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गृहणियों के हुनर को बाजार दे रहीं संगीता पांडेय, पैकेजिंग और विपणन से संवर रही महिलाओं की किस्मतसक्सेस स्टोरी
16 अग॰ 2026, 11:02 am (73 दिन पहले)· 3

गृहणियों के हुनर को बाजार दे रहीं संगीता पांडेय, पैकेजिंग और विपणन से संवर रही महिलाओं की किस्मत

गोरखपुर की डिब्बे वाली दीदी के नाम से मशहूर संगीता पांडेय स्थानीय महिलाओं के हस्तनिर्मित उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराकर उन्हें 50 हजार रुपये तक की मासिक कमाई का जरिया दे रही हैं।

गोरखपुर में महिलाओं के लिए रोजगार और स्वावलंबन के मायने तेजी से बदल रहे हैं। अब यहां की महिलाएं केवल पारंपरिक घरेलू कामकाज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपनी कला और हुनर को छोटे व्यवसायों में बदलकर बेहतर आमदनी हासिल कर रही हैं। घर की जिम्मेदारियों को संभालते हुए अपनी पहचान बनाने की इस मुहिम में संगीता पांडेय एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरी हैं। क्षेत्र में 'डिब्बे वाली दीदी' के नाम से पहचानी जाने वाली संगीता महिलाओं के तैयार किए गए सामान को बाजार से जोड़ने और उन्हें सही मंच दिलाने का काम कर रही हैं।

घरेलू हुनर से बाजार तक का सफर

गोरखपुर के विभिन्न इलाकों में महिलाएं गोबर से आकर्षक दीये और सुंदर सजावटी सामान तैयार कर रही हैं। इसके अलावा जूट के दैनिक उपयोग वाले उत्पाद और टेराकोटा की खूबसूरत मूर्तियां एवं कलाकृतियां भी घरों में बनाई जा रही हैं। इन उत्पादों को तैयार करने में महिलाओं का हुनर तो झलकता है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती इन सामानों की बिक्री और विपणन की होती है। सही खरीदार न मिलने के कारण मेहनत का उचित मूल्य पाना कठिन हो जाता है। संगीता पांडेय इसी खाई को पाटने का काम करती हैं। वह महिलाओं के बनाए उत्पादों की सही पैकेजिंग, मार्केटिंग और बिक्री में सीधे तौर पर मार्गदर्शन देती हैं, ताकि हर महिला को अपनी मेहनत का पूरा लाभ मिल सके।

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पैकेजिंग और विपणन की विशेष पाठशाला

खुद डिब्बे बनाने की फैक्ट्री संचालित करने वाली संगीता का मानना है कि किसी भी उत्पाद की सफलता उसकी पैकेजिंग पर बहुत हद तक निर्भर करती है। इसी उद्देश्य से वह समय-समय पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित करती हैं। इन क्लासों में वह महिलाओं को सिखाती हैं कि कैसे उत्पाद की पैकिंग को आकर्षक बनाया जाए ताकि ग्राहक पहली नजर में उसे पसंद कर लें। उत्पाद की पैकेजिंग मजबूत और सुंदर होने से उसकी बाजार कीमत में सुधार आता है। अब तक हजारों महिलाओं को इस माध्यम से घर बैठे रोजगार की मुख्यधारा से जोड़ा जा चुका है।

10 हजार की पूंजी से 50 हजार तक की मासिक कमाई

व्यावसायिक मार्गदर्शन और बेहतर विपणन के चलते महिलाओं की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखा जा रहा है। कई महिलाएं शुरुआत में महज 10 हजार रुपये की छोटी पूंजी से अपना काम शुरू करती हैं। निरंतर प्रयास और सही पैकेजिंग के बल पर कुछ ही समय में उनकी कमाई 40 हजार से 50 हजार रुपये प्रतिमाह तक पहुंच जाती है। संगीता पांडेय का कहना है कि यदि महिलाओं में काम करने का जज्बा और हुनर है, तो बाजार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उचित दिशा, सही पैकेजिंग और बेहतर मार्केटिंग की मदद से घर के छोटे काम को भी बड़े कारोबार का रूप दिया जा सकता है।

सवाल-जवाब

संगीता पांडेय को 'डिब्बे वाली दीदी' क्यों कहा जाता है?
संगीता पांडेय स्वयं डिब्बे बनाने की फैक्ट्री चलाती हैं और महिलाओं के उत्पादों की डिब्बा बंद पैकेजिंग तथा विपणन में मदद करती हैं, इसीलिए उन्हें लोग प्यार से 'डिब्बे वाली दीदी' कहते हैं।
गोरखपुर की महिलाएं घर से कौन-कौन से सामान तैयार कर रही हैं?
महिलाएं गोबर से बने दीये और सजावटी सामान, जूट से निर्मित उपयोगी वस्तुएं तथा टेराकोटा की सुंदर मूर्तियां और शोपीस बना रही हैं।
इस व्यवसाय से जुड़ी महिलाओं की महीने की कमाई कितनी है?
10 हजार रुपये से शुरुआत करने वाली महिलाएं अपने काम के विस्तार के साथ महीने में 40 हजार से 50 हजार रुपये तक कमा रही हैं।
संगीता पांडेय महिलाओं की सहायता किस प्रकार करती हैं?
वह महिलाओं को उत्पादों की आकर्षक पैकेजिंग सिखाती हैं, सामान को बाजार तक पहुंचाती हैं और विपणन में सहायता करके सही दाम दिलवाती हैं।
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