रांची के मैदान पर नौ अक्टूबर की शाम खेले गए टी-20 मुकाबले में भले ही भारतीय टीम को शिकस्त का सामना करना पड़ा हो, लेकिन मुकाबले के दौरान तेज गेंदबाज मयंक यादव की असाधारण गति ने क्रिकेट पंडितों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। चोट के लंबे अंतराल के बाद मैदान पर वापसी कर रहे इस युवा तेज गेंदबाज ने कैरेबियाई बल्लेबाजी क्रम के शीर्ष बल्लेबाजों को अपनी तेज गति से जमकर परेशान किया। अधिकांश समय भारतीय तेज आक्रमण 135 किमी प्रति घंटे के आसपास की गति पर निर्भर रहा है, मगर अब टीम में 150 किमी प्रति घंटे की वास्तविक रफ्तार से गेंद फेंकने वाले आक्रामक गेंदबाज उभर रहे हैं, जिनमें मयंक सबसे आगे नजर आते हैं। इस मुकाबले में भी उन्होंने निरंतर 140 किमी प्रति घंटे से ऊपर की रफ्तार बनाए रखी।
शीर्ष क्रम पर बोला धावा और चटकाए तीन अहम विकेट
इस हाई स्कोरिंग टी-20 मुकाबले में भारतीय गेंदबाजों के लिए रन रोकना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था, लेकिन मयंक यादव अपनी टीम की ओर से सबसे असरदार साबित हुए। उन्होंने अपने तीन ओवरों के कोटे में 36 रन खर्च किए और वेस्टइंडीज के तीन प्रमुख बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाया। उनकी सटीक लाइन और आक्रामक गति के चलते विपक्षी टीम के शीर्ष क्रम को शुरुआती ओवरों में खुलकर खेलने का मौका नहीं मिला। अन्य गेंदबाजों के महंगे साबित होने के बावजूद मयंक ने अपनी गति से मैच में भारत को लगातार मुकाबले में बनाए रखने की पूरी कोशिश की।
गौतम गंभीर ने गति का पूरा इस्तेमाल करने की दी सलाह
मैच के बाद मुख्य कोच गौतम गंभीर ने मयंक यादव के जुझारू प्रदर्शन की सराहना की। गंभीर का मानना है कि एक गेंदबाज को अपनी स्वाभाविक ताकत के अनुसार ही मैदान पर उतरना चाहिए। उन्होंने कहा, "जब आप तेज गेंदबाज के रूप में खेल रहे होते हैं तो आपको उस भूमिका को अच्छी तरह से निभाना चाहिए, उसने आज ऐसा किया और वह सफल रहा।" कोच के अनुसार यदि किसी गेंदबाज के पास 150 की गति है तो उसे उसी क्षमता से गेंदबाजी करनी चाहिए और अगर क्षमता 120 की है तो उसी पर टिकना चाहिए। मयंक ने अपनी भूमिका को बखूबी समझा और उस पर अमल किया।
17वें ओवर की रणनीति पर सुनील गावस्कर के सवाल
दूसरी तरफ पूर्व दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने मैच के निर्णायक पलों में टीम प्रबंधन के गेंदबाजी चयन पर गंभीर सवाल खड़े किए। गावस्कर का स्पष्ट मानना था कि अंतिम ओवरों में मयंक को गेंद न थमाना टीम के लिए भारी पड़ा। मैच के 17वें ओवर में कप्तान ने स्पिनर कुलदीप यादव को आक्रमण पर लगाया, जो दांव पूरी तरह उल्टा पड़ गया। कुलदीप ने उस ओवर में कुल 24 रन लुटा दिए, जिसमें तीन छक्के, एक चौका और एक वाइड गेंद शामिल थी। इसी महंगे ओवर ने 250 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा कर रही वेस्टइंडीज की राह आसान कर दी।
गावस्कर ने इस रणनीति का विश्लेषण करते हुए कहा, "जब एक बार विकेट मिल जाए तो विपक्षी टीम अचानक बैकफुट पर आ जाती है।" उनका तर्क था कि उस समय विपक्षी टीम को प्रति ओवर 12 से अधिक रनों की दरकार थी और मयंक की इकॉनमी भी 12 के करीब थी। ऐसे में अगर मयंक को 17वां ओवर दिया जाता और वह एक और सफलता हासिल कर लेते, तो नया बल्लेबाज आने से वेस्टइंडीज दबाव में आ सकता था। गावस्कर ने बताया कि अर्शदीप ने अपने 18वें ओवर में काफी रन दिए, लेकिन मयंक के शुरुआती झटकों को देखते हुए उन्हें आजमाया जाना चाहिए था। अंततः वेस्टइंडीज ने छह विकेट से जीत दर्ज कर पांच मैचों की इस श्रृंखला को 1-1 से बराबर कर दिया।


















