रॉफी सौंपे ही स्टेडियम परिसर से बाहर चले गए, जिसके चलते भारतीय टीम बिना ट्रॉफी के ही रही।
एक ही साल में दूसरी बार ट्रॉफी विवाद का सामना
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मंच पर मोहसिन नकवी के लिए इस तरह का बहिष्कार एक ही वर्ष के भीतर दूसरी बार देखा गया है। इससे पहले मेंस एशिया कप 2025 के दौरान भी भारतीय टीम ने मोहसिन नकवी के हाथों से ट्रॉफी लेने से स्पष्ट मना कर दिया था। किसी महाद्वीपीय क्रिकेट परिषद के मौजूदा प्रमुख के लिए इस प्रकार का बहिष्कार काफी असहज स्थिति पैदा करता है। इसके बावजूद पड़ोसी मुल्क में कुछ हलकों द्वारा इस घटनाक्रम को एक अलग रंग देने की कोशिश की गई और यह दावा किया गया कि नकवी झुके नहीं, जबकि भारतीय पक्ष का यह रवैया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी दृढ़ स्थिति और प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाने के लिए था।
मोहम्मद यूसुफ की सोशल मीडिया टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर मोहम्मद यूसुफ ने सोशल मीडिया मंच पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। अपने संदेश में उन्होंने मोहसिन नकवी के रुख का समर्थन किया और भारतीय पक्ष पर तीखे आरोप लगाते हुए टिप्पणियां कीं। हालांकि, इस तरह की बयानबाजी को खेल जगत में मैदान पर मिली हार के बाद अपनी ही पीठ थपथपाने और निराशा व्यक्त करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
अतीत के विवाद और साख पर उठते सवाल
मोहम्मद यूसुफ के इस बयान के बाद उनके अपने पुराने व्यक्तिगत और खेल करियर के विवाद भी एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। खेल हलकों में यह याद दिलाया जा रहा है कि किस प्रकार कप्तानी की चाहत के दौर में उनके करियर में बड़े बदलाव आए थे। इस्लाम अपनाने से पहले उनका नाम यूसुफ योहाना था और वे ईसाई धर्म के अनुयायी थे। आलोचकों का कहना है कि जब एक खिलाड़ी का अपना अतीत पहचान और प्राथमिकताओं के बदलाव से जुड़ा रहा हो, तब खेल के मैदान पर उपजे कूटनीतिक मसलों पर उनकी सोशल मीडिया टिप्पणियां केवल हताशा को ही दर्शाती हैं।



















