क्रुणाल पंड्या जल्द ही भारतीय टी20 क्रिकेट टीम में पांच साल का लंबा वनवास खत्म कर वापसी कर सकते हैं। यदि आगामी टी20 सीरीज के लिए घोषित होने वाले स्क्वॉड में उनका नाम शामिल होता है, तो यह क्रिकेट जगत के लिए कोई चौंकाने वाला फैसला नहीं होगा। भारतीय स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या के बड़े भाई क्रुणाल ने पिछले दो आईपीएल सीजन में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए खिताबी जीत में बेहद अहम भूमिका निभाई है, जिसके चलते राष्ट्रीय टीम में उनकी वापसी की सुगबुगाहट काफी तेज हो गई है।
साल 2021 में श्रीलंका के खिलाफ आखिरी बार भारत की जर्सी में टी20 इंटरनेशनल मैच खेलने वाले क्रुणाल ने साल 2025 और 2026 के आईपीएल सत्र में अपने बल्ले और गेंद के शानदार प्रदर्शन से चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टीम मैनेजमेंट बाएं हाथ के स्पिन ऑलराउंडर के विकल्प के तौर पर अक्षर पटेल की जगह क्रुणाल पंड्या पर दांव लगा सकता है, क्योंकि अक्षर का हालिया टी20 प्रदर्शन कुछ खास प्रभावी नहीं रहा है।
बाएं हाथ के स्पिन विकल्प की तलाश
हाल ही में इंग्लैंड और आयरलैंड के खिलाफ खेली गई टी20 सीरीज के दौरान भारतीय टीम मैनेजमेंट ने बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाजी विकल्पों पर पूरा जोर दिया था। अक्षर पटेल को इन दौरों पर कुल सात मुकाबलों में खेलने का मौका मिला, लेकिन उनका प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। इंग्लैंड के खिलाफ चार टी20 इंटरनेशनल मैचों में अक्षर केवल दो विकेट ही चटका पाए, जबकि आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों में भी उनके नाम दो ही विकेट दर्ज हो सके। इसी वजह से टीम इंडिया में बाएं हाथ के स्पिनर के स्लॉट को लेकर नए और अनुभवी विकल्पों की तलाश शुरू हो चुकी है, जिसमें क्रुणाल पंड्या का नाम सबसे आगे चल रहा है।
शानदार आईपीएल रिकॉर्ड और अनुभव
आईपीएल 2026 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का प्रतिनिधित्व करते हुए क्रुणाल ने अपनी गेंदबाजी के दम पर 14 विकेट अपने नाम किए थे। गेंदबाजी के अलावा निचले क्रम पर आकर उपयोगी रन बनाने की उनकी काबिलियत उन्हें अन्य दावेदारों से काफी आगे रखती है। क्रुणाल के पास टी20 फॉर्मेट का लंबा अनुभव है। उन्होंने अपने टी20 करियर में अब तक कुल 3243 रन बनाने के साथ-साथ 179 विकेट भी झटके हैं। इसके अलावा वह पांच बार आईपीएल की विजेता टीम का हिस्सा रह चुके हैं। उन्होंने तीन बार मुंबई इंडियंस के लिए यह ट्रॉफी जीती है और फिर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की पहली खिताबी जीत के साथ उनका टाइटल डिफेंड करने वाली टीम में भी वह शामिल रहे थे।



















