घरेलू क्रिकेट में इन दिनों एक नए बल्लेबाज का नाम हर जुबान पर है। रणजी ट्रॉफी के मुकाबले के दौरान मैदान पर ऐसा कमाल देखने को मिला जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। मिजोरम की ओर से खेलते हुए इस खिलाड़ी ने मैराथन पारी खेलते हुए चार सौ का आंकड़ा पार कर इतिहास रच दिया। इस धमाकेदार प्रदर्शन के बाद से ही हर तरफ उनकी और उनके परिवार की चर्चा हो रही है।
मुंबई से मिजोरम तक का सफर
इस ऐतिहासिक उपलब्धि तक पहुंचने वाले खिलाड़ी का नाता पहले मुंबई की टीम से रहा है। उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी में मुंबई का प्रतिनिधित्व किया था तथा कई बड़े खिलाड़ियों के साथ मैदान साझा किया था। हालांकि महानगर की टीम में अत्यधिक प्रतिस्पर्धा के कारण उन्हें नियमित मौके नहीं मिल पा रहे थे। इसके बाद उन्होंने अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए मिजोरम का रुख किया और बतौर अतिथि खिलाड़ी वहां से मैदान में उतरे। शुरुआती मुकाबलों में वह चूक गए थे लेकिन इस बार उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी।
पिता का मिला मजबूत सहारा
इस अद्भुत सफलता के पीछे उनके पारिवारिक संघर्ष और मार्गदर्शन की बड़ी भूमिका रही है। उनके पिता राजेश सुतार नब्बे के दशक में मुंबई के खूंखार बल्लेबाज माने जाते थे जो अपने लंबे छक्कों के लिए जाने जाते थे। जब भी बेटे का चयन नहीं होता था या वह खराब दौर से गुजरते थे, उनके पिता ही उनका हौसला बढ़ाते थे और उन्हें खुद पर भरोसा रखने की सीख देते थे। ऐतिहासिक पारी खेलने के बाद उन्होंने सबसे पहले अपने पिता को ही फोन किया।
दिग्गजों के एलीट क्लब में प्रवेश
इस शानदार दोहरे व तिहरे शतक से आगे निकलते हुए चौहरे शतक ने उन्हें दुनिया के चुनिंदा महान खिलाड़ियों की फेहरिस्त में ला खड़ा किया है। भारत की तरफ से प्रथम श्रेणी क्रिकेट में चार सौ रन बनाने वाले वह दूसरे बल्लेबाज बन गए हैं। उनसे पहले यह कारनामा केवल महाराष्ट्र के बीबी निंबालकर ने किया था जिन्होंने नाबाद 443 रन बनाए थे। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉन ब्रैडमैन और ब्रायन लारा जैसे दिग्गज ही इस क्लब का हिस्सा रहे हैं।
आखिरी छोर के बल्लेबाज का साथ
यह रिकॉर्ड पारी इतनी आसानी से नहीं बन सकती थी क्योंकि एक समय टीम के नौ विकेट गिर चुके थे। जब वह 231 रन पर खेल रहे थे तब संकट गहरा गया था लेकिन आखिरी बल्लेबाज लालरेम्पुइया छकछुआक ने डटकर मुकाबला किया। उन्होंने 76 गेंदों पर नाबाद 14 रन बनाए और दसवें विकेट के लिए अटूट साझेदारी कर इस ऐतिहासिक मुकाम को हासिल करने में पूरी मदद की।



















