गुवाहाटी के मैदान पर भारतीय क्रिकेट टीम के लिए दूसरा वनडे मुकाबला बेहद कड़वे अनुभव में बदल गया। आगामी 2027 वनडे विश्व कप की तैयारियों के सिलसिले में टीम प्रबंधन नए और युवा चेहरों को लगातार आजमाने में जुटा है। इसी सोच के तहत जम्मू-कश्मीर के प्रतिभावान मध्यम गति के तेज गेंदबाज आकिब नबी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहली बार नीली जर्सी पहनने का अवसर दिया गया। घाटी से भारतीय राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले वह केवल तीसरे क्रिकेटर बने, जिसे लेकर उनके गृहक्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई थी। हालांकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का पहला ही इम्तिहान इस उभरते तेज गेंदबाज के लिए बेहद क्रूर साबित हुआ और उनका बहुप्रतीक्षित डेब्यू एक कभी न भूलने वाले अनचाहे रिकॉर्ड के साथ समाप्त हुआ।
वेस्टइंडीज के ओपनर का रौद्र रूप और शतकीय प्रहार
टॉस जीतकर भारतीय कप्तान ने वेस्टइंडीज को पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया, लेकिन यह रणनीति कुछ ही देर में पूरी तरह उल्टी पड़ गई। वेस्टइंडीज के सलामी बल्लेबाज जॉन कैंपबेल शुरुआत से ही बेहद आक्रामक तेवर लेकर क्रीज पर उतरे। महान कैरेबियाई धुरंधर क्रिस गेल को अपना प्रेरणास्रोत मानने वाले इस ओपनर ने उसी अंदाज में भारतीय गेंदबाजों की बखिया उधेड़नी शुरू कर दी। उन्होंने महज 65 गेंदों में अपना तूफानी शतक पूरा किया और भारतीय अनुभवहीन आक्रमण को वापसी का तनिक भी अवसर नहीं दिया। कैंपबेल ने कुल 68 गेंदों का सामना करते हुए नौ चौकों और पांच गगनचुंबी छक्कों की मदद से 101 रनों की विध्वंसक पारी खेली। इस विस्फोटक शुरुआत ने कैरेबियाई टीम के लिए एक विशाल स्कोर की ठोस नींव तैयार कर दी।
आकिब नबी ने तोड़ा करसन घावरी का 51 साल पुराना रिकॉर्ड
कैरेबियाई बल्लेबाजों के इस भीषण आक्रमण का सबसे भारी खामियाजा युवा गेंदबाज आकिब नबी को भुगतना पड़ा। गुवाहाटी की सपाट और पाटा पिच पर उनकी मध्यम गति की लाइन-लेंथ पूरी तरह बेअसर साबित हुई। बल्लेबाजों ने उनके खिलाफ खुलकर बड़े स्ट्रोक खेले और वह किसी भी मोड़ पर रनों के प्रवाह को थामने में नाकाम रहे। आकिब नबी ने अपने 8.5 ओवर के कोटे में बिना कोई सफलता हासिल किए 84 रन लुटा दिए। इस महंगे स्पेल के दौरान उनके खिलाफ नौ चौके और एक छक्का लगा।
इस निराशाजनक गेंदबाजी विश्लेषण के साथ ही आकिब नबी ने भारतीय क्रिकेट इतिहास का एक बेहद अवांछित रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा लिया। वह भारत की ओर से अपने वनडे डेब्यू पर सबसे ज्यादा रन लुटाने वाले गेंदबाज बन गए हैं। उनसे पहले यह रिकॉर्ड करसन घावरी के नाम दर्ज था, जिन्होंने 1975 में लॉर्ड्स के मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ 11 ओवर में 83 रन खर्च किए थे। इसके अतिरिक्त, कम से कम 30 गेंदें फेंकने वाले गेंदबाजों के पैमाने पर उनका 9.51 का इकॉनमी रेट भी किसी भी भारतीय गेंदबाज द्वारा डेब्यू पर दर्ज किया गया सबसे खराब इकॉनमी रेट साबित हुआ।
शाई होप को मिला जीवनदान और कप्तान ने जड़ा शतक
सलामी बल्लेबाज कैंपबेल के आउट होने के बावजूद भारतीय खेमे को राहत की सांस लेने का मौका नहीं मिला। क्रीज पर मौजूद कैरेबियाई कप्तान शाई होप और मध्यक्रम के बल्लेबाज आमिर जांगू ने रनों की गति को तनिक भी धीमा नहीं पड़ने दिया। दोनों बल्लेबाजों ने मध्य ओवरों से लेकर डेथ ओवरों तक लगभग आठ रन प्रति ओवर की औसत गति से लगातार रन बटोरे। शाई होप ने शुरुआत में बेहद सधी हुई बल्लेबाजी की और पारी को आगे बढ़ाया। जब होप 27 रन के व्यक्तिगत स्कोर पर खेल रहे थे, तब शॉर्ट मिडविकेट पर तैनात विराट कोहली के हाथों से उनका एक आसान कैच छूट गया। गेंद सीधे हाथों में आने के बावजूद छिटक गई। इस मिले जीवनदान का भरपूर लाभ उठाते हुए विंडीज कप्तान ने 94 गेंदों में आठ चौकों और तीन छक्कों की मदद से 104 रनों की बेहतरीन कप्तानी पारी खेली और भारत के लिए मुकाबले में वापसी के तमाम रास्ते पूरी तरह बंद कर दिए।
आमिर जांगू की आतिशी बल्लेबाजी और विंडीज का ऐतिहासिक स्कोर
दूसरे छोर पर मोर्चा संभाले आमिर जांगू ने भी भारतीय गेंदबाजों को कोई राहत नहीं दी। उन्होंने केवल 69 गेंदों में अपने एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय करियर का दूसरा शतक पूरा करके सनसनी मचा दी। जांगू ने 83 गेंदों की अपनी तूफानी पारी में 13 चौके और तीन छक्के जड़ते हुए कुल 114 रन बनाए। यह एकदिवसीय क्रिकेट इतिहास में पहला ऐसा मौका दर्ज हुआ जब वेस्टइंडीज के तीन अलग-अलग बल्लेबाजों ने एक ही पारी में शतक लगाने का अनोखा कारनामा अंजाम दिया। इन तीन शतकीय पारियों के दम पर वेस्टइंडीज ने निर्धारित पचास ओवरों में सात विकेट पर 405 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। यह वनडे प्रारूप में वेस्टइंडीज का 400 से अधिक का पहला स्कोर है, जिससे उन्होंने साल 2019 में इंग्लैंड के विरुद्ध बनाए गए अपने पिछले सर्वोच्च स्कोर 389 रन को पीछे छोड़ दिया।
अनुभवहीन तेज आक्रमण की विफलता और नमन धीर की चोट
भारतीय टीम की नियमित गेंदबाजी इकाई के प्रमुख सदस्य इस मुकाबले में मौजूद नहीं थे। जसप्रीत बुमराह एशियन गेम्स के कर्तव्यों के चलते उपलब्ध नहीं थे, जबकि मोहम्मद सिराज को अंतिम एकादश से बाहर रखा गया था। ऐसे में मैदान पर उतरा युवा तेज आक्रमण पूरी तरह दबाव में बिखर गया। दूसरे बदलाव के तौर पर गेंदबाजी करने आए गुरनूर बराड़ ने जरूर वापसी की कुछ कोशिशें कीं, लेकिन उनके खाते में भी 96 रन देकर दो विकेट आए। वहीं प्रसिद्ध कृष्णा ने पांच ओवर के स्पेल में 45 रन खर्च करते हुए केवल एक विकेट झटका। भारतीय टीम की मुश्किलें यहीं समाप्त नहीं हुईं। मैच के 36वें ओवर के दौरान गेंदबाजी करते समय ऑफ-स्पिन ऑलराउंडर नमन धीर के टखने में गंभीर मोच आ गई, जिसके चलते उन्हें 6.1 ओवर फेंकने के बाद मैदान छोड़कर बाहर जाना पड़ा।
स्पिनरों का संघर्ष और कुलदीप यादव के 200 विकेट
चौतरफा धुनाई के इस मुकाबले में भारतीय खेमे के लिए एकमात्र सकारात्मक पहलू अनुभवी स्पिनरों का प्रदर्शन रहा। चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव ने अपनी सूझबूझ भरी फिरकी गेंदबाजी से बल्लेबाजों पर कुछ अंकुश लगाया और 65 रन देकर दो महत्वपूर्ण विकेट चटकाए। इसके साथ ही कुलदीप यादव ने एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने 200 विकेट भी पूरे कर लिए। हालांकि बाकी गेंदबाजों की नाकामी के चलते वेस्टइंडीज एक विशाल और ऐतिहासिक योग तक पहुंचने में पूरी तरह कामयाब रहा।



















