आधुनिक समय के क्रिकेट में गेंदबाजों के सामने केवल विकेट चटकाने की ही नहीं, बल्कि रनों पर लगाम कसने की भी बड़ी चुनौती रहती है। मौजूदा दौर के बल्लेबाज मैदान के चारों तरफ बड़े शॉट खेलने के लिए जाने जाते हैं। यही वजह है कि खेल के इस बदलते स्वरूप में गेंदबाजों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं, लेकिन खेल के इतिहास में एक ऐसा दौर भी था जब गेंदबाजों का पूरी तरह से दबदबा हुआ करता था।
बापू नाडकर्णी का ऐतिहासिक स्पेल
भारतीय क्रिकेट के इतिहास में बापू नाडकर्णी का नाम एक ऐसे रिकॉर्ड के साथ जुड़ा है जिसका टूटना अब लगभग असंभव नजर आता है। उन्होंने एक टेस्ट मैच के दौरान लगातार 21 मेडन ओवर फेंकने का अद्भुत कारनामा किया था। यह मुकाबला साल 1964 में भारत और इंग्लैंड के बीच खेला गया था। उस मैच में बापू ने कुल 33 ओवर गेंदबाजी की थी, जिसमें से 27 ओवर मेडन रहे और उनमें से 21 ओवर पूरी तरह लगातार थे। इस दौरान उन्होंने अपनी कसी हुई गेंदबाजी से मात्र 5 रन दिए थे। हालांकि, इस बेजोड़ और कड़े अनुशासन वाले स्पेल के बावजूद उन्हें एक भी सफलता यानी विकेट नहीं मिल पाया था।
शानदार गेंदबाजी और ऑलराउंड खेल
बापू नाडकर्णी भारत के एक अत्यंत प्रतिभाशाली बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज थे। उनका जन्म साल 1933 में महाराष्ट्र के नासिक शहर में हुआ था। घरेलू स्तर पर उन्होंने महाराष्ट्र और मुंबई दोनों ही टीमों का प्रतिनिधित्व किया। भारतीय राष्ट्रीय टीम के लिए उन्होंने साल 1955 में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने करियर की शुरुआत की थी। अपनी सटीक लाइन और लेंथ के अलावा बापू अपनी उपयोगी बल्लेबाजी के लिए भी खासे जाने जाते थे।
अंतरराष्ट्रीय और घरेलू करियर के आंकड़े
भारतीय टीम के लिए खेलते हुए बापू ने अपने करियर में कुल 41 टेस्ट मैचों में शिरकत की। इन मुकाबलों में उन्होंने गेंदबाजी करते हुए कुल 88 विकेट अपने नाम किए। टेस्ट क्रिकेट में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 43 रन देकर 6 विकेट हासिल करना रहा था। उन्होंने चार मौकों पर पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लिए, जबकि एक बार मैच में 10 विकेट लेने का कारनामा भी किया। इसके अलावा बल्लेबाजी में उन्होंने 1414 रन बनाए, जिसमें 7 अर्धशतक और 1 शतक शामिल था। प्रथम श्रेणी क्रिकेट की बात करें तो बापू ने 500 विकेट लेने के साथ 8880 रन भी बनाए, जिसमें उनके नाम 14 शतक और 46 अर्धशतक दर्ज हैं।



















