विश्व क्रिकेट में भारतीय टीम के बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद व्यवस्था से जुड़ी कुछ बारीकियों पर सवाल उठ रहे हैं। पूर्व दिग्गज सुनील गावस्कर ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई से अपील की है कि वह अपनी क्रिकेट सलाहकार समिति के कामकाज और प्रभाव क्षेत्र पर दोबारा गंभीरता से विचार करे। उनका मानना है कि वर्तमान दौर में क्रिकेट के बदलते स्वरूप को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर इस तरह के सलाहकार तंत्र का मजबूत और दूरगामी होना बेहद जरूरी है।
गावस्कर का साफ तौर पर कहना है कि सलाहकार समिति के अधिकार और जिम्मेदारियां केवल सीमित दायरों तक नहीं रहनी चाहिए। इस पैनल को विस्तार देकर देश के महानतम पूर्व क्रिकेटरों के विशाल अनुभव का फायदा भारतीय क्रिकेट के विकास में उठाया जाना चाहिए। यह सुझाव दलीप ट्रॉफी के फाइनल मैच में ईस्ट जोन की रणनीति पर नाराजगी जताने के बाद सामने आया है, जहां ईशान किशन की अगुवाई वाली टीम ने पहली पारी की बढ़त के आधार पर ट्रॉफी जीत ली थी। गावस्कर पहले भी पहली पारी की बढ़त वाले नियम को लेकर अपनी असहमति जाहिर कर चुके हैं।
वर्तमान समिति का स्वरूप और जिम्मेदारियां
बीसीसीआई की क्रिकेट सलाहकार समिति में साल 2022 के दौरान नियुक्तियां की गई थीं। उस समय इस समिति में अशोक मल्होत्रा, जतिन परांजपे और सुलक्षण नाइक को शामिल किया गया था। इस पैनल का मुख्य कार्य राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच और चयनकर्ताओं की नियुक्ति करना तथा उनके साक्षात्कार आयोजित करना रहा है। हालांकि, मौजूदा समय में इस बात को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि यह समिति अभी भी अपने पुराने स्वरूप में सक्रिय है या इसे समाप्त कर दिया गया है।
दायरा बढ़ाकर घरेलू व अंतरराष्ट्रीय मामलों को जोड़ने का प्रस्ताव
गावस्कर की राय है कि बोर्ड को इस समिति का अधिकार क्षेत्र केवल कोच या चयनकर्ता चुनने तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसके बजाय घरेलू टूर्नामेंटों और अंतरराष्ट्रीय दौरों के पूरे कार्यक्रम जैसे खेल से जुड़े अहम मुद्दों को भी इसके तहत लाया जाना चाहिए। उन्होंने डेली मेल में अपने कॉलम के जरिए यह बात उठाई कि बोर्ड में चयन समितियों और सलाहकार समिति के अलावा अन्य कोई विशेष समितियां नहीं बची हैं, इसलिए अब समय आ गया है कि इस समिति के संक्षिप्त दायरे को बड़ा रूप दिया जाए।
महान दिग्गजों को पैनल में लाने की अपील
सुनील गावस्कर चाहते हैं कि इस समिति में सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली जैसे अनुभवी चेहरों को जिम्मेदारी दी जाए। अपने विचार रखते हुए उन्होंने लिखा,
"सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली, रवि शास्त्री, अनिल कुंबले, हरभजन सिंह, वीरेंद्र सहवाग जैसे नामों के बारे में क्या खयाल है, कुछ ही नाम गिनाने के लिए? अध्यक्ष और सचिव भी वहीं होंगे."
गावस्कर का विश्वास है कि तेंदुलकर और द्रविड़ जैसे दिग्गजों को कोचिंग और डेवलपमेंट ढांचे से जुड़ी अहम बैठकों में शामिल करने से पूरी व्यवस्था को बेहतर विशेषज्ञता, वजन और रणनीतिक मजबूती हासिल होगी।















