जर्मनी की धरती पर आयोजित हाइलो ओपन सुपर 500 बैडमिंटन टूर्नामेंट में भारतीय दल ने रविवार को यादगार खेल दिखाते हुए महिला और पुरुष दोनों वर्गों के एकल खिताब अपनी झोली में डाल लिए। देश की अनुभवी खिलाड़ी पीवी सिंधू तथा युवा सनसनी लक्ष्य सेन ने अपने-अपने खिताबी मुकाबलों को एकतरफा अंदाज में सीधे गेमों में जीतकर वैश्विक मंच पर भारतीय बैडमिंटन का परचम लहराया। दोनों खिलाड़ियों की इस संयुक्त उपलब्धि ने एक ही दिन में अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में भारत को दोहरी स्वर्णिम मुस्कान दे दी।
पीवी सिंधू की शानदार जीत और खिताबी चमक
महिला एकल के फाइनल में दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू ने डेनमार्क की लाइन होजमार्क केयर्सफेल्ड के खिलाफ शुरुआत से ही अपना दबदबा बनाए रखा। विश्व रैंकिंग में 25वें पायदान पर मौजूद केयर्सफेल्ड आठवीं वरीयता के साथ कोर्ट पर उतरी थीं, मगर सिंधू के सटीक आक्रमण और धैर्य के आगे उनकी एक न चली। कुल पांच लाख डॉलर की पुरस्कार राशि वाली इस प्रतियोगिता के फाइनल मैच में सिंधू ने महज 39 मिनट के अंदर 21-12, 21-14 से मुकाबला जीतकर चालू सत्र का अपना दूसरा खिताब दर्ज कर लिया।
इस जीत के साथ सिंधू ने सत्र के आखिरी चरण में होने वाले विश्व टूर फाइनल्स के लिए अपनी दावेदारी बेहद मजबूत कर ली है। खिताबी जीत से उनके खाते में 9,200 महत्वपूर्ण रैंकिंग अंक जुड़ गए हैं। इस मैच से पहले दोनों के बीच हुए आमने-सामने के सात मुकाबलों में सिंधू 6-1 से आगे थीं, जहां डेनमार्क की शटलर को एकमात्र जीत वर्ष 2025 के सुदीरमन कप फाइनल्स में मिली थी। सिंधू ने अपने अनुभव और कोर्ट कवरेज से इस बढ़त को और मजबूत कर 7-1 कर दिया।
कोर्ट पर रणनीति और खेल का मिजाज
फाइनल मुकाबले के शुरुआती पलों में दोनों खिलाड़ियों के बीच बराबरी की टक्कर दिखी। सिंधू की कुछ शुरुआती चूक का लाभ उठाकर केयर्सफेल्ड ने 3-3 की बराबरी हासिल की और रैलियों को लंबा खींचकर भारतीय खिलाड़ी को थकाने की चाल चली। हालांकि सिंधू ने तुरंत अपनी रणनीति बदलते हुए नेट पर चतुराई भरा खेल दिखाया और ब्रेक तक 8-5 की बढ़त बना ली।
इसके बाद कोर्ट के पिछले हिस्से से लगाए गए सटीक पुश और बेहतरीन बैकहैंड विनर के दम पर सिंधू ने स्कोर 14-11 और फिर 17-12 कर दिया। केयर्सफेल्ड के अनफोर्स्ड एरर के कारण सिंधू को आठ गेम प्वाइंट मिले, जिसे भुनाने में उन्होंने बिल्कुल देर नहीं की और पहला गेम आसानी से अपने पाले में कर लिया।
दूसरे गेम में भी भारतीय शटलर की पकड़ ढीली नहीं पड़ी। सिंधू ने तेजी से 4-2 और 6-3 की बढ़त हासिल की। केयर्सफेल्ड ने वापसी करते हुए अंतर को 7-6 तक घटाया, लेकिन दबाव में उन्होंने लगातार दो शॉट कोर्ट की सीमा रेखा से बाहर मार दिए। स्कोर 10-6 होने के बाद सिंधू ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अंत में लगातार छह चैंपियनशिप प्वाइंट अर्जित करते हुए मैच और ट्रॉफी दोनों अपने नाम कर ली।
लक्ष्य सेन का दबदबा और सत्र का पहला खिताब
महिला वर्ग में मिली इस जबरदस्त कामयाबी के कुछ ही देर बाद पुरुष एकल फाइनल में युवा भारतीय शटलर लक्ष्य सेन कोर्ट पर उतरे। लक्ष्य ने पूरे मुकाबले में अपनी तेज गति और आक्रामक खेल का परिचय दिया। उन्होंने जोनाथन क्रिस्टी के खिलाफ मुकाबले को पूरी तरह नियंत्रित करते हुए 21-17, 21-10 के सीधे सेटों में शिकस्त दी।
लक्ष्य सेन की इस शानदार जीत ने जर्मनी में चल रही इस प्रतियोगिता में भारत की ऐतिहासिक दोहरी सफलता पक्की कर दी। इस युवा खिलाड़ी के लिए यह वर्तमान वर्ष का पहला प्रमुख एकल खिताब रहा, जिसने उनके आत्मविश्वास को आगामी टूर्नामेंटों के लिए नई ऊर्जा दी है।
शानदार फॉर्म और आगे की तैयारी
जुलाई में जापान ओपन जीतने और उसके बाद फ्रेंच ओपन में उपविजेता रहने वाली सिंधू ने इस पूरे टूर्नामेंट में गजब की मानसिक एकाग्रता दिखाई। मैच के बाद अपनी रणनीति और खेल के बारे में सिंधू ने कहा, ‘बिल्कुल, मेरी पूरी टीम को इसका श्रेय जाता है।’ उन्होंने अपनी बात में यह भी जोड़ा कि आगे बढ़ते समय समझदारी से फैसले लेना और लगातार सुधार करना सबसे जरूरी होता है। उनका पूरा ध्यान हर अंक पर शत-प्रतिशत देने पर केंद्रित रहा, जिसने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।


















