दक्षिण अफ्रीका की धरती पर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच ऑस्ट्रेलियाई टीम जब गहरे संकट में घिरी नजर आ रही थी, तब बाएं हाथ के बल्लेबाज मैट रेनशॉ ने असाधारण जज्बा दिखाते हुए अपनी टीम को मजबूत धरातल पर खड़ा कर दिया. डरबन के मैदान पर मेजबान टीम के धारदार आक्रमण के सामने जहां मेहमान टीम के दिग्गज बल्लेबाज एक के बाद एक घुटने टेक रहे थे, वहीं रेनशॉ ने क्रीज पर खूंटा गाड़ दिया. अंतरराष्ट्रीय टेस्ट प्रारूप में वापसी की तलाश में जुटे इस बल्लेबाज ने 190 रनों की ऐसी जुझारू पारी खेली, जो लंबे समय तक टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में याद रखी जाएगी.
शुरुआती झटकों से बेपटरी हुई कंगारू बल्लेबाजी
टॉस के बाद जब मुकाबला शुरू हुआ तो दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों ने शुरुआत से ही मेहमान टीम पर कड़ा शिकंजा कस दिया. ऑस्ट्रेलियाई पारी की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही और टीम के स्कोरबोर्ड पर जब केवल 84 रन ही जुड़े थे, तब तक उसके शीर्ष चार प्रमुख बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे. निक मैडिनसन खाता खोलने में भी नाकाम रहे और शून्य पर चलते बने. मध्यक्रम में आक्रामक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले ट्रेविस हेड महज 9 रन बनाकर पवेलियन लौटे. भरोसेमंद माने जाने वाले मार्नस लाबुशेन ने कुछ देर संघर्ष करते हुए 37 रनों का योगदान दिया, जबकि पूर्व कप्तान स्टीव स्मिथ 25 रन बनाकर आउट हो गए. थोड़ी ही देर बाद जब आधी ऑस्ट्रेलियाई टीम 124 रनों के कुल योग पर पवेलियन की राह पकड़ चुकी थी, तब ऐसा लग रहा था कि दक्षिण अफ्रीकी तेज गेंदबाज पहली पारी में ही मेहमान टीम का पुलिंदा बेहद सस्ते में बांध देंगे.
397 गेंदों का धैर्य और 190 रनों का विशाल संकलन
शीर्ष क्रम के बिखर जाने के बाद मैट रेनशॉ ने मोर्चा संभाला और दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों के हर प्रहार को अपने संयमित डिफेंस से बेअसर कर दिया. रेनशॉ ने क्रीज पर टिकने को प्राथमिकता दी और गेंद की मेरिट के अनुसार ही शॉट खेलने का फैसला किया. एक छोर पर लगातार गिरते विकेटों के दबाव को दरकिनार करते हुए उन्होंने 397 गेंदों का सामना किया और 190 रनों की बेमिसाल मैराथन पारी को अंजाम दिया. अपनी इस लंबी पारी के दौरान उन्होंने 21 आकर्षक चौके और 1 गगनचुंबी छक्का जड़ा. हालांकि उनका स्ट्राइक रेट 47.86 का रहा, लेकिन मैच की परिस्थितियों, मुश्किल पिच और टीम की नाजुक हालत को देखते हुए यह पारी किसी दोहरे शतक से कम प्रभावशाली साबित नहीं हुई. साल 2017 के बाद से टेस्ट शतक के इंतजार और लगातार तीन वर्षों तक राष्ट्रीय टेस्ट एकादश से बाहर रहने के दर्द को उन्होंने इस जुझारू दस्तक से धो डाला.
निचले क्रम के साथ उपयोगी साझेदारियां और 390 का स्कोर
शीर्ष क्रम से मजबूत साथ न मिलने के बावजूद रेनशॉ ने निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ मिलकर पारी को संभाला. विकेटकीपर बल्लेबाज एलेक्स कैरी ने 14 रन का योगदान दिया, जबकि ब्यू वेबस्टर केवल 4 रन ही जोड़ सके. इसके बाद कप्तान पैट कमिंस ने रेनशॉ का बखूबी साथ निभाते हुए 98 गेंदों में 43 रनों की बेहद कीमती पारी खेली, जिससे स्कोरबोर्ड की गति बनी रही. मिचेल स्टार्क ने 6 रन बनाए, जबकि पुछल्ले बल्लेबाज नाथन लियोन ने संयम का परिचय देते हुए 92 गेंदों पर 27 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेलकर टीम को सहारा दिया. जोश हेजलवुड 5 रन बनाकर नाबाद लौटे. निचले क्रम के इस जुझारू सहयोग और रेनशॉ के निरंतर प्रयास के दम पर ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी में 137.2 ओवर बल्लेबाजी करते हुए 390 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया.
दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों की कड़ी आजमाइश
दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाजी आक्रमण ने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को दबाव में लाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. लंबे कद के तेज गेंदबाज मार्को जानसेन ने कसी हुई लाइन पर गेंद डालते हुए 31 ओवरों में 68 रन देकर 3 सफलताएं हासिल कीं. वियान मुल्डर मेजबान टीम के सबसे सफल गेंदबाज साबित हुए, जिन्होंने 27 ओवरों में 68 रन देकर 4 बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाया. तेज गेंदबाज एनरिक नॉर्टजे ने 28 ओवरों में 88 रन खर्च करते हुए 2 विकेट चटकाए. स्पिन विभाग में साइमन हार्मर ने 28.2 ओवरों में 68 रन देकर 1 विकेट झटका, जबकि प्रमुख स्पिनर केशव महाराज और एडेन मार्कम को गेंदबाजी में कोई विकेट हाथ नहीं लगा. गेंदबाजों की इस चौकड़ी ने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को परेशान जरूर किया, लेकिन मैट रेनशॉ का अडिग डिफेंस उनकी हर योजना पर भारी पड़ा.
लंबे अंतराल के बाद शानदार वापसी और नया मोड़
साल 2017 के बाद टेस्ट शतकों के सूखे को समाप्त करते हुए रेनशॉ ने जिस परिपक्वता का परिचय दिया है, वह उनके करियर को एक नई दिशा दे सकता है. तीन साल तक टेस्ट टीम से दूर रहने के बाद विदेशी परिस्थितियों में मौजूदा विश्व टेस्ट चैंपियन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ऐसी पारी खेलना मानसिक मजबूती को दर्शाता है. डरबन की पिच पर खेली गई यह 190 रनों की पारी न सिर्फ ऑस्ट्रेलिया को मैच में आगे ले आई, बल्कि रेनशॉ के करियर के लिए भी एक बड़ा टर्निंग पॉइंट बनकर सामने आई है.


















