राजस्थान के झुंझुनूं की 18 वर्षीय क्रिकेटर हैप्पी कुमारी खीचड़ के खेल सफर में एक और अहम पड़ाव जुड़ गया है। वीमेंस प्रीमियर लीग (WPL) के आगामी पांचवें सीजन के लिए गुजरात जायंट्स ने इस युवा तेज गेंदबाज पर दोबारा विश्वास जताते हुए उन्हें अपने दल में बरकरार रखा है। गुजरात जायंट्स के प्रतिनिधि अमोल रावत द्वारा भेजे गए आधिकारिक ईमेल के जरिए हैप्पी को इस फैसले की पुष्टि की गई। इससे पहले वे लीग के चौथे सीजन में भी इसी फ्रेंचाइजी का हिस्सा रही थीं। लगातार दूसरे सीजन में टीम में जगह मिलना उनके नियमित प्रदर्शन और प्रतिभा पर प्रबंधन के भरोसे को साबित करता है।
शुरुआती रुकावटें और घर के बाहर लगे नेट से अभ्यास
हैप्पी के लिए पेशेवर क्रिकेट तक पहुंचने की राह बेहद संघर्षपूर्ण रही। उन्होंने महज 10 वर्ष की उम्र में बल्ला और गेंद थामी थी। उस दौर में छोटे शहरों में लड़कियों के खेल को लेकर सामाजिक स्वीकार्यता काफी कम थी, जिसके चलते शुरुआत में उनके अपने परिवार के भीतर भी इस फैसले का विरोध हुआ। उनकी दादी इस खेल से खासी खफा थीं और मानती थीं कि लड़कियों के लिए यह उचित क्षेत्र नहीं है। ऐसी परिस्थितियों में हैप्पी के पिता राजेश खीचड़ उनके सबसे मजबूत संबल बनकर सामने आए। पिता ने बेटी की खेल प्रतिभा को पहचाना और हर कदम पर उसका हौसला बढ़ाया।
हैप्पी के दादा का भी यह सपना था कि उनकी पोती एक दिन भारत की जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मैदान में उतरे। दादा के इसी सपने को हैप्पी ने अपने जीवन का मुख्य लक्ष्य बना लिया। उस समय झुंझुनूं में महिला खिलाड़ियों के लिए मानक प्रशिक्षण सुविधाएं और मैदान लगभग नदारद थे। जो सीमित मैदान उपलब्ध थे, वे घर से दूर थे और वहां आम लोगों की भारी भीड़ के कारण नियमित अभ्यास करना संभव नहीं हो पाता था। बेटी की इस परेशानी को देखते हुए पिता राजेश ने घर के बाहर ही एक निजी क्रिकेट नेट स्थापित करवा दिया, ताकि उसका प्रशिक्षण बिना किसी बाधा के जारी रह सके।
छह घंटे का कड़ा अभ्यास और दादी का बदला नजरिया
घर के बाहर बने इसी अभ्यास स्थल पर हैप्पी ने घंटों पसीना बहाना शुरू किया। वे आज भी हर रोज करीब छह घंटे तक मैदान पर कड़ी ट्रेनिंग करती हैं। उनके पिता का मानना है कि बेटी को केवल एक सही अवसर की दरकार थी, बाकी मुकाम उसने अपनी अटूट लगन और मेहनत के बल पर हासिल किया है। जिस खेल को लेकर कभी हैप्पी की दादी सख्त नाराज हुआ करती थीं, आज वही दादी उन्हें टीवी और मैदान पर खेलते देख गर्व से भावुक हो जाती हैं। परिवार से मिले इस पूर्ण सहयोग ने खिलाड़ी के आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
अब इस खेल सफर में हैप्पी अकेली नहीं हैं। उनकी छोटी बहन अनुशी खीचड़ भी उन्हीं के पदचिन्हों पर चलते हुए क्रिकेट को करियर बना रही हैं। अनुशी ने राजस्थान अंडर-15 सीनियर ट्रेनिंग कैंप में अपनी जगह बनाई है। हैप्पी का स्पष्ट कहना है कि यदि किसी बेटी में खेल के प्रति सच्ची लगन और प्रतिभा है, तो अभिभावकों को उसे अपनी राह चुनने की पूरी आजादी देनी चाहिए, क्योंकि व्यक्तित्व और भविष्य के निर्माण में खेल भी पढ़ाई जितना ही महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
झुंझुनूं की बेटियों पर दिखा सफलता का व्यापक असर
हैप्पी की उपलब्धियों ने पूरे झुंझुनूं क्षेत्र में खेल संस्कृति को बदलने का काम किया है। पहले जहां शहर की क्रिकेट अकादमियों में लड़कियों की मौजूदगी लगभग शून्य रहती थी, वहीं हैप्पी के राष्ट्रीय और फ्रेंचाइजी स्तर पर चमकने के बाद परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। झुंझुनूं एकेडमी ने लड़कियों के लिए निःशुल्क कोचिंग सत्र शुरू किए हैं, जिसके चलते अब प्रतिदिन करीब 100 लड़कियां नियमित प्रशिक्षण के लिए मैदान में पहुंच रही हैं। छोटे शहर की एक लड़की का संघर्ष अब इलाके की सैकड़ों बालिकाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है।
घरेलू प्रतियोगिताओं से लेकर अंडर-19 एशिया कप तक की चमक
कम उम्र में ही हैप्पी ने बड़े टूर्नामेंटों में अपनी कप्तानी और हरफनमौला कौशल की छाप छोड़ी है। वर्ष 2024 में आयोजित 67वीं राष्ट्रीय स्कूली महिला क्रिकेट प्रतियोगिता में उन्होंने राजस्थान टीम का नेतृत्व करते हुए उसे फाइनल तक पहुंचाया। इस प्रतियोगिता में राजस्थान उपविजेता रहा और हैप्पी को पूरे टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी (प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट) घोषित किया गया। इसके अतिरिक्त वे स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SGFI) अंडर-19 टूर्नामेंट में भी राजस्थान की ओर से मैदान में उतरीं।
उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ वर्ष 2025 में आया, जब उनका चयन अंडर-19 एशिया कप के लिए भारतीय टीम में हुआ। यह मुकाम उनके समर्पण का सबसे बड़ा प्रमाण बना। घरेलू स्तर पर भी हैप्पी ने कई प्रतिष्ठित टूर्नामेंटों में नेतृत्व की कमान संभाली है, जिनमें सीकर वुमेंस टी-20 क्रिकेट चैंपियनशिप, बनस्थली विद्यापीठ लीग और बीएन क्रिकेट एकेडमी लीग शामिल हैं। वे अपनी सटीक गति, तेज गेंदबाजी और निचले क्रम में आक्रामक बल्लेबाजी के लिए पहचानी जाती हैं।



















