चेन्नई में होने वाले दलीप ट्रॉफी के पांच दिवसीय फाइनल मुकाबले के समाप्त होते ही भारतीय खिलाड़ियों को सीधे टी-20 क्रिकेट की तेज रफ्तार में लौटना होगा। इस व्यस्त और कठिन कार्यक्रम का सामना करने वाले प्रमुख खिलाड़ियों में ईशान किशन और तिलक वर्मा के नाम शामिल हैं, जिन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ घरेलू श्रृंखला में भाग लेना है। दलीप ट्रॉफी 2026 का यह खिताबी मुकाबला ईस्ट जोन और साउथ जोन के बीच खेला जाना है, जिसकी कमान क्रमशः ईशान किशन और तिलक वर्मा संभाल रहे हैं। इस अनोखे बदलाव को लेकर दोनों ने अपनी स्पष्ट राय रखी है।
13 सितंबर को दिल्ली में होगी भिड़ंत
दलीप ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले के ठीक बाद खिलाड़ियों को बिना किसी लंबी छुट्टी के दिल्ली की यात्रा करनी होगी। ईस्ट जोन के उप-कप्तान वैभव सूर्यवंशी को भी इसी कड़े शेड्यूल से गुजरना होगा। फाइनल मैच के खत्म होने और अफगानिस्तान के खिलाफ श्रृंखला के आगाज के बीच मात्र तीन दिनों का अंतर है। भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की इस टी-20 श्रृंखला का पहला मुकाबला 13 सितंबर को खेला जाएगा। इसके लिए चयनकर्ताओं ने पहले ही टीम इंडिया के स्क्वॉड की घोषणा कर दी है, जिसमें इन युवा और अनुभवी खिलाड़ियों को शामिल किया गया है।
लाल गेंद से सफेद गेंद के फॉर्मेट में ढलने पर ईशान किशन का बयान
चेपॉक में दलीप ट्रॉफी के फाइनल से पहले हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ईशान किशन ने स्पष्ट किया कि एक पेशेवर क्रिकेटर के रूप में सबसे महत्वपूर्ण बात यह पहचानना है कि मैदान पर कौन सा प्रारूप खेला जा रहा है। उन्होंने माना कि जब कोई खिलाड़ी सीधे बहुदिवसीय लाल गेंद के मैच से निकलकर टी-20 जैसी आक्रामक शैली में उतरता है, जहां पहली ही गेंद से कड़े प्रहार करने होते हैं, तो यह मानसिक और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो जाता है। अपनी घरेलू टीम से इतर राष्ट्रीय टीम में पहुंचकर अलग जिम्मेदारी संभालना आसान नहीं होता।
ईशान किशन ने आगे कहा कि इस तरह के कड़े और व्यस्त शेड्यूल की जानकारी पहले से होने पर बहाने बनाने का कोई औचित्य नहीं बचता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि असफलता के लिए रोना रोने के बजाय खिलाड़ियों को आने वाली परिस्थितियों के लिए पहले से मानसिक रूप से खुद को मजबूत रखना चाहिए। दलीप ट्रॉफी का समापन होते ही टी-20 के लिए रणनीति पूरी तरह बदल जाती है। हालांकि, पहले मैच से पहले मिलने वाले दो दिन के अभ्यास सत्र को उन्होंने इस बदलाव के लिए पर्याप्त बताया है।
तिलक वर्मा का दृष्टिकोण और तैयारी
दूसरी तरफ, साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा का मानना है कि पिछले चार महीनों के दौरान विभिन्न परिस्थितियों में खेलने के अनुभव ने उन्हें किसी भी प्रारूप के अनुकूल ढलने में सक्षम बना दिया है। घरेलू क्रिकेट के अलग-अलग माहौल में खेलने से मानसिक दृढ़ता बढ़ती है। उन्होंने स्वीकार किया कि पांच दिन के लंबे मुकाबले के तुरंत बाद टी-20 टीम का हिस्सा बनना कठिन जरूर है, लेकिन दिल्ली पहुंचकर मिलने वाला समय इस काम को संभव बना देगा। तिलक का कहना है कि उन्हें अच्छी तरह पता है कि लगातार बदलते मुकाबलों के बीच अपने दिमाग को कैसे शांत और केंद्रित रखना है।



















