क्रिकेट मैदान पर जब कोई बल्लेबाज अपनी लय के चरम पर पहुंच जाता है, तो पिच का मिजाज या विरोधी गेंदबाज की धार मायने नहीं रखती। रोहित शर्मा की बल्लेबाजी में यही सहजता और शांत अंदाज देखने को मिलता है, जिसे अक्सर क्रिकेट के गलियारों में स्लीपिंग ब्यूटी के विशेषण से नवाजा जाता है। मुल्लांपुर के मैदान पर उनका वही पुराना और भरोसेमंद अंदाज एक बार फिर उभरकर सामने आया, जहां उन्होंने दबाव भरे पलों में भी अपनी कलात्मक बल्लेबाजी से मैच का रुख मोड़ दिया।
मुल्लांपुर में संकटमोचक बनकर उभरे रोहित शर्मा
गुवाहाटी में धमाकेदार शतक जमाने के बाद रोहित शर्मा ने मुल्लांपुर के मुकाबले में भी अपनी शानदार लय जारी रखी। 39 साल की उम्र में उनकी बल्लेबाजी पुरानी शराब की तरह समय के साथ और निखरती जा रही है। लगातार दो मुकाबलों में बड़ी पारियां खेलकर उन्होंने साफ कर दिया है कि उनकी रनों की भूख अब भी पूरी तरह बरकरार है। हालांकि, इस मुकाबले में वह अपने शतक से महज 8 रन दूर रह गए, जिसका मलाल उनके चेहरे पर साफ झलक रहा था।
यह पारी भारतीय टीम के लिहाज से बेहद नाजुक मोड़ पर आई थी। मुकाबले के शुरुआती दौर में ही फॉर्म में चल रहे शुभमन गिल और विराट कोहली कुल मिलाकर सिर्फ 4 रन के स्कोर पर पवेलियन लौट गए थे। दोनों बड़े विकेट गिरने के बाद बल्लेबाजी करना किसी आग के दरिया को पार करने जैसा कठिन लग रहा था। लेकिन एक मंझे हुए चैंपियन बल्लेबाज की तरह रोहित ने अपनी तकनीक और अनुभव का सहारा लेकर इस चुनौती को पूरी तरह आसान बना दिया।
रितुराज गायकवाड़ के साथ साझेदारी और नियंत्रित आक्रामकता
मैदान पर दो विकेट जल्द गिरने के बाद रोहित शर्मा ने रितुराज गायकवाड़ के साथ मिलकर पारी को आगे बढ़ाया। उन्होंने गैरजरूरी जोखिम लेने से परहेज किया और टीम की जरूरत के अनुसार अपने खेल का रुख तय किया। रोहित ने 85 गेंदों का सामना करते हुए 10 चौके और 3 छक्के जड़े। जब वह 92 रन बनाकर पवेलियन लौटे, तो शतक पूरा न कर पाने का दर्द उनके हावभाव में नजर आ रहा था, लेकिन तब तक वह टीम को बेहद मजबूत स्थिति में पहुंचा चुके थे।
वेस्टइंडीज सीरीज में साथी खिलाड़ियों के लिए ड्रीम पार्टनर
वेस्टइंडीज के खिलाफ मौजूदा तीन मैचों की सीरीज पर नजर डालें तो रोहित शर्मा ने न सिर्फ खुद रन बनाए हैं, बल्कि अपने जोड़ीदारों को भी खुलकर खेलने का मौका दिया है। तिरुवनंतपुरम के पहले मैच में उन्होंने 32 रन बनाए, जहां शुभमन गिल के साथ उन्होंने 12 ओवर के भीतर 76 रन जोड़कर टीम को ठोस शुरुआत दी थी। इसके बाद गुवाहाटी के मैच में जब भारतीय टीम के सामने 405 रनों का विशाल लक्ष्य था, तब रोहित ने सिर्फ 75 गेंदों में 101 रन ठोक डाले थे। उस मुकाबले में उन्होंने कप्तान गिल पर दबाव नहीं आने दिया और दोनों ने पहले विकेट के लिए 255 रनों की विशाल साझेदारी की।
मुल्लांपुर में उनका सलामी जोड़ीदार बदला, लेकिन रोहित का स्वभाव और जिम्मेदारी निभाने का तरीका नहीं बदला। उन्होंने रितुराज गायकवाड़ के साथ तीसरे विकेट के लिए 137 रनों की मजबूत साझेदारी कर टीम को संकट से पूरी तरह उबार लिया। वेस्टइंडीज के खिलाफ इस सीरीज में लगातार बेहतरीन पारियां खेलकर रोहित ने उन सभी आलोचकों को खामोश कर दिया है, जो टीम में उनकी मौजूदगी पर सवाल उठा रहे थे।



















