भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी अपने करियर के एक अहम पड़ाव पर पहुंच चुके हैं और वह अपना 100वां प्रथम श्रेणी मैच खेलने की तैयारी कर रहे हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि से ठीक पहले उनके भीतर मौजूद मैदान पर उतरने का उत्साह और जबरदस्त जज्बा साफ़ तौर पर दिखाई दे रहा है। ईस्ट जोन के कप्तान इशान किशन ने इस बात पर जोर दिया कि शमी की आंखें अब भी टीम इंडिया में अपनी जगह दोबारा हासिल करने के सपने से चमकती हैं।
सेंट्रल जोन के खिलाफ खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले में अपनी बेहतरीन गेंदबाजी का जादू बिखेरते हुए मोहम्मद शमी ने पांच विकेट चटकाए थे। उनके इस शानदार प्रदर्शन के दम पर ईस्ट जोन ने पूरे 13 साल के लम्बे अंतराल के बाद दलीप ट्रॉफी के फाइनल में अपनी जगह पक्की की। खिताबी मुकाबले में अब उनकी टीम का सामना साउथ जोन के साथ होना तय माना जा रहा है। मैच से पहले आयोजित प्रेस वार्ता में इशान किशन ने खुलकर अपनी बात रखी।
इशान किशन ने मोहम्मद शमी की तारीफ करते हुए कहा कि वह खेल जगत के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों में गिने जाते हैं और वह इस खेल के असली लीजेंड हैं। जब से उन्होंने बंगाल की तरफ से क्रिकेट खेलना शुरू किया है, तब से उनका रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है और वह लगातार अपनी टीम के लिए विकेट चटकाते आ रहे हैं। वह मैदान पर अपना सौ प्रतिशत योगदान देते हैं और भारत के लिए खेलते हुए भी उन्होंने हमेशा उम्दा प्रदर्शन करके दिखाया है।
उम्र के पड़ाव पर बात करते हुए कप्तान ने स्पष्ट किया कि उम्र सिर्फ एक नंबर से ज्यादा कुछ नहीं है और अगर कोई खिलाड़ी कड़ी मेहनत करने से पीछे नहीं हटता, तो उसका वर्ष मायने नहीं रखता। इशान किशन ने बताया कि वह शमी के अंदर जीत की वही पुरानी ललक और आग आज भी साफ देख सकते हैं। उनका शानदार प्रदर्शन पूरी टीम के लिए एक प्रेरणा है और ड्रेसिंग रूम में उनकी मौजूदगी साथी खिलाड़ियों का हौसला कई गुना बढ़ा देती है।
मौजूदा समय में मोहम्मद शमी 36 वर्ष के हो चुके हैं और उनके करियर का यह चरण काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन इस उम्र में भी वह अपनी फिटनेस और खेल के प्रति समर्पण से सबको हैरान कर रहे हैं। इशान किशन ने एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए बताया कि सेंट्रल जोन के खिलाफ मैच के दौरान शमी ने खुद आगे बढ़कर गेंदबाजी में कुछ अतिरिक्त ओवर डालने की मांग की थी। एक कप्तान के तौर पर इस तरह का जुझारू रवैया देखना बेहद सुखद होता है और इससे टीम के नेतृत्व का आत्मविश्वास भी मजबूत होता है।
मोहम्मद शमी ने भारत के लिए अपना आखिरी मुकाबला चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ दुबई के मैदान पर खेला था। इसके बाद से ही वह राष्ट्रीय टीम में अपनी वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। चयन को लेकर वह पहले भी कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि टीम में चुनना उनके हाथ में नहीं है, बल्कि उनका काम सिर्फ मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देना है। इस समय वह लाल और सफेद दोनों ही तरह की गेंदों से लगातार बेहतरीन गेंदबाजी का मुशायरा पेश कर रहे हैं।
दलीप ट्रॉफी के इस फाइनल मुकाबले में उनकी नजरें एक बार फिर अपनी खतरनाक गेंदबाजी के दम पर ईस्ट जोन को खिताबी जीत दिलाने पर टिकी होंगी। ईस्ट जोन की टीम पूरे 14 साल के लम्बे इंतजार के बाद इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का फाइनल मैच खेलने के लिए मैदान पर उतरेगी। शमी का यह अनुभव और उनका जोश टीम के लिए सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकता है।
दूसरी तरफ, फाइनल मुकाबले में ईस्ट जोन की चुनौती का सामना करने के लिए तैयार साउथ जोन की टीम भी पूरी तरह सतर्क है। साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा ने भी मोहम्मद शमी की गेंदबाजी कौशल की जमकर सराहना की, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि उनकी टीम इस अनुभवी और चालाक तेज गेंदबाज से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। तिलक वर्मा ने कहा कि शमी के खिलाफ खेलना एक कड़ा इम्तिहान होगा और उन्होंने सेमीफाइनल मुकाबले में देखा था कि किस तरह इस गेंदबाज ने अपनी गेंदों के जाल में बल्लेबाजों को फंसाया था।



















